मंत्रियों-विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाने पर लोगों में गुस्सा
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हिमाचल में मंत्रियों, मुख्य सचिवों और विधायकों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी का माकपा ने विरोध किया है। पार्टी ने राज्यपाल को पत्र लिखकर बढ़ोतरी प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देने की मांग की है। पार्टी के राज्य सचिव डा. ओंकार शाद और राज्य सचिवालय सदस्य डा. कुलदीप तंवर ने कहा कि अपने वेतन बढ़ाने में सरकार को कोई परेशानी नहीं हुई है, जबकि मजदूरों को वेतन देने के लिए खजाना खाली होने की बात कही जाती है। उन्होंने निगमों और बोर्डों के अध्यक्षों के खर्चों पर सवाल उठाने वाली भाजपा को भी घेरा। कांग्रेस और भाजपा को माकपा शासित त्रिपुरा सरकार से सबक लेने की सलाह दी है।
कहा कि डेढ़ महीने में अधिकतर समय गतिरोध और बहिर्गमन के ड्रामे के बीच चली विधानसभा में आखिरी दिन सर्वसम्मति रही। एक ऐसे प्रस्ताव पर सभी माननीयों ने मेजें थपथपाईं, जिससे प्रदेश की जनता पर हर साल करोड़ों का बोझ पड़ेगा। एक तरफ प्रदेश में स्कीम वर्कर (आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं, मध्याह्न भोजन बनाने वाले, जलवाहक, आशा वर्कर, वाटर गार्ड) लंबे समय से न्यूनतम वेतन को तरस रहे हैं।
प्रोजेक्टों में प्रशासन और ठेकेदारों की मिलीभगत से श्रम कानूनों का सरेआम हनन हो रहा है। किसानों की जमीन से बेदखली हो रही है। प्राकृतिक आपदाओं के कहर से मुआवजे की मांग करने वालों के लिए आर्थिक तंगी आड़े आ रही है। विधायकों के वेतन और भत्तों में सौ फीसदी वृद्धि की जा रही है। डा. कुलदीप तंवर ने कहा 68 विधायकों के वेतनवृद्धि से राज्य के खजाने से 6 करोड़ 36 लाख 48 हजार का बोझ पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि जो भाजपा पिछले दिनों तक निगम और बोर्डों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों पर करोड़ों रुपये बर्बाद करने के आरोप लगा रही थी, वह अपने वेतन में बेतहाशा वृद्धि पर उफ तक नहीं कर रही। कहा कि जिस दिन हिमाचल में विधायकों का वेतन भत्ता 100 फीसदी बढ़ा, उसी दिन उत्तर पूर्व के वाम शासित राज्य त्रिपुरा के विधायकों का वेतन भी बढ़ा, लेकिन सिर्फ 15 फीसदी। त्रिपुरा में विधायक सभी भत्तों सहित मात्र 40000 रुपये प्रति माह का वेतन ले रहे हैं।
मंत्रियों और विधायकों के वेतन बढ़ाने से पेंशनर संघ भी गुस्सा- माननीय के वेतन भत्ते बढ़ाने का चौतरफा विरोध होने लगा है। पेंशनर कल्याण संघ भी इसके विरोध में उतर आया है। कल्याण संघ ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस से अपने घोषणा पत्र में पेंशन बढ़ोतरी का आश्वासन दिया था, अब सरकार ने इस मामले में अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। प्रदेशाध्यक्ष केएस जसवाल ने कहा कि अब जब माननीय की बारी आई है तो विधानसभा में सत्ता और विपक्ष ने एकजुट होकर वेतन भत्ते बढ़ा दिए।
कहा कि प्रदेश सरकार पेंशनरों की मांग को अनदेखी कर रही है। उन्होंने प्रदेश के पेंशनरों और आम जनता से आग्रह किया है कि वह ऐसे बिल का कड़ा विरोध करें। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और विधायकों के वेतन और भत्ते में बढ़ोतरी किए जाने पर सरकारी खजाने में 16 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
राजनीतिक पार्टी से लोगों का उठेगा विश्वास- समाजसेवी सुभाष वर्मा ने कहा कि जिस तरह से प्रदेश सरकार विधायकों और मंत्रियों के वेतन बढ़ा रही है। ऐसे में जनता का राजनीतिक दलों से विश्वास उठ जाएगा। प्रदेश भर में 1.50 लाख से अधिक पेंशनर हैं। इन्होंने प्रदेश की उन्नति के लिए दिन रात मेहनत कर 40 साल सेवाएं दीं। ये पेंशनर 5 फीसदी मूल पेंशन में वृद्धि के इंतजार में हैं।
यही नहीं, विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारी 4-9-14 के लाभ के इंतजार में हैं, लेकिन सरकार को इनकी चिंता नहीं है। सरकार हमेशा धन का रोना रोती रही है, लेकिन माननीय के वेतन और भत्ते बढ़ाने पर सरकार के पास धन की कमी आड़े नहीं आई। विधायकों के पोता और पोतियों को भी मुफ्त यात्रा करने का प्रावधान किया है, जबकि एक विधायक का दायरा उसके विधानसभा क्षेत्र तक ही होता है।