पीएचसी में महीनों से चल रहा था अवैध वसूली का खेल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जांच टीम ने संजौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट के नाम पर हो रही अवैध वसूली के मामले की रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य महकमे को सौंप दी है।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि डोनेशन के नाम पर यह गोरखधंधा काफी समय से चल रहा था। डोनेशन के नाम पर एकत्रित की गई रकम का कोई सटीक हिसाब-किताब नहीं रखा गया है और न ही इस बात के ठोस साक्ष्य आ पाए हैं कि यह पैसा डिस्पेंसरी पर ही कहां और कितना खर्च किया गया।
फार्मासिस्ट ने कहा है कि डॉक्टर के कहने पर डोनेशन फीस ली जाती है। उसमें उसका कोई हाथ नहीं। उधर, डॉक्टर ने भी कबूल किया है कि उसके पहले से यहां डोनेशन बॉक्स मौजूद है और लोग अपनी इच्छा से डोनेशन देते हैं।
कहां खर्च किया पैसा, नहीं मिल रहा रिकॉर्ड
एकत्रित पैसा डिस्पेंसरी की सफाई व्यवस्था और सुधार पर खर्च किया जा रहा है। हालांकि इसका कोई लेखाजोखा अब तक नहीं मिल पाया है कि कितनी डोनेशन आई और कहां खर्च की गई। इस बारे में उनसे जानकारी मांगी गई है।
‘अमर उजाला’ ने खुलासा किया था कि संजौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट बिक रहे हैं।
इसमें अवैध फीस वसूली के मामले में स्वास्थ्य महकमे ने नायाब तरीका निकाल रखा था। स्वास्थ्य केंद्र में इसके लिए बाकायदा एक बॉक्स रखा गया था। जैसे ही किसी व्यक्ति को मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट दिया जाता है, उसके बाद उस व्यक्ति को पैसे उस बॉक्स में डालने के लिए कहा जाता है।
सीएमओ ने कहा, फिलहाल कोई गड़बड़ी नहीं
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिलीप कंवर ने कहा कि जांच रिपोर्ट उन्हें मिल गई है। डॉक्टर ने कहा कि यह डोनेशन बॉक्स उनकी ज्वाइनिंग से पहले मौजूद था।
लोग अपनी इच्छा से डोनेशन देते थे। इस पैसे को डिस्पेंसरी के सुधार में ही खर्च किया जाता था। फार्मासिस्ट ने कहा कि उसने डॉक्टर के कहने पर डोनेशन ली।
कितना पैसा आया और कहां खर्च किया इसका अभी लेखाजोखा नहीं मिला है। इस बारे में जानकारी मांगी गई है। साथ ही आदेश दिए गए हैं कि भविष्य में रोगी कल्याण समिति के तहत रसीद बुक छपवाएं और डोनेशन देने वाले को रसीद दें।