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वर्दी घोटाले में अधिकारियों ने भी खड़े किए हाथ

Mon, 01 Jun 2015 11:38 AM IST
Updated Mon, 01 Jun 2015 11:38 AM IST
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uniform scam in education department.

स्कूल वर्दी घोटाले में अब एफआईआर नहीं होगी। नागरिक खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री जीएस बाली के मना करने के बाद अब शिक्षा विभाग ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। इन दोनों ही विभागों के बीच उच्च स्तर पर पूरा मामला पैचअप हो चुका है, जिस कारण मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। यहां तक कि विधि विभाग की राय को भी दरकिनार कर दिया गया है।

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वर्दी घोटाले में मुकदमा दर्ज कराने के लिए आदेश दिए थे। प्रदेश में अगस्त 2012 से दिसंबर 2014 के बीच 30.95 करोड़ रुपये की वर्दी स्कूलों में वितरित की गई। इस दौरान जांच के लिए 386 सैंपल लिए गए, जिनमें से 193 सैंपलों की जांच की गई। जांच के दौरान 57 सैंपल पूरी तरह फेल पाए गए।
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महज जुर्माना लगाकर निपटा दिया मामला

uniform scam in education department.

रिकॉर्ड के अनुसार 27 फीसदी से अधिक नमूने फेल पाए गए, लेकिन दो कंपनियों पर महज 3.88 करोड़ का ही जुर्माना लगाकर अफसरों ने इतिश्री कर ली। इसके बाद मामला बजट सत्र के दौरान विधानसभा में उठा, जिसके बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने खाद्य आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक को फोन पर एफआरआई कराने के लिए आदेश दिया, लेकिन सीएम के आदेश को दरकिनार कर दिया गया। विधि विभाग की भी राय ली गई।

विधि विभाग ने भी मुकदमा दर्ज कराने के लिए कहा, लेकिन प्रेस कांफ्रेंस करके खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री जीएस बाली ने शिक्षा विभाग पर मुकदमा दर्ज कराने का जिम्मा डाल दिया। अब शिक्षा विभाग भी मुकदमा दर्ज कराने से साफ तौर पर मना कर रहा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा पीसी धीमान ने बताया कि वर्दी खरीद में मुकदमा दर्ज कराने के लिए मुझे कोई आदेश नहीं मिला है। ऐसे में शिक्षा विभाग की ओर से मुकदमा दर्ज कराना कतई संभव नहीं है।

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