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सुपरिंटेंडेंट-एमवीआई के फर्जी हस्ताक्षर से बना डाले दर्जनों ड्राइविंग लाइसेंस

Sat, 18 Mar 2017 12:03 AM IST
सुनील चड्ढा/अमर उजाला, धर्मशाला
सुनील चड्ढा/अमर उजाला, धर्मशाला Updated Sat, 18 Mar 2017 12:03 AM IST
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Forge Driving Licence Found at SDM Office Dharamshala.

हिमाचल की एसडीएम कार्यालय धर्मशाला की लाइसेंस ब्रांच में करीब 41 तथाकथित फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का खुलासा हुआ है। तथाकथित फर्जीवाड़े की बात सामने आने के बाद एसडीएम दफ्तर में हड़कंप मच गया है। लाइसेंस ब्रांच के एक कर्मचारी जसबीर को शिफ्ट कर मुख्य दफ्तर में भेज दिया है।

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बताया जा रहा है कि मामले को अंदरखाते सुलझाने की कोशिश की जा रही है। करीब डेढ़ हफ्ता पहले सामने आए मामले में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि तथाकथित फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस आवेदकों को जारी भी कर दिए हैं, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
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लर्निंग के बाद रेगुलर लाइसेंस बनाने की अंतिम प्रक्रिया में आवेदक का कुनाल पत्थरी स्थान पर ड्राइविंग टेस्ट होता है। इसके लिए एसडीएम और आरटीओ कार्यालय से एमवीआई (मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर) अधिकृत किए जाते हैं। आवेदक ड्राइविंग टेस्ट में पास हो या फेल, इसका निर्णय यही दो अधिकारी लाइसेंस फाइल पर अपने हस्ताक्षर और स्टैंप लगाकर करते हैं।
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ड्राइविंग टेस्ट देने वालों की फाइल की एंट्री पहले इनके पास होती है। सरकारी रजिस्टर पर आवेदक के हस्ताक्षर लिए जाते हैं। इसके बाद लाइसेंस बनाए या कैंसल किए जाते हैं। पुख्ता सूत्रों के मुताबिक करीब डेढ़ हफ्ता पहले ड्राइविंग टेस्ट के बाद कुछ लाइसेंस बने तो उनकी फाइल में एसडीएम की ओर से गई सुपरिंटेंडेंट और आरटीओ दफ्तर के एमवीआई के हस्ताक्षर और स्टैंप फर्जी पाई गई।

ऐसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा, अफसर भी हैरान

Forge Driving Licence Found at SDM Office Dharamshala.

फाइल पर एसडीएम के हस्ताक्षर हो चुके थे। बाद में एसडीएम दफ्तर की सुपरिंटेंडेंट ने तथाकथित फर्जीवाड़े को पकड़ा। उन्होंने पाया कि आवेदकों की फाइल में जो हस्ताक्षर हैं, वे उनके हैं ही नहीं। एमवीआई पंकज के हस्ताक्षर और स्टैंप भी फाइल पर फर्जी पाए गए हैं।

तथाकथित फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस की फाइल में आरटीओ और एमवीआई दफ्तर का एक जरूरी विशेष नंबर भी अंकित नहीं है। अमर उजाला ने जब एसडीएम और आरटीओ दफ्तर जाकर मामले की तह तक जाने की कोशिश की तो कोई भी कर्मचारी ज्यादा बोलने को तैयार नहीं हुआ।

सुपरिंटेंडेंट कहने लगीं कि फाइल एसडीएम साहब के पास है। वही मामले को देख रहे हैं। तथाकथित फर्जीवाड़े से न तो सुपरिंटेंडेंट और न ही एमवीआई इनकार कर रहे हैं।

पैसे लेकर लाइसेंस बनाने वाले गिरोह की अटकलें लगाई जा रही हैं। तथाकथित फर्जीवाड़े के पीछे आवेदक से पैसे लेकर लाइसेंस बनाने का बड़ा गिरोह हो सकता है। इसमें पैसे लेकर लाइसेंस बनाने वाले एजेंटों और कर्मचारियों के बीच मिलीभगत भी हो सकती है। हालांकि, सारा मामला जांच के बाद ही सामने आएगा।

मामले की जांच की जा रही है। तथ्यों की सत्यता का पता लगाया जा रहा है। - श्रवण मांटा, एसडीएम, धर्मशाला

एसडीएम से मामले की रिपोर्ट मांगी जाएगी। व्यवस्था को और सुधारने की कोशिश होगी। व्यवस्था की जाएगी कि एक जगह पर कोई भी कर्मचारी लंबे अरसे तक टिका न रहे। - सीपी वर्मा, डीसी कांगड़ा

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