प्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर, उगाएंगे देसी जड़ी-बूटियां
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हिमाचल में कभी लावारिस पशुओं तो कभी जंगली जानवरों द्वारा उजाड़ी जा रहीं फसलों से मायूस किसानों के लिए राहत भरी खबर है। अब किसान अपनी जमीन पर देसी जड़ी-बूटियां उगा सकेंगे। इससे जहां किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, वहीं जानवर भी इन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकेंगे। इसके लिए किसानों को विभाग के पास आवेदन करना होगा।
आयुर्वेद विभाग हिमाचल में 52 हेक्टेयर भूमि पर देसी जड़ी-बूटियां लगाने को सब्सिडी देगा। इस पर लगभग पचास लाख रुपये भी नेशनल आयुष मिशन के तहत स्वीकृत हुए हैं। किसान विभाग के माध्यम से देसी जड़ी-बूटियों की बिजाई के लिए आवेदन कर सकते हैं। विभाग सफेद मूसली, कुटकी, अतीश, अश्वगंधा, सर्पगंधा और तुलसी की खेती के लिए सब्सिडी देगा।
यह तमाम जड़ी-बूटियां जटिल बीमारियों का निदान करती हैं। हिमाचल के चंबा, शिमला, कुल्लू और मंडी में अतीश की खेतीबाड़ी की जाएगी। जबकि सफेद मूसली, कुटकी, अश्वगंधा, सर्पगंधा और तुलसी की हर जिले में खेती होगी। देसी जड़ी बूटियां दो से तीन साल में तैयार हो जाएंगी। इसके बाद आयुर्वेद विभाग आयुर्वेदिक फार्मेसी के माध्यम से किसानों-बागवानों से जड़ी बूटियों की खरीदारी करेगा।
इतने हेक्टेयर में होगी बिजाई
सफेद मूसली पांच हेक्टेयर भूमि पर रोपी जाएगी। इस पर छह लाख आठ हजार रुपये खर्च होंगे। कुटकी दस हेक्टेयर भूमि पर बीजी जाएगी। इस पर 12 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। अतीश दस हेक्टेयर भूमि पर बीजा जाएगा। इस पर 12 लाख 78 हजार रुपये खर्च होंगे। अश्वगंधा 13 हेक्टेयर भूमि पर रोपा जाएगा। इस पर एक लाख 42 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे।
सर्पगंधा सात हेक्टेयर भूमि पर लगाया जाएगा। इस पर तीन लाख जबकि तुलसी सात हेक्टेयर भूमि पर लगाई जाएगी। इस पर 92 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डा. सुनीत पठानिया ने कहा कि हिमाचल में 52 हेक्टेयर भूमि पर देसी जड़ी-बूटियां रोपी जाएंगी। बाद में इन्हें आयुर्वेदिक फार्मेसी के माध्यम से खरीदा जाएगा। हिमाचल में इससे किसानों-बागवानों की आर्थिकी सुदृढ़ होगी।