हिमाचल के बीबीएन के उद्योगों पर बैंक की किस्तें चुकाने का संकट
हिमाचल की जीडीपी में 25 फीसदी योगदान वाले उद्योग जगत पर कोरोना का साया इस कद्र बरपा है कि उद्योगों पर फिर से एक संकट खड़ा हो गया है। सरकार ने 20 अप्रैल से उद्योग शुरू करने के निर्देश दिए, दूसरी ओर अगले ही दिन लोगों को एक से दूसरे स्थान जाने की अनुमति दे दी। ऐसे में कामगार भी अपने घर चले गए। उद्योग 40 फीसदी कम उत्पादन कर पा रहे हैं। इससे टैक्स और राजस्व के साथ बैंक की किस्तें चुकाना भी मुश्किल हो गया है। 2400 उद्योगों से सालाना 70 हजार करोड़ का टर्नओवर होता है।
गौरतलब है कि बीबीएन में हिमाचल के साथ देश के कोने-कोने से कामगार काम करते हैं। खासतौर पर स्टील, लौह व अन्य बड़े उद्योगों में प्रवासी कामगार ही ज्यादा हैं, लेकिन 25 मार्च को लॉकडाउन होने के बाद कई प्रवासी अपने घर चले गए हैं। सूबे के कामगार भी अपने गांव जा चुके हैं। ऐसे में उद्योग चलाने को कामगारों की कमी खल सकती है। हालांकि, उद्योग अभी 50 फीसदी की छूट से उत्पादन कर रहे हैं। कामगारों को मार्च माह का वेतन दिया गया है। बैंक की किस्तें नहीं दे पा रहे हैं। मझधार में फंसे उद्योग टैक्स व राजस्व भी नहीं दे सकेंगे, जिससे सरकार को राजस्व में भी घाटा होगा।
सीआईआई हिमाचल चैप्टर के वाइस चेयरमैन एवं बीबीएनआईए के पूर्व अध्यक्ष शैलेष अग्रवाल ने कहा कि लॉकडाउन में सबसे पहले फार्मा उद्योगों को खोलने की अनुमति दी गई। बाद में 20 अप्रैल से अन्य कुछ उद्योगों को खोलने की इजाजत मिली, लेकिन अगले ही दिन हिमाचल में आवाजाही शुरू करने के निर्देश दिए गए, जिससे कामगार अपने घरों को चले गए। उद्योग उत्पादन क्षमता से 40 फीसदी से अधिक उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। औसतन 50 फीसदी उद्योग अपनी कैपेसिटी से भी कम चल रहे हैं।
सीआईआई के पूर्व चेयरमैन हरीश अग्रवाल ने कहा कि इंडस्ट्री चलाने के लिए बैलेंस बनाने की आवश्यकता है। सरकार सभी उद्योगों को चालू करने और उद्योगों को डिमांड देती है तो हिमाचल के कामगारों से ही उद्योग उत्पादन करने में सक्षम है। बीबीएनआईए के अध्यक्ष संजय खुराना ने कहा कि सरकार व प्रशासन से उद्योगों में वर्तमान में 50 फीसदी की दर से चल रहे उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की वार्ता चली हुई है। 70 से 80 फीसदी उत्पादन होता है तो सरकार को राजस्व भी उसके अनुरूप मिलेगा। कामगारों की कमी को बाहरी प्रदेशों से हिमाचल आए कामगारों सहित हिमाचल के अपने कामगारों के माध्यम से काम चलाया जा सकता है।