किया था घपला, अब खाएंगे हवालात की हवा
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सीबीआई कोर्ट शिमला ने बीएसएनएल के चार अधिकारियों और छह ठेकेदारों को विभिन्न धाराओं के तहत दो-दो साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। बीएसएनएल के जेटीओ एम. जितेंद्र, एसडीई मनमोहन सिंह, दयाचंद और आशुतोष को कैद के साथ 40-40 हजार जुर्माना भी लगाया है। मनमोहन सिंह को छोड़ कर तीनों आरोपी अंडर कस्टडी थे। सभी आरोपियों को अदालत ने बेल बाउंड पर छोड़ दिया है।
ठेकेदारों में धर्मेंद्र सिंह, सतीश छिब्बर, दिगंबर, कमल सिंह धौल्टा, भूपेंद्र व संजीव को दो-दो साल कैद के साथ 20-20 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। यह फैसला सीबीआई कोर्ट शिमला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भूपेश शर्मा की अदालत ने सुनाया। मामला वर्ष 2009 का है। राजगढ़ से सराहन रूट पर करीब नब्बे किलोमीटर में टेलीफोन केबल बिछाने का काम होना था।
काम के नाम पर की लीपापोती
इसके लिए 19 जनवरी 2009 को टेंडर हुआ। इसमें ठेकेदार धमेंद्र सिंह, सतीश छिब्बर, दिगंबर, कमल सिंह धौल्टा, भूपेंद्र और संजीव को अंडरग्राउंड फाइबर बिछाने के लिए टेंडर दिए गए। इस काम की निगरानी का जिम्मा सौ फीसदी एम जितेंद्र और पचास फीसदी मनमोहन सिंह, दयाचंद और आशुतोष के पास था। इन अधिकारियों पर आरोप है कि इन्हें पूरे हुए काम का नियम के तहत निरीक्षण नहीं किया और ठेकेदारों के किए गए काम पर अपनी ओके रिपोर्ट दे दी।
आरोप है कि ठेकेदारों ने टेंडर में दी गई शर्तों के अनुरूप काम नहीं किया। काम के नाम पर लीपापोती की गई। आरोपी अधिकारियों ने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। साल 2012 में इसकी शिकायत सीबीआई को की गई। सीबीआई ने जांच पूरी होने के बाद इस मामले में छह चालान अदालत में पेश किए। इस आधार पर आरोपियों को सजा सुनाई गई।
उम्र कैद की सजा निरस्त
हाईकोर्ट ने माता पिता की हत्या के आरोपी को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्र कैद की सजा को निरस्त कर दिया है। न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश पीएस राणा की खंडपीठ ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोलन के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसके तहत कर्मजीत उर्फ अमरजीत सिंह को माता-पिता की हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कठोर कारावास व 20 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई थी।
अभियोजन पक्ष द्वारा कोर्ट के समक्ष रखे गए तथ्यों के अनुसार आरोपी व उसके दो भाइयों ने अपने पिता बलवंत सिंह को बरछे व डंडे के प्रहार से मौत के घाट उतार दिया था। इसके अलावा उन्होंने अपनी मां को भी गला घोंट कर मार डाला। 12 व 13 अगस्त, 2006 की रात को हुई बारदात के पश्चात उन्होंने घर को आग के हवाले कर दिया ताकि मृतकों के शव जल जाएं।
19 गवाह पेश किए गए
कमल कुमार नामक व्यक्ति ने टेलीफोन कर पुलिस स्टेशन नालागढ़ को इस घटना की सूचना दी। इसके पश्चात आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड सहित की धारा 302 व 201 के तहत मुकदमा चलाया गया। आरोपी परमजीत सिंह, गुरजीत सिंह व अमरजीत सिंह के खिलाफ अभियोग साबित करने के लिए निचली अदालत के समक्ष कुल 19 गवाह पेश किए गए।
निचली अदालत ने सह आरोपी परमजीत सिंह व गुरजीत सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। लेकिन कर्मजीत सिंह को हत्या के लिए दोषी करार देते हुए उपरोक्त सजा सुनाई। कोर्ट ने मामले से जुड़े तथ्यों को देखते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों में काफी खामियां और विरोधाभास है इस कारण आरोपी को भी बरी किया जाता है।
हाईकोर्ट में बहुचर्चित सीडी प्रकरण मामले में बहस
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और पूर्व सासंद प्रतिभा सिंह से संबंधित बहुचर्चित सीडी प्रकरण मामले पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एसएम कटवाल, ने इस मामले के दोनों को बरी किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की है। इस अपील को दायर करने में करीब 100 दिनों की देरी हुई है। दोनों पक्षों की ओर से देरी माफी के आवेदन पर लंबी बहस हुई।
एसएम कटवाल ने देरी से अपील दायर करने का कारण घरेलू व्यस्तता बताया है। कटवाल के अनुसार सरकार ने इस मामले में जानबूझ कर अपील दायर नहीं की। वह पीड़ित होने के नाते निचली अदालत द्वारा दोनों आरोपियों को बरी करने के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की योग्यता रखता है। अटवाल के अनुसार निचली अदालत ने दोनों आरोपियों के पक्ष में जल्दबाजी में फैसला सुनाया और साक्ष्यों को परखे बिना बरी कर दिया।
सीएम की ओर से पेश दलीलों में विशेष न्यायाधीश (वन) शिमला के 24 दिसंबर, 2012 के फैसले को उचित ठहराया है। न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी। शेष दलीलों को सुनने के लिए कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 29 दिसंबर को तय की।