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मनी लांड्रिंग केस: आनंद चौहान की न्यायिक हिरासत बढ़ी

Tue, 20 Dec 2016 09:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 20 Dec 2016 09:05 AM IST
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money laundering case: court increased judicial custody of anand chauhan

पटियाला हाउस कोर्ट ने बीमा एजेंट आनंद सिंह चौहान की न्यायिक हिरासत कोर्ट ने चार जनवरी तक बढ़ा दी। चौहान हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से जुड़े पांच करोड़ के मनी लांड्रिंग मामले में आरोपी हैं। न्यायिक हिरासत समाप्त होने पर उन्हें विशेष सीबीआई जज विनोद कुमार के समक्ष पेश किया गया था। उनकी जमानत याचिका हाईकोर्ट में लंबित है। 

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इस पर फैसला आने के बाद आरोपों पर बहस शुरू होगी। बता दें कि कोर्ट ने कुछ समय पहले चौहान की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। प्रवर्तन निदेशालय ने चौहान को चंडीगढ़ से 8 जुलाई को गिरफ्तार किया था। बता दें कि चौहान पर वीरभद्र सिंह के पांच करोड़ रुपये जीवन बीमा में निवेश करवाने का आरोप है। 
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चौहान ने वीरभद्र सिंह से करीब 5.14 करोड़ रुपये कैश लिया और अपने पंजाब नेशनल बैंक के खाते में जमा करवाया और उसके बाद वीरभद्र व उनके परिजनों के नाम पर बीमा पॉलिसी खरीद कर निवेश कर दिया बैंक खाते में मोटी रकम जमा होने के कारण वह आयकर विभाग की नजर में आ गया।
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आयकर विभाग ने चौहान के खिलाफ 2011 में जांच शुरू की थी।  जांच एजेंसी का कहना है कि वीरभद्र सिंह ने 2009 से 2011 के बीच केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुये करीब छह करोड़ की अघोषित संपत्ति अर्जित की थी। यह संपत्ति उनकी घोषित आय से अधिक थी। सीबीआई भी वीरभद्र के खिलाफ जांच कर रही है।

मुख्यमंत्री की चुनौती याचिका पर नहीं हुई सुनवाई

money laundering case: court increased judicial custody of anand chauhan

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, प्रतिभा सिंह और विक्रमादित्य सिंह की ओर से उनकी आयकर असेसमेंट को दोबारा जांचने के आयकर विभाग के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सोमवार को भी हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो पाई। 

याचिकाकर्ताओं ने इस मामले में शपथपत्र दायर करने के लिए एक बार फिर अतिरिक्त समय की मांग की, जिसे स्वीकारते हुए न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने मामले को 21 दिसंबर को लिस्ट करने के आदेश दिए। 

कोर्ट ने फिलहाल आयकर विभाग को इन मामलों में नोटिस जारी नहीं किए हैं। मामले के अनुसार वित्तीय वर्ष 2012-2013 में इन्होंने अपनी कुल आय का ब्योरा आयकर विभाग को देते हुए रिटर्न जमा करवाई थी। आयकर विभाग ने रिटर्न में खामियां पाते हुए प्रार्थियों

को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। 24 नवंबर 2016 को विभाग ने दोबारा आंकलन को खोलने के आदेशों के खिलाफ दायर की गई आपत्तियों को खारिज कर दिया। इन्हीं आदेशों को प्रार्थियों ने हाईकोर्ट में रिट याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी है।

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