पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने पर तीन साल कैद
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हाईकोर्ट ने बहू को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले 92 वर्षीय ससुर और 75 वर्षीय सास को दंड स्वरूप 25-25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। दोनों दोषियों की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें जेल भेजने की बजाय जुर्माने की सजा को उचित ठहराया।
हालांकि, कोर्ट ने 30 वर्षीय दोषी पति को 3 वर्ष कठोर कारावास और 25 हजार रुपये हर्जाने की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कांगड़ा के 30 अक्तूबर, 2008 के फैसले को पलटते हुए यह सजा सुनाई। न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ के समक्ष सास पुष्पा देवी और ससुर चुनी लाल ने पश्चाताप व्यक्त करते हुए दंड के प्रति नरमी बरतने की गुहार लगाई थी।
रेणु ने जहर पीकर कर ली थी आत्महत्या
मामले के अनुसार अगस्त 2002 को राकेश कुमार की शादी रेणु बाला से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद सभी दोषियों ने उसे दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। लगातार प्रताड़ना झेल रही रेणु बाला ने 5 नवंबर, 2004 को जहर पीकर आत्महत्या कर ली।
नूरपुर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज होने पर तीनों दोषियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए और 306 के तहत मुकदमा अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कांगड़ा स्थित धर्मशाला में चलाया गया, लेकिन उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। अभियोजन पक्ष ने दोष साबित करने के लिए कुल 10 गवाह पेश किए थे।