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शहर के राशन डिपो में दालों और सरसों तेल का टोटा
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शिमला। राजधानी के राशन डिपो में न तो लोगों को दालें मिल रही हैं न ही खाद्य तेल। शहर के अधिकांश डिपो में सितंबर माह की दालों और तेल का कोटा नहीं पहुंचा है। लोगों को समय पर डिपो से सस्ता राशन न मिलने के कारण भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी यही स्थिति बनी हुई है। लोगों को राशन को लेकर डिपो के बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ही दालों और तेल की खरीद करने के बाद रियायती दरों पर इसे उपलब्ध करवाता है। लेकिन निगम के गोदामों में सप्लाई न आने से डिपो में राशन नहीं पहुंच रहा। शहर के पंचायत भवन स्थित राशन डिपो में केवल मलका दाल देकर उपभोक्ताओं को लौटाया जा रहा है। पसंद की दो दालें नहीं रहीं। इसी तरह रिफाइंड तेल भी डिपो में नहीं है। शहर के मिडल बाजार स्थित डिपो में तेल नहीं है। घणाहट्टी डिपो में दालें और तेल का कोटा नहीं पहुंचा है। लिहाजा यहां रहने वाले लोगों को राशन बाहर से महंगी दरों पर खरीदना पड़ रहा है। राजधानी में राशनकार्ड धारकों की संख्या तीस हजार के करीब है। एपीएल परिवारों को राशन न मिलने से दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। विभाग भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। शिमला के सतपाल ने बताया कि चीनी, आटा, चावल व नमक डिपो पर मिला है। जबकि दालें नहीं मिली है। लोगों को यह खाद्य पदार्थ बाहर से लेने पड़ रहे है।
जिला नियंत्रक खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले श्रवण कुमार हिमालयन ने बताया कि जहां-जहां बैकलॉग है वहां पर कोटा उपलब्ध करवाया जा रहा है। लोगों को जल्द ही सस्ता राशन मुहैया करवा दिया जाएगा।
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जुलाई अगस्त का बांटा जा रहा बैकलॉग
शहर के डिपो में जुलाई और अगस्त के बैकलॉग का तेल सितंबर माह में लोगों को दिया जा रहा है। सितंबर माह का कोटा अभी तक नहीं आया है। सूत्रों का कहना है कि दाल चना के टेंडर न होने के कारण इसकी सप्लाई नहीं पहुंच रही। शहर के कुछ डिपो में मलका, मूंगी और माश की दाल ही मिल रही है। लोगों को चावल और आटा ही मिल रहा है।
डिपो में न दालें और न ही तेल
घणाहट्टी के गोपी चंद गुप्ता ने बताया कि डिपो में न तो दालें हैं और न ही तेल। बार-बार डिपो के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। केसर राम ने कहा कि वह रिफाइंड लेने स्पेशल डिपो पहुंचे थे लेकिन यहां मालूम हुआ कि राशन का कोटा नहीं है। अब निजी दुकान से महंगी दर पर इसे खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ही दालों और तेल की खरीद करने के बाद रियायती दरों पर इसे उपलब्ध करवाता है। लेकिन निगम के गोदामों में सप्लाई न आने से डिपो में राशन नहीं पहुंच रहा। शहर के पंचायत भवन स्थित राशन डिपो में केवल मलका दाल देकर उपभोक्ताओं को लौटाया जा रहा है। पसंद की दो दालें नहीं रहीं। इसी तरह रिफाइंड तेल भी डिपो में नहीं है। शहर के मिडल बाजार स्थित डिपो में तेल नहीं है। घणाहट्टी डिपो में दालें और तेल का कोटा नहीं पहुंचा है। लिहाजा यहां रहने वाले लोगों को राशन बाहर से महंगी दरों पर खरीदना पड़ रहा है। राजधानी में राशनकार्ड धारकों की संख्या तीस हजार के करीब है। एपीएल परिवारों को राशन न मिलने से दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। विभाग भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। शिमला के सतपाल ने बताया कि चीनी, आटा, चावल व नमक डिपो पर मिला है। जबकि दालें नहीं मिली है। लोगों को यह खाद्य पदार्थ बाहर से लेने पड़ रहे है।
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जिला नियंत्रक खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले श्रवण कुमार हिमालयन ने बताया कि जहां-जहां बैकलॉग है वहां पर कोटा उपलब्ध करवाया जा रहा है। लोगों को जल्द ही सस्ता राशन मुहैया करवा दिया जाएगा।
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जुलाई अगस्त का बांटा जा रहा बैकलॉग
शहर के डिपो में जुलाई और अगस्त के बैकलॉग का तेल सितंबर माह में लोगों को दिया जा रहा है। सितंबर माह का कोटा अभी तक नहीं आया है। सूत्रों का कहना है कि दाल चना के टेंडर न होने के कारण इसकी सप्लाई नहीं पहुंच रही। शहर के कुछ डिपो में मलका, मूंगी और माश की दाल ही मिल रही है। लोगों को चावल और आटा ही मिल रहा है।
डिपो में न दालें और न ही तेल
घणाहट्टी के गोपी चंद गुप्ता ने बताया कि डिपो में न तो दालें हैं और न ही तेल। बार-बार डिपो के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। केसर राम ने कहा कि वह रिफाइंड लेने स्पेशल डिपो पहुंचे थे लेकिन यहां मालूम हुआ कि राशन का कोटा नहीं है। अब निजी दुकान से महंगी दर पर इसे खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।