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Shimla News: कल्याण लॉज के आउटहाउस में रह रहे किरायदारों को तीन महीने में मकान खाली करने का आदेश

Tue, 06 Oct 2026 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 11:55 PM IST
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curt decession shimla
बिजली या पानी का मीटर नाम होने से संपत्ति पर मालिकाना हक साबित नहीं होता
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परिसर खाली करवाने के लिए इमारत का पूरी तरह खतरनाक या असुरक्षित होना अनिवार्य नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अपीलीय प्राधिकरण-II शिमला गौरव महाजन की अदालत ने किरायदारों की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए रेंट कंट्रोलर कोर्ट नंबर-1 शिमला के निष्कासन (एविक्शन) आदेश को सही ठहराते हुए बरकरार रखा है। अदालत ने ब्रिटिशकाल से रह रहे किरायेदारों को तीन महीने के भीतर विवादित परिसर खाली कर मकान मालिक को सौंपने के आदेश दिए हैं।
मकान मालिक राकेश आहूजा ने हिमाचल प्रदेश शहरी किराया नियंत्रण अधिनियम, 1987 की धारा 14 के तहत निष्कासन याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि अप्रैल 2010 में पंजीकृत सेल डीड के माध्यम से यह संपत्ति उन्होंने खरीदी थी। लक्कड़ बाजार के मुख्य क्षेत्र में स्थित यह भवन करीब 100 वर्ष से अधिक पुराना है। मिट्टी से निर्मित होने के कारण इसकी हालत कमजोर हो गई है। अब आधुनिक आरसीसी तकनीक से नया भवन बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए परिसर को खाली करवाना आवश्यक है। तकनीकी विशेषज्ञ की रिपोर्ट और तस्वीरों से भी भवन के खस्ताहाल होने और पुनर्निर्माण की आवश्यकता की पुष्टि हुई।
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मूल किरायेदार के वारिसों ने रेंट कंट्रोलर के फैसले के खिलाफ अपील दायर कर मकान मालिक के अधिकार पर सवाल उठाए थे। उनका दावा था कि बिजली और पानी का कनेक्शन उनके पूर्वज के नाम पर है और वे ब्रिटिशकाल से यहां रह रहे हैं। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि केवल बिजली या पानी का मीटर किसी के नाम होने से संपत्ति पर मालिकाना हक साबित नहीं होता। सेल डीड और राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) के अनुसार राकेश आहूजा ही संपत्ति के कानूनी मालिक हैं और कानूनन उन्हें पूर्व मकान मालिक के समस्त अधिकार प्राप्त हैं।
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अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों (प्रेम चंद बनाम शांता प्रभाकर व जगत पाल धवन केस) का हवाला देते हुए कहा कि परिसर खाली करवाने के लिए इमारत का पूरी तरह खतरनाक या असुरक्षित होना अनिवार्य नहीं है। इसके अलावा याचिका दायर करते समय पहले से नक्शा स्वीकृत होना भी अनिवार्य शर्त नहीं है। अदालत ने माना कि रेंट कंट्रोलर शिमला के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि या अनियमितता नहीं है जिसके चलते किरायेदारों की अपील खारिज कर दी है।
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