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बेटियों को उठा ले जाने की धमकी देने वाला गिरफ्तार

Sat, 04 Mar 2017 12:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 04 Mar 2017 12:33 PM IST
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Man arrested in threat to kidnapping case

पांवटा साहिब की दो नाबालिग लड़कियों को समझौता न करने पर उठा ले जाने की धमकी देने वाले एक संदिग्ध को शिमला पुलिस ने वीरवार रात आईजीएमसी के समीप धर दबोचा। लक्कड़ बाजार पुलिस उसे पूछताछ के लिए लक्कड़ बाजार चौकी ले आई। संदिग्ध ने माना कि वह नाबालिग बच्चियों का पड़ोसी है और इनका हालचाल जानने के लिए आया है।

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उसने लड़कियों को किसी तरह की धमकी देने से साफ इंकार किया। पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे बच्चियों और उसके परिजनों से दूर देने की हिदायत देकर छोड़ दिया और आगामी कार्रवाई के लिए मामला थाना सदर के सपुर्द कर दिया। शुक्रवार को दो नाबालिग लड़कियों को आईजीएमसी से छुट्टी दे दी गई है।
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ये बच्चियां पांवटा में एक कारोबारी के यहां पर काम करती थी। बच्चियों ने कारोबारी पर संगीन आरोप लगाए हैं और सिरमौर पुलिस ने बयान के आधार पर  कारोबारी पर पोक्सों एक्ट के तहत मुकदमा भी दर्ज किया है लेकिन  करीब एक हफ्ता बीत जाने के बावजूद सिरमौर पुलिस ने बच्चियों के मेडिकल करवाने में कोई रूचि नहीं दिखाई।
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मामला उस समय उलझ गया जब बच्चियों के परिजनों के ओर से शिमला पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई गई और आरोपी से समझौते के लिए दबाव डालने के संगीन आरोप लगे। ऐसे गंभीर मामले में मेडिकल जांच न करवाने पर सिरमौर पुलिस पर सवालों के कटघरे में है।  पांवटा साहिब में एक घर में दो नाबालिग लड़कियां काम करती थीं।

इनमें से एक नाबालिग पिटाई होने  के बाद बीमार हो गई थी। इसे उपचार के लिए आईजीएमसी पहुंचाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में बाल रोग वार्ड में उपचार किया गया है। पांवटा साहिब पुलिस ने नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न के

मामले पोक्सो एक्ट में आरोपी विजय भल्ला को गिरफ्तार किया है। मामले की जांच चल रही है। एसपी सिरमौर सौम्या सांबशिवन का कहना है कि बच्चियों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। नाबालिग का बयान दर्ज करने के बाद मेडिकल करवा दिया जाएगा।

क्या है पोक्सो एक्ट
कानूनी जानकार बताते हैं कि पोक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ  चिल्ड्रन फ्राम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट)   18 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का सेक्सुअल बर्ताव इस कानून के दायरे में आता है। इसके तहत लड़के और लड़की  दोनों को ही प्रोटेक्ट किया गया है। इस


तरह के मामलों की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में होती है और बच्चों के साथ होने वाले अपराध के लिए उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। इस एक्ट के तहत बच्चों को सेक्सुअल असॉल्ट सेक्सुअल हैरेसमेंट और पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से प्रोटेक्ट किया गया है। 2012 में बने इस कानून के तहत अलग अलग अपराध के लिए अलग -अलग सजा तय की गई।

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