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शर्मनाक! स्कूल में जाति के नाम पर बच्चों से ऐसा भेदभाव

Thu, 18 Sep 2014 09:03 PM IST
Updated Thu, 18 Sep 2014 09:03 PM IST
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controversy over discrimination with sc students in govt school.

इलाके के सरकारी स्कूलों में जातिवाद का ऐसा जहर घुला की इंसानियत भी शर्मिंदा हो जाए। मामला उछलने के बावजूद वीरवार को भी दलित वर्ग के बच्चे अलग बैठकर ही मिड डे मील का खाना खिलाया गया। सामान्य वर्ग के बच्चों के अभिभावक स्कूल पहुंच गए। उन्होंने साफ कहा कि अगर साथ बैठाकर खाना परोसा गया तो उनके बच्चे खाना नहीं खाएंगे। स्कूल प्रबंधन खामोश रहा। सरकार भी इस संवेदनशील मामले में चुप है।

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विवाद के बाद बीते बुधवार को विभागीय टीम ने स्कूल का दौरा कर जांच भी की लेकिन नतीजा सिफर रहा। वीरवार को भी सामान्य वर्ग के बच्चों ने साथ बैठकर खाना नहीं खाया। हालांकि जांच टीम ने अभी अपनी रिपोर्ट विभाग को नहीं सौंपी है। इस विवाद की तह तक जाने के लिए वीरवार को ‘अमर उजाला’ भी स्कूल पहुंचा।
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'स्कूल छोड़िए, बाहर भी यही व्यवस्था'

controversy over discrimination with sc students in govt school.

पौने बारह बजे स्कूल में अलग-अलग कक्षाओं में बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। स्कूल परिसर में बाकायदा धर्म, जाति के नाम पर भेदभाव करना कानूनी जुर्म के स्लोगन की तख्ती भी टंगी थी। सवा बारह बजे के आसपास कुछ अभिभावक स्कूल पहुंचने लगे। ये सामान्य वर्ग से संबंधित थे। मुख्य अध्यापक भुवन कांत ने इन्हें समझाने की कोशिश की कि वे अपने बच्चों को एक साथ बैठकर खाना खाने के लिए प्रेरित करें। लेकिन इन्होंने दलील दी कि स्कूल छोड़िए, बाहर भी यही व्यवस्था है।

अगर साथ बैठाकर खाना परोसा गया तो उनके बच्चे खाना नहीं खाएंगे। एक अभिभावक ने देव संस्कृति की परंपरा का हवाला दिया। कहा, कई लोग देवता के पुजारी और कारदार हैं। इनके बच्चे किसी अन्य वर्ग के साथ भोजन नहीं कर सकते हैं। इसी बीच 12:25 का वक्त हो गया। सभी बच्चे कक्षाओं से बाहर निकले।

फिर भी नहीं माने अभिभावक

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मुख्याध्यापक सभी को एक पंक्ति में बैठकर खाना खाने के लिए कहने लगे। लेकिन सामन्य वर्ग के बच्चों ने खाना खाने से इनकार कर दिया। इनके अभिभावक भी राजी नहीं हुए। बाद में स्कूल के बरामदे में ही सामान्य वर्ग के बच्चों ने थोड़ी दूरी बनाकर खाना खाया। करीब एक बजे माध्यमिक पाठशाला के एसएमसी प्रधान एवं शिकायतकर्ता ज्ञान चंद भी स्कूल पहुंचे। इन्होंने कहा कि दलित वर्ग के बच्चों से भेदभाव हो रहा है। यह गलत है।

स्कूल में इस व्यवस्था को सुधारने के लिए कार्रवाई होनी चाहिए। स्कूल के मुख्याध्यापक भुवन कांत ने कहा कि प्रार्थना सभा व कक्षाओं में बच्चों को जातिवाद से दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया है। उन्होंने कहा कि खाना खाते समय बच्चे अपने आप बैठते हैं। एक साथ बैठने के लिए कहने पर बच्चे खाना खाने से साफ इनकार कर देते हैं। स्कूल में कुल 35 बच्चे हैं, जिसमें नौ बच्चे सामान्य वर्ग से हैं।

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मामले की गंभीरता से करेंगे जांच

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जिला उपायुक्त संदीप कदम ने बताया कि कटौला क्षेत्र के माध्यमिक पाठशाला में दलित बच्चों के साथ भेदभाव करने के मामले की उच्च अधिकारियों से जांच करवाई जाएगी। यह मामला गंभीर है। स्कूल में जाकर भी मामले की जांच की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया गया, उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उपायुक्त ने बताया कि इस मामले में मुख्य सचिव ने भी जानकारी ली है।

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