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पापा! मैं डॉक्टर नहीं बन पाऊंगी और फिर..

Thu, 12 Feb 2015 08:53 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मंडी
ब्यूरो/ अमर उजाला, मंडी Updated Thu, 12 Feb 2015 08:53 AM IST
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girl suicide at mandi himachal.

सुबह जब वह समय पर नहीं उठी तो परिजन उसे देखने गए। परिजनों ने उसे कमरे में अचेत अवस्था में पाया। उसे तत्काल संधोल अस्पताल में उपचार के लिए ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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डॉक्टरों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर सरकाघाट अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा।

पुलिस को छात्रा के कमरे की छानबीन के दौरान एक सुसाइड नोट मिला जिसमें उसने अपनी मौत के लिए स्वयं को जिम्मेदार ठहराया।

नोट में लिखा है कि वह अपने परिजनों की उम्मीदों के अनुरूप डॉक्टर न बन पाने पर यह कदम उठा रही है। सुसाइड नोट में नाबालिग छात्रा ने लिखा है कि मैं यह भी जानती हूं कि आप मुझे बेहद प्यार करते हैं, लेकिन इसके बावजूद मैं अपनी जान दे रही हूं।
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होनहार बेटी थी

girl suicide at mandi himachal.

17 वर्षीय छात्रा जमा दो साइंस संकाय में पढ़ाई कर रही थी। वह संधोल में अपने दादा-दादी के पास रहती थी। उसके माता-पिता सरकाघाट में रहते हैं। पिता पेशे से स्वर्णकार हैं। पापा की लाडली शुरुआती दौर से बेस्ट ऑलराउंडर थी।

खेल गतिविधियों में वह स्कूल स्तर पर खोखो, सांस्कृतिक कार्यक्रम में नृत्य और पढ़ाई में होशियार थी। बुधवार को आयोजित होने वाले स्कूल के एक समारोह में छात्रा सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग ले रही थी, लेकिन एकाएक ही छात्रा के आत्महत्या के कदम से क्षेत्रवासी भी हैरान हैं। छात्रा के इस निर्णय से सभी को झकझोर दिया है।

डीएसपी सरकाघाट (मंडी) संजीव भाटिया ने बताया कि सूचना के बाद छात्रा के कमरे में सुसाइड नोट मिला है। छात्रा ने आत्महत्या के लिए स्वयं को जिम्मेदार ठहरते हुए डॉक्टर नहीं बन पाने की बात लिखी है। आईपीसी की धारा 174 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जांच जारी है।

इन पर ध्यान दें अभिभावक

girl suicide at mandi himachal.

पढ़ाई के दबाव के कारण आए दिन छात्र अपनी जान गंवा बैठते हैं। चिकित्सकों की परिजनों को सलाह है कि वह बच्चों को करियर के प्रति सतर्क जरूर रखें। मगर इतना अधिक दबाव न बनाएं कि उसके पूरा न होने पर बच्चे पूरी तरह से टूट जाएं।

-बच्चों पर पढ़ाई का अनावश्यक दबाव न डालें अभिभावक

-बच्चों का मनोबल बढ़ाएं, उन्हें अच्छा करने को प्रेरित करें

-अन्य छात्रों से अपने बच्चे की तुलना न करें

-पढ़ाई के बीच बच्चों को टीवी देखने, खेलने की इजाजत दें

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