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फर्जी डिग्री मामले में निजी विश्वविद्यालय पहुंची सीआईडी

Thu, 27 Aug 2020 11:10 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 27 Aug 2020 11:10 AM IST
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CID reached private university in fake degree case
जांच - फोटो : pixabay

फर्जी डिग्री मामले की जांच कर रही सीआईडी की एसआईटी ने बुधवार को कोर्ट से सर्च वारंट लेकर एपीजी विश्वविद्यालय में दस्तक दी। रेड के दौरान जांच टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया। सूत्रों का कहना है कि सीआईडी ने पहले ही विश्वविद्यालय से रिकार्ड ले लिया था। लेकिन इस रिकार्ड के अध्ययन के दौरान जांच एजेंसी को शिकायत में मिली जानकारी से रिकार्ड के मिलान में भिन्नता मिलने पर कोर्ट से सर्च वारंट हासिल कर कार्रवाई की।

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इसके अलावा कुछ ऐसा रिकॉर्ड भी अपने कब्जे में लिया जिसे विश्वविद्यालय ने उपलब्ध नहीं कराया था। इसी वजह से बुधवार को डीएसपी मुकेश कुमार के नेतृत्व में आधा दर्जन पुलिस कर्मियों ने कई घंटे तक परिसर में छानबीन की। कार्रवाई के दौरान बच्चों के प्रवेश से लेकर उनकी डेली हाजिरी, परीक्षा के दौरान की हाजिरी व परीक्षा संबंधी रिकार्ड को अपने कब्जे में लिया है। सीआईडी के साथ फॉरेंसिक की टीम भी मौजूद रही। एसपी सीआईडी वीरेंद्र कालिया ने सर्च वारंट के साथ रेड करने की पुष्टि की है।
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बता दें, विश्वविद्यालय के एक पूर्व प्रोफेसर ने शिकायत कर फर्जी डिग्री बांटे जाने का आरोप लगाया था। शिमला पुलिस को भी इसी प्रोफेसर ने शिकायत भेजी थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। सीआईडी ने पिछले महीने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। इसी दौरान कोविड के चलते जांच में देरी होने पर जांच अधिकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क कर रिकार्ड अपने कब्जे में ले लिया। पड़ताल में करीब 19 सौ से ज्यादा डिग्री बांटे जाने की बात सामने आई है जिसमे से 15 सौ को जांचा जा चुका है। माना जा रहा है कि इसमें जांच एजेंसी को कुछ ऐसे तथ्य मिले है जिसकी वजह से अधिकारियों को खुद संस्थान जाकर पड़ताल की है। 
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जांच में हो जाएगा दूध का दूध पानी का पानी
विश्वविद्यालय के वीसी आरके चौधरी ने कहा कि आज सीआईडी की टीम जांच कर के गई और और विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह से जांच में सहयोग कर रहा है। कहा कि मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने ही शिकायत होने पर जांच की सिफारिश की थी। महीनों से जांच चल रही है और अब तक कुछ भी नहीं मिला है। उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और विश्वविद्यालय बेदाग होकर इससे बाहर आएगा। 

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