चोरी के लिए चुनी ‘चुड़ैल वाली रात’
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दो सौ साल पुराने रातड़ देवता मंदिर से एक किलो सोना और चार किलो चांदी की चोरी को अंजाम देने के लिए शातिरों ने डगयाली (चुडै़ल) वाली रात चुनी। अमावस्या के चलते मंदिर के कपाट खुले थे पर हर घर के दरवाजे बंद थे।
चोरों ने इसी का फायदा उठाया। वे जानते थे कि कोई भी घर से बाहर नहीं निकलेगा। शातिर आराम से सोने के छत्र, अशरफियां और हार उड़ा ले गए।
उधर, चोरी की सूचना के बाद रविवार को सैकड़ों लोग बरहई गांव में रातड़ देवता के मंदिर पहुंचे। देवता पर दर्जनों गांवों के लोगों की आस्था है। यहां देवता की अदालत लगी।
चोरी में गांव का शख्स भी शामिल
देवता ने गूर के माध्यम से कहा कि चोरी में उसके ही ‘परगने’ का एक आदमी शामिल है। इसी ने बाहर के तीन लोगों के साथ मिलकर वारदात अंजाम दी है। वह आदमी कौन है? इसका नाम सार्वजनिक करने से देवता ने मना कर दिया।
इस प्राचीन मंदिर की मरम्मत के लिए लाखों की धनराशि जुटाई गई है। मंदिर की मरम्मत होनी थी, लेकिन इससे पहले चोरी हो गई। खंडित मूर्ति की स्थापना पर खींचतान देवता की अष्टधातु की मूर्ति पर खींचतान जारी है।
एक पक्ष कहता है कि खंडित मूर्ति की पुन: स्थापना नहीं होती। दूसरी ओर लोगों की आस्था मूर्ति से जुड़ी है। वे चाहते हैं कि मूर्ति को ठीक कर स्थापित करें। गांव के 83 साल के रामसरण सेवानिवृत्त अध्यापक हैं।
खुदाई में निकली थी देवता की मूर्ति
उन्होंने कहा कि मंदिर 200 साल से भी पुराना है। उन्होंने बुजुर्गों से सुना है कि गांव के नजदीक खलाड जंगल में पशुओं को चारा खिलाने ले जाते थे।
एक जगह गाय खड़ी हो जाती थी और उसके थनों से दूध स्वयं निकलना शुरू हो जाता था। जब वहां खुदाई की तो देवता की यह मूर्ति निकली। उसके बाद इस मूर्ति को यहां स्थापित कर दिया।
उस रात नहीं भौंका कोई भी कुत्ता
स्थानीय लोगों ने कहा कि गांव में पंद्रह कुत्ते हैं। घटना वाली रात कोई कुत्ता नहीं भौंका। एक पालतू कुत्ता मंदिर प्रांगण में ही रात को रहता है लेकिन वह भी घटना वाले दिन वहां नहीं था।