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Shimla News: सीटी स्कैन मशीन आठ दिन से बंद, कंपनी पर कसेगा शिकंजा
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आईजीएमसी
प्रबंधन ने कंपनी से मांगा जीवन प्रमाणपत्र, प्रतिदिन सात हजार रुपये लगेगा जुर्माना
15 साल पुरानी सीटी स्कैन मशीन 10 अगस्त से है खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में सीटी स्कैन मशीन आठ दिन से बंद पड़ी है। अस्पताल प्रबंधन ने रख रखाव कर रही कंपनी से अब मशीन का एंड ऑफ लाइफ सर्टिफिकेट (जीवन प्रमाण पत्र) मांगा है।
आईजीएमसी प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि मशीन का लंबे समय से बंद रहना न केवल अनुबंध शर्तों का उल्लंघन है बल्कि मरीजों के उपचार में बाधा भी डाल रहा है। अस्पताल ने कंपनी पर अनुबंध के अनुसार रोजाना 7000 रुपये का जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आईजीएमसी में लगी 15 साल पुरानी सीटी स्कैन मशीन 10 अगस्त से बंद पड़ी है और लगातार आठ दिन से इसकी मरम्मत नहीं हो पाई है। कंपनी बार-बार तकनीकी कारणों का हवाला दे रही है, लेकिन इतने लंबे समय तक मशीन का ठप रहना यह दर्शाता है कि कंपनी अनुबंध की शर्तों को गंभीरता से नहीं निभा रही। अब न केवल जुर्माना लगाया जा रहा है बल्कि कंपनी से एंड ऑफ लाइफ सर्टिफिकेट भी मांगा है ताकि भविष्य में नई मशीन के लिए प्रक्रिया शुरू की जा सके।
मशीन के बंद रहने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। अस्पताल में केवल एक अन्य सीटी स्कैन मशीन आपातकालीन ब्लॉक में चल रही है। इस कारण यहां रोजाना लंबी कतारें लग रही हैं और मरीजों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। कई मामलों में आपातकालीन उपचार भी प्रभावित हो रहा है। गंभीर स्थिति में मरीज को तुरंत जांच की जरूरत होती है, लेकिन मशीनों की कमी के कारण उपचार में देरी हो रही है। सीटी स्कैन आधुनिक उपचार प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है। सड़क दुर्घटनाओं, सिर की चोट और आंतरिक रक्तस्राव जैसे मामलों के आईजीएमसी में प्रतिदिन औसतन 150 से अधिक सीटी स्कैन होते हैं। अब एक मशीन के बंद होने से बी ब्लॉक में लगी मशीन पर स्कैन का बोझ बढ़ गया है।
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कोट
कंपनी से एंड ऑफ लाइफ सर्टिफिकेट मांगा है। इसके बाद इसे सरकार को भेजा जाएगा ताकि वैकल्पिक मार्ग ढूंढा जा सके। कंपनी ने टेंडर के तहत मानी गईं बहुत सी शर्तों का उल्लंघन किया है।
-राहुल राव, चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी
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प्रबंधन ने कंपनी से मांगा जीवन प्रमाणपत्र, प्रतिदिन सात हजार रुपये लगेगा जुर्माना
15 साल पुरानी सीटी स्कैन मशीन 10 अगस्त से है खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में सीटी स्कैन मशीन आठ दिन से बंद पड़ी है। अस्पताल प्रबंधन ने रख रखाव कर रही कंपनी से अब मशीन का एंड ऑफ लाइफ सर्टिफिकेट (जीवन प्रमाण पत्र) मांगा है।
आईजीएमसी प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि मशीन का लंबे समय से बंद रहना न केवल अनुबंध शर्तों का उल्लंघन है बल्कि मरीजों के उपचार में बाधा भी डाल रहा है। अस्पताल ने कंपनी पर अनुबंध के अनुसार रोजाना 7000 रुपये का जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आईजीएमसी में लगी 15 साल पुरानी सीटी स्कैन मशीन 10 अगस्त से बंद पड़ी है और लगातार आठ दिन से इसकी मरम्मत नहीं हो पाई है। कंपनी बार-बार तकनीकी कारणों का हवाला दे रही है, लेकिन इतने लंबे समय तक मशीन का ठप रहना यह दर्शाता है कि कंपनी अनुबंध की शर्तों को गंभीरता से नहीं निभा रही। अब न केवल जुर्माना लगाया जा रहा है बल्कि कंपनी से एंड ऑफ लाइफ सर्टिफिकेट भी मांगा है ताकि भविष्य में नई मशीन के लिए प्रक्रिया शुरू की जा सके।
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मशीन के बंद रहने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। अस्पताल में केवल एक अन्य सीटी स्कैन मशीन आपातकालीन ब्लॉक में चल रही है। इस कारण यहां रोजाना लंबी कतारें लग रही हैं और मरीजों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। कई मामलों में आपातकालीन उपचार भी प्रभावित हो रहा है। गंभीर स्थिति में मरीज को तुरंत जांच की जरूरत होती है, लेकिन मशीनों की कमी के कारण उपचार में देरी हो रही है। सीटी स्कैन आधुनिक उपचार प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है। सड़क दुर्घटनाओं, सिर की चोट और आंतरिक रक्तस्राव जैसे मामलों के आईजीएमसी में प्रतिदिन औसतन 150 से अधिक सीटी स्कैन होते हैं। अब एक मशीन के बंद होने से बी ब्लॉक में लगी मशीन पर स्कैन का बोझ बढ़ गया है।
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कंपनी से एंड ऑफ लाइफ सर्टिफिकेट मांगा है। इसके बाद इसे सरकार को भेजा जाएगा ताकि वैकल्पिक मार्ग ढूंढा जा सके। कंपनी ने टेंडर के तहत मानी गईं बहुत सी शर्तों का उल्लंघन किया है।
-राहुल राव, चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी