हिमाचल में शिक्षा परिषद के गठन के बाद बदल सकेंगे पाठ्यक्रम
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, कॉलेजों और निजी शिक्षण संस्थानों के युवा अब प्रदेश में बनाया पाठ्यक्रम पढ़ सकेंगे। पाठ्यक्रम में शामिल पाठ्यसामग्री को हायर एजूकेशन काउंसिल हरी झंडी देगी। विवि प्रशासन यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार पाठ्यक्रम बनाता है।
इसमें फेरबदल भी यूजीसी नियमों के तहत ही किया जा सकता है। प्रदेश की शिक्षा नीति के लिए तपोवन में होने वाले शीतकालीन सत्र में सरकार हिमाचल प्रदेश हायर एजूकेशन काउंसिल बिल-2018 रखेगी। इससे पूर्व सरकार ने मंत्रिमंडल बैठक में इसे मंजूरी दे दी है।
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को अपने स्तर पर प्रदेश की शिक्षा नीति बनाने के निर्देश जारी किए हैं। गुजरात, पंजाब, मिजोरम और गोवा सहित कई राज्यों में काउंसिल गठित की गई है तो कई राज्यों में काम चल रहा है।
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के अनुसार परिषद संबंधी बिल मंजूर होने से परिषद हिमाचल के विद्यार्थियाें के लिए अपना पाठ्यक्रम बना सकेगी। केंद्र ने इस बाबत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पाठ्यक्रम में शिक्षा के राष्ट्रीय और स्थानीय महत्व के अध्ययन एवं शोध विषय शामिल किए जा सकेंगे।
विवि प्रशासन के पास नहीं रहेगी पैसा खर्च करने की शक्ति
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत जारी बजट को भी विवि प्रशासन अपने स्तर पर खर्च नहीं कर पाएगा। काउंसिल के गठन के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश को बजट लाने का प्रावधान रहेगा।
इसके खर्च पर भी काउंसिल की नजर रहेगी। इससे पूर्व विवि अनुदान आयोग और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत बजट लाने और खर्च करने का काम सीधा विवि प्रशासन के पास होता था।
इन संस्थानों पर निगरानी रखेगी काउंसिल
दस से 15 सदस्यों वाली हिमाचल प्रदेश हायर एजूकेशन काउंसिल के तहत शिक्षण संस्थानों में बोर्ड ऑफ गवर्नेंस और प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग यूनिट गठित होंगी। स्वास्थ्य शिक्षा, इंजीनियरिंग शिक्षा, नर्सिंग शिक्षा, आर्किटेक्चर शिक्षा, विधि शिक्षा और तकनीकी शिक्षा देने वाले शिक्षण संस्थानों को भी काउंसिल के दायरे में लाया जाएगा।