पूर्व आईपीएस एएन शर्मा पर धोखाधड़ी का केस
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विजिलेंस ने पूर्व आईपीएस एएन शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी है। शिमला थाने में मंगलवार देर शाम को इस बारे में सारी प्रक्रिया पूरी की गई।
एएन शर्मा ने वर्ष 2007 में भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ने के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। बाद में टिकट नहीं मिला और एएन शर्मा ने नौकरी में वापसी के लिए आवेदन किया।
तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस आवेदन को रद्द कर दिया था। लेकिन बाद में भाजपा सरकार में ये सरकारी नौकरी में लौट आए। तब वह शिमला नगर निगम में कमीशर थे। शर्मा 30 नवंबर 2011 को रिटायर हो चुके हैं।
धोखाधड़ी कर सेवा लाभ लेने का है आरोप
विजिलेंस के अनुसार वापसी के लिए आवेदन में देरी के कारण इसे रद्द किया गया था। लेकिन बाद में इन्हें नियमों के खिलाफ इन्हें वापस लिया गया। जांच में आरोप है कि शर्मा ने बैक डेट के आवेदन से धोखाधड़ी कर ये लाभ लिया।
अब कांग्रेस के दोबारा सत्ता में आने के बाद उनके खिलाफ जांच के आदेश विजिलेंस को दिए थे। एसपी विजिलेंस के अतिरिक्त कार्यभार देख रहे एसपी सोलन रमेश छाजटा को मामले की जांच सौंपी गई।
रिपोर्ट सौंपने के बाद विजिलेंस के आला अधिकारियों ने मामले में कानूनी सलाह ली और पूर्व आईजी के खिलाफ एफआईआर का फैसला लिया।
कुछ और अफसरों के नाम का हो सकता है खुलासा
एफआईआर के लिए मंगलवार को शिमला थाना में स्टाफ को देर शाम तक रोका रखा गया था। विजिलेंस सूत्रों के अनुसार इस मामले में गृह विभाग के भी कुछ अफसरों के नाम सामने आए हैं, हालांकि अभी तक विजिलेंस ने इन नामों का खुलासा नहीं किया है।
आगामी जांच में पता चलेगा कि आखिर यह मामला कितना बड़ा है और कौन कौन लोग इस संलिप्त पाए जाएंगे।
फिलहाल जांच एजेंसी ने तफ्तीश शुरू कर दी है। जल्द ही एएन शर्मा को पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।