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Shimla News: अकेलापन दूर करने का ठिकाना बना डे केयर सेंटर, तंबोला-कैरम से खिल उठे बुजुर्ग
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पूरा दिन सेंटर में बिताने के बाद शाम को लौट जाते हैं घर, डे केयर सेंटर में नियमित स्वास्थ्य जांच और फिजियोथैरेपी की भी सुविधा
दीक्षा सरोय
शिमला। घर में बहू काम में, पति अखबार और फोन पर और बेटा काम पर चला जाता है। पूरा दिन अकेले रहने से अच्छा है यहां आना। केंद्र में बुजुर्गों के लिए विभिन्न गतिविधियों के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच और फिजियोथैरेपी सत्र की सुविधा भी उपलब्ध है।
यह डे केयर सेंटर अब मेरा परिवार बन गया है। यह कहना है रामपुर बुशहर की 69 वर्षीय शक्ति ठाकुर का जो पिछले आठ साल से खलीनी स्थित डे केयर सेंटर में रह रही हैं। शक्ति ठाकुर ने बताया कि सेंटर में सुबह से शाम तक वह गपशप, तंबोला, शतरंज और कैरम खेलकर अपना समय बिताती हैं। उनके जैसी कहानी शिमला के सैकड़ों बुजुर्गों की हैं, जिनके घरों में पसरा सन्नाटा अब इस सेंटर की रौनक में बदलता नजर आ रहा है। अकेलेपन और तनाव से जूझ रहे बुजुर्गों को अब खलीनी स्थित डे केयर सेंटर में नया सहारा मिल गया है। यहां वह तंबोला और कैरम खेल अपना मन बहला रहे हैं। बुजुर्गों को यहां एक नया परिवार मिला है, जहां वे पूरा दिन बिताते हैं। पहले जहां वह अकेले रहते थे, अब उन्हें साथी मिल गए हैं। यह सेंटर उनके लिए सामाजिक मेलजोल का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। खलीनी चौक स्थित हेल्पेज इंडिया के इस डे केयर सेंटर में जिले के करीब 200 बुजुर्ग पंजीकृत हैं, जो यहां आकर अपना दिन बिताते हैं।
परिचर्चा
बीते सात वर्षों में यह केंद्र अब घर जैसा लगने लगा है और यहां आने वाले साथी परिवार बन गए हैं। केंद्र में आकर खुशी मिलती है। विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर मानसिक रूप से अच्छा महसूस होता है।
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-शक्ति ठाकुर, 69 वर्ष, निवासी बीयरखाना
केंद्र में बन गए कई दोस्त
कनलोग के पास रहने वाली 82 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया कि वह केंद्र शुरू होने के समय से यहां आ रही हैं। वह घर में अकेली रहती हैं और उनके बच्चे अपने-अपने काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं। ऐसे में अकेलापन दूर करने के लिए उन्होंने केंद्र आना शुरू किया। अब यहां उनके कई दोस्त बन गए हैं।
-कौशल्या कक्कड़, 82 वर्ष, निवासी कनलोग
यहां महसूस होत है तनाव मुक्त
कुछ समय पहले बीमारी के कारण जल्दी सेवानिवृत्त होना पड़ा। इसके बाद घर में रहकर तनाव बढ़ने लगा था। इसके बाद केंद्र आना शुरू किया। अब यहां आकर तनावमुक्त महसूस होता है और अच्छा समय व्यतीत होता है।
-केवल सिंह राणा, 60 वर्ष, निवासी निगम विहार
केंद्र में उपचार भी करवा रही हूं
घर में अकेली रहती हूं। बेटी की शादी हो गई है और बेटा बाहर रहता है। सुबह से दोपहर तक नौकरी करती हूं और दिन में केंद्र आती हूं। पैरों में दर्द होता है, इसलिए केंद्र में फिजियोथैरेपी से उपचार भी करवा रही हूं।
-कृष्णा देवी, 61 वर्ष, निवासी करसोग जिला मंडी
अच्छा लगता है केंद्र में समय बिताना
दो बेटे और एक बेटी है। बेटों की शादियां हो गई हैं। मैं परिवार के साथ रहती हूं, लेकिन पीठ दर्द की वजह से करीब 10 साल पहले केंद्र में आना शुरू किया और फिजियोथैरेपी करवाई। इसके बाद धीरे-धीरे केंद्र में मेरे दोस्त बनने लगे और अब यहां अच्छा समय बीत रहा है।
-किरण, 65 वर्ष, निवासी झंझीड़ी
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दीक्षा सरोय
शिमला। घर में बहू काम में, पति अखबार और फोन पर और बेटा काम पर चला जाता है। पूरा दिन अकेले रहने से अच्छा है यहां आना। केंद्र में बुजुर्गों के लिए विभिन्न गतिविधियों के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच और फिजियोथैरेपी सत्र की सुविधा भी उपलब्ध है।
यह डे केयर सेंटर अब मेरा परिवार बन गया है। यह कहना है रामपुर बुशहर की 69 वर्षीय शक्ति ठाकुर का जो पिछले आठ साल से खलीनी स्थित डे केयर सेंटर में रह रही हैं। शक्ति ठाकुर ने बताया कि सेंटर में सुबह से शाम तक वह गपशप, तंबोला, शतरंज और कैरम खेलकर अपना समय बिताती हैं। उनके जैसी कहानी शिमला के सैकड़ों बुजुर्गों की हैं, जिनके घरों में पसरा सन्नाटा अब इस सेंटर की रौनक में बदलता नजर आ रहा है। अकेलेपन और तनाव से जूझ रहे बुजुर्गों को अब खलीनी स्थित डे केयर सेंटर में नया सहारा मिल गया है। यहां वह तंबोला और कैरम खेल अपना मन बहला रहे हैं। बुजुर्गों को यहां एक नया परिवार मिला है, जहां वे पूरा दिन बिताते हैं। पहले जहां वह अकेले रहते थे, अब उन्हें साथी मिल गए हैं। यह सेंटर उनके लिए सामाजिक मेलजोल का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। खलीनी चौक स्थित हेल्पेज इंडिया के इस डे केयर सेंटर में जिले के करीब 200 बुजुर्ग पंजीकृत हैं, जो यहां आकर अपना दिन बिताते हैं।
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परिचर्चा
बीते सात वर्षों में यह केंद्र अब घर जैसा लगने लगा है और यहां आने वाले साथी परिवार बन गए हैं। केंद्र में आकर खुशी मिलती है। विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर मानसिक रूप से अच्छा महसूस होता है।
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-शक्ति ठाकुर, 69 वर्ष, निवासी बीयरखाना
केंद्र में बन गए कई दोस्त
कनलोग के पास रहने वाली 82 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया कि वह केंद्र शुरू होने के समय से यहां आ रही हैं। वह घर में अकेली रहती हैं और उनके बच्चे अपने-अपने काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं। ऐसे में अकेलापन दूर करने के लिए उन्होंने केंद्र आना शुरू किया। अब यहां उनके कई दोस्त बन गए हैं।
-कौशल्या कक्कड़, 82 वर्ष, निवासी कनलोग
यहां महसूस होत है तनाव मुक्त
कुछ समय पहले बीमारी के कारण जल्दी सेवानिवृत्त होना पड़ा। इसके बाद घर में रहकर तनाव बढ़ने लगा था। इसके बाद केंद्र आना शुरू किया। अब यहां आकर तनावमुक्त महसूस होता है और अच्छा समय व्यतीत होता है।
-केवल सिंह राणा, 60 वर्ष, निवासी निगम विहार
केंद्र में उपचार भी करवा रही हूं
घर में अकेली रहती हूं। बेटी की शादी हो गई है और बेटा बाहर रहता है। सुबह से दोपहर तक नौकरी करती हूं और दिन में केंद्र आती हूं। पैरों में दर्द होता है, इसलिए केंद्र में फिजियोथैरेपी से उपचार भी करवा रही हूं।
-कृष्णा देवी, 61 वर्ष, निवासी करसोग जिला मंडी
अच्छा लगता है केंद्र में समय बिताना
दो बेटे और एक बेटी है। बेटों की शादियां हो गई हैं। मैं परिवार के साथ रहती हूं, लेकिन पीठ दर्द की वजह से करीब 10 साल पहले केंद्र में आना शुरू किया और फिजियोथैरेपी करवाई। इसके बाद धीरे-धीरे केंद्र में मेरे दोस्त बनने लगे और अब यहां अच्छा समय बीत रहा है।
-किरण, 65 वर्ष, निवासी झंझीड़ी