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हे भगवान! सरकारी डिस्पेंसरी को बनाया घूस लेने का अड्डा

Wed, 23 Apr 2014 08:06 PM IST
Updated Wed, 23 Apr 2014 08:06 PM IST
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In govt dispensery, farmasist is demanding money from people

संजौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट बिक रहे हैं। अवैध फीस वसूली के लिए स्वास्थ्य महकमे ने नायाब तरीका निकाला है।

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स्वास्थ्य केन्द्र में इसके लिए बाकायदा एक बॉक्स रखा गया है। जैसे ही किसी व्यक्ति को मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट दिया जाता है, उसके बाद उस व्यक्ति को पैसे उस बाक्स में डालने के लिए कहा जाता है।
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‘अमर उजाला’ ने मंगलवार सुबह सवा दस बजे मौके का जायजा लिया और संदेह के घेरे में आए फार्मासिस्ट का स्टिंग किया।

50 से 100 रुपए में बेचे जा रहे प्रमाण पत्र

In govt dispensery, farmasist is demanding money from people

इस डिस्पैंसरी में मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट 50 से 100 रुपए में बेचे जा रहे हैं। ऐसे कर्मचारी को मेडिकल प्रमाण पत्र देकर छुट्टियां लेते हैं वे अक्सर यहीं पहुंचते हैं।

यहां तैनात फॉर्मासिस्ट विभाग के लिए कमाई का काम कर रहा है। डिस्पैंसरी में रखे बॉक्स को वैसे तो दानपात्र का नाम दिया गया है।

मगर सर्टिफिकेट बनने के बाद इसमें जबरदस्ती लोगों से पैसे डलवाए जाते हैं। यह धंधा पिछले काफी समय से चल रहा था।

लोगों ने कहा, पैसे लिए मगर रसीद नहीं दी

In govt dispensery, farmasist is demanding money from people

जिन लोगों से बिना रसीद के पैसे लिए गए हैं, वे अब इसके खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं। संजौली के ब्रिज किशोर नेगी ने अपनी शिकायत में कहा कि वह अपना मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने संजौली पीएचसी गए।

वहां फार्मासिस्ट ने उनसे डोनेशन के नाम पर जबरदस्ती 50 रुपये लिए। रसीद मांगने पर फार्मासिस्ट ने मना कर दिया।

उन्होंने कहा कि इससे पहले भी कई लोगों से इस डिस्पैंसरी में लोगों से पैसे लिए जा चुके हैं।

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स्वास्‍थ्य विभाग का दावा, होगी सख्त कार्रवाई

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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. दिलीप कंवर ने कहा कि अमर उजाला के माध्यम से उन्हें यह पता चला है, किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में डोनेशन बॉक्स नहीं रखा जा सकता।

साथ ही लोगों से मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट के पैसे भी नहीं लिए जा सकते हैं। अगर ऐसा है तो कार्रवाई होगी।

उधर, पीएचसी में तैनात डॉ. शिखा शर्मा ने कहा कि उन्होंने कभी भी फार्मासिस्ट को लोगों से डोनेशन लेने के लिए नहीं कहा है। लोग उनसे आग्रह करते हैं कि आईजीएमसी और डीडीयू में काफी भीड़ रहती है। लिहाजा, यहीं पर मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट बना दें।

फार्मासिस्ट बोला, डाक्टर के कहने पर लैता हूं पैसा

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उधर, पैसे लेने वाले फार्मासिस्ट का कहना है कि कानूनन हम चंदे की रसीद देने के अधिकारी नहीं हैं। डिस्पेंसरी के रखरखाव और सफाई के लिए हम लोगों से दान लेते हैं।

उसने कहा कि मैं मर्जी से पैसे नहीं लेता। डॉक्टर के कहने पर डोनेशन लेता हूं। यहां सफाई की कोई व्यवस्‍था नहीं है। सीएमओ साहब से कई बार मांग उठा चुके हैं।

छुट्टी के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने का रेट 50 रुपये हैं और ड्राइविंग लाइसेंस के 100 रुपये लेते हैं।

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