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सेब बगीचों के लिए विधायक-नेताओं ने भी कब्जाया जंगल

Thu, 23 Jul 2015 09:43 AM IST
Updated Thu, 23 Jul 2015 09:43 AM IST
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illegal tree apple encroachments on forest land by mla's and leaders.

सेब बगीचों के लिए हिमाचल के कुछ बडे़ नेताओं ने भी वन भूमि पर कब्जा किया हुआ है। हाईकोर्ट के आदेश पर छोटे बागवानों के अवैध बगीचों पर आरा चलाया जा रहा है, जबकि रसूखदारों के अवैध बगानों में घुसने की हिम्मत कोई नहीं कर पा रहा। इनमें कुछ विधायक, पूर्व मंत्री तक शामिल बताए जा रहे हैं। इसीलिए इस मसले पर ज्यादातर राजनेता खामोश हैं। जंगल की जमीन पर ये अवैध कब्जे शिमला के अलावा किन्नौर, कुल्लू और मंडी जिलों में भी बताए जा रहे हैं।

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश की दलील देकर राज्य वन विभाग ने ऊपरी शिमला के कई क्षेत्रों में अब तक सेब के हजारों फलदार पेड़ों को काट डाला है। कानून का डर दिखाकर यह कार्रवाई उन बागवानों के बगीचों में ज्यादा हो रही है, जिनका या तो राजनीतिक रसूख नहीं है या फिर वन विभाग के अधिकारी या कर्मचारी जहां बेखौफ आरा चला सकते हैं।
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कार्रवाई हो तो कई नेता हो सकते हैं नंगे

illegal tree apple encroachments on forest land by mla's and leaders.

राज्य वन विभाग के सूत्रों की मानें तो ईमानदारी से कार्रवाई हो तो इस हमाम में कई नेता नंगे हो सकते हैं। इनमें कुछ मौजूदा विधायक, पूर्व मंत्री और यहां तक कि प्रदेश की राजनीति में अच्छा स्थान रखने वाले कुछ नेता एवं उनके रिश्तेदार तक शुमार हैं। वन भूमि पर कई अधिकारियों के भी अतिक्रमण बताए जा रहे हैं। इनमें कुछ बडे़ अफसरों सहित सेवानिवृत्त अधिकारी भी बताए जा रहे हैं। राज्य वन विभाग की कार्रवाई अभी इन तक भी नहीं पहुंची है।

‘बगीचों के लिए नेताओं के कब्जों की जानकारी विभाग के पास हो सकती है। अभी मैं ऑफ हैंड कुछ नहीं बता पाऊंगा। जैसे-जैसे सूचना मिल रही है, वैसे-वैसे कार्रवाई हर अतिक्रमणकारी पर हो रही है।’
- एससी श्रीवास्तव, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन), वन विभाग, हिमाचल प्रदेश

अतिक्रमण को वन विभाग ही रहा जिम्मेवार- राज्य में वन भूमि पर बडे़ स्तर पर हुए अतिक्रमण के लिए वन विभाग ही जिम्मेवार रहा है। सेब बागवानी से युक्त क्षेत्रों में कीलें ठोंककर और जड़ों में तेजाब भरकर देवदार के पेड़ों को सुखाया जाता रहा है और उसी के बाद ही अवैध रूप से बगीचे लगते रहे हैं। एन्क्रोचमेंट की यह प्रक्रिया दशकों से चलती रही है और वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी आंखें मूंदे सबकुछ इग्नोर करते रहे हैं। आज यही अधिकारी एवं कर्मचारी आरा चला रहे हैं।

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