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सदियाला पर्व: देवता के सम्मान में दहकते अंगारों पर नाचे ग्रामीण, अश्लील जुमले भी बोले
Sun, 22 Jan 2023 04:16 PM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 22 Jan 2023 04:16 PM IST
सार
सदियाला में ग्रामीण एक-दूसरे का हाथ पकड़कर जलती मशालों पर नाचते हैं। मान्यता है कि देवीय शक्ति के कारण अंगारों पर चलने के बावजूद किसी को चोट नहीं पहुंचती है।
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दहकते अंगारों पर नाचते ग्रामीण।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
जिला कुल्लू की ग्राम पंचायत शिल्ही राजगिरी में अनूठी देव परंपरा देखने को मिली। बाखली गांव में ग्रामीण जलते अंगारों पर नाचे। ग्रामीण अंगारों पर तक तब नाचते रहे, जब तक आग बुझ नहीं गई। इस दौरान ग्रामीणों ने अश्लील जुमले भी बोले। सदियों पुरानी अनूठी परंपरा को बाखली गांव में देवता आदिब्रम्हा (खोखन) के सम्मान में सदियाला पर्व के रूप में निभाया जाता है।
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मान्यता है कि देवीय शक्ति के कारण अंगारों पर चलने के बावजूद किसी को चोट नहीं पहुंचती है। इसका प्रमाण शुक्रवार देररात को बाखली में एक बार दोबारा देखने को मिला। देवता आदिब्रह्मा के कारकून संगत राम ने कहा कि बाखली सदियाला में ग्रामीण एक-दूसरे का हाथ पकड़कर जलती मशालों पर नाचते हैं।
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इस देव परंपरा का निर्वहन करते हुए वह तब तक एक-दूसरे का हाथ नहीं छोड़ते जब तक आग पूरी तरह बुझ नहीं जाती। कहा कि यह देवीय परंपरा सदियों से चली आ रही है। वर्तमान में भी इसका निर्वहन किया जा रहा है। उधर, धार्मिक नगरी मणिकर्ण घाटी के शारानीबेहड़ में माता रूपासना और ड्ढेई में माता कैलाशना के सम्मान में भी सदियाला पर्व मनाया गया। बर्फबारी के बीच शुक्रवार रात 4:00 बजे पुजारी खेमचंद और मोहर सिंह ने नंगे पांव मशालें निकालीं।
इसके उपरांत माता के मुख्य कारकूनों, हारियानों और श्रद्धालुओं ने अपनी मशालें जलाईं और क्षेत्र की परिक्रमा की। इस देव परंपरा का निर्वहन करते हुए क्षेत्र से अश्लील जुमलों और जलती मशालों के माध्यम से बुरी शक्तियों को भगाया गया। पुजारी खेमचंद और मोहर सिंह ने कहा कि ड्ढ़ेई गांव में माता कैलाशना और देवता मकाल के सम्मान में सदियाला पर्व मनाया जाता है।
इस देव परंपरा में हारियानों के अलावा घाटी के अन्य क्षेत्रों के श्रद्धालु भी शामिल होते हैं। इसके अलावा बंजारी की पंचायत चनौन के मठयाणा गांव में देवता बंगेश्वर महादेव के सम्मान में तुआर उत्सव मनाया गया। इसमें वाद्ययंत्रों की थाप पर मंडियालों का नृत्य देखने लायक रहा। देवता के रथ के साथ बीठ को भी नचाया गया। आखिर में बीठ को लोगों के बीच फेंका गया।