अवैध संबंधों के बाद महिलाकर्मी ने ब्लेड से की एजीएम की हत्या, मिली उम्रकैद
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोलन जसवंत सिंह की अदालत ने बहुचर्चित बीएसएनएल के एजीएम सुशील कुमार हत्याकांड की मुख्य आरोपी महिला को कत्ल तथा साक्ष्य छिपाने के आरोपों में दोषी करार दिया है।
कोर्ट ने दोषी आशा देवी पुत्री लेखराज निवासी गांव करोल पीओ बलेरा तहसील अर्की को कत्ल के मामले में आजीवन कारावास और 20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर 6 माह अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
वहीं 201 आईपीसी के तहत साक्ष्य मिटाने का दोषी करार देते हुए 3 साल का साधारण कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर दोषी को 6 माह अतिरिक्त का कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी जिला न्यायवादी एनएल सेन ने की। पूरे मामले में कुल 35 गवाह पेश हुए। दोनों पक्षों की दलीलों और 35 गवाहों की सुनवाई के बाद महिला को कत्ल में दोषी करार दिया है। यह मामला वर्ष 2012 का है। एजीएम की लाश उसी की कार की पिछली सीट पर मिली थी।
ब्लेड से ली थी एजीएम की जान, कार में मिली थी लाश
सोलन के रबौन के पास बीएसएनएल कार्यालय के समीप ही एजीएम की लाश सड़क किनारे उसी की कार में मिली थी। । 30 जून 2012 और 1 जुलाई 2012 की मध्य रात्रि को आशा ने एजीएम को मौत के घाट उतारा था।
ब्लेड के साथ उसके शरीर पर कई वार किए थे। कत्ल करने के बाद कातिल ने उसका फोन बड़ोग के रेलवे ट्रैक के इर्द गिर्द फेंक दिया। साथ ही कत्ल वाले दिन पहने कपड़ों को कराड़ाघाट के जंगलों में जला दिया।
एजीएम के कार्यालय में करती थी काम, फिर बनाए थे संबंध
पुलिस को एजीएम का शव उसी की गाड़ी की पिछली सीट में मिला था। उसके शरीर पर कई वार किए थे। जांच सोलन सदर में शुरू हुई। जांच में सामने आया कि महिला अनुबंध आधार पर उसी के कार्यालय में डाटा आपरेटर की नौकरी करती थी।
इस बीच दोनों में शारीरिक संबंध बन गए। समय बीतने के साथ-साथ दोनों में नजदीकियों के बाद दूरियां बढ़ने लगी। समय बीतने के साथ एजीएम महिला को शारीरिक रूप से प्रताड़ित भी करने लगा। इससे तंग आकर महिला ने एजीएम का उसी की कार में कत्ल कर दिया।