झूठे प्रमाण पत्र पर बागवानी अधिकारी बनने वाले को जेल
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झूठे हिमाचली और ओबीसी प्रमाण पत्र देकर बागवानी विकास अधिकारी की नौकरी हासिल करने के आरोपी सत्या प्रकाश कनोजिया पुत्र राजेंद्र सिंह निवासी पटेल विहार, बेरी बिथूर जिला कानपुर उत्तर प्रदेश को अदालत ने दोषी करार दिया है। सीजीएम सोलन सचिन रघु की अदालत ने इस धोखाधड़ी में मामले में विभिन्न धाराओं के तहत दो सजाएं सुनाई हैं। जिसमें अधिकतम छह माह कारावास है। अभियोजन पक्ष से मामले की पैरवी जिला उपन्यायवादी नितिन सोनी ने की।
उन्होंने बताया कि आरोपी को आईपीसी की धारा 420 के तहत दोषी मानते हुए छह माह साधारण कारावास और दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके साथ ही जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को दो माह की अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। इसके साथ ही आरोपी को आईपीसी की धारा 467, 468, 469 और 471 के तहत छह माह की साधारण कारावास और दो हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
शिकायत के बाद उपायुक्त सोलन ने की थी जांच
उन्होंने बताया कि साल 1998 में प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से ओबीसी श्रेणी के लिए बागवानी विकास अधिकारी पद के लिए विज्ञापन निकाला गया था। जिसमें आरोपी ने हिमाचली और ओबीसी श्रेणी के झूठे प्रमाण पत्र दिखाकर अपने को सोलन के किरपाल राम का दत्तक पुत्र दिखा कर बागवानी विकास अधिकारी के पद अपनी सेवाएं देने लगा।
मामले में सोलन निवासी ललित कुमार अंबिया ने जिला उपायुक्त सोलन को शिकायत दी और हिमाचली और ओबीसी प्रमाण पत्र को चुनौती दी गई। उपायुक्त की ओर से की गई जांच में आरोपी के दोनों प्रमाण पत्र जाली पाए गए। जिसके बाद मामले की एफआईआर सोलन पुलिस ने दर्ज की। मामले में कुल 13 गवाहों की पेशी हुई। पक्ष और विपक्ष की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।