एचएएस रिजल्ट पर हाईकोर्ट ने उठाए ये सवाल
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य लोक सेवा आयोग के एचएएस की छंटनी परीक्षा के नतीजे वर्गवार घोषित किए जाने को गलत करार दिया है। हाईकोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन बताया है।
मगर हाईकोर्ट ने कुछ उम्मीदवारों की उन याचिकाओं को भी रद कर दिया, जिनमें उन्होंने पुनर्मूल्यांकन की गुहार लगाई थी। प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण रहे आरक्षित वर्ग के एक उम्मीदवार ने याचिका दायर कर गुहार लगाई थी कि उसे सामान्य श्रेणी में उत्तीर्ण घोषित किया जाए क्योंकि उसके अंक सामान्य श्रेणी की सूची में पास हुए अंतिम उम्मीदवार से ज्यादा हैं।
इसके अतिरिक्त कुछ उम्मीदवारों ने प्रारंभिक परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराने का आग्रह किया था।
हाईकोर्ट ने जारी किए ये आदेश
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा केवल छंटनी परीक्षा है। इस परीक्षा में प्राप्त किए अंक प्रार्थी की मेरिट को प्रभावित नहीं करते। आयोग ने यह भी जानकारी दी कि छंटनी परीक्षा का परिणाम आरक्षित पदों के हिसाब से वर्गवार घोषित किया जाता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि छंटनी परीक्षा का परिणाम आरक्षित पदों के हिसाब से वर्गवार घोषित करना सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के विपरीत है। मगर हाईकोर्ट ने आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार की याचिका भी रद कर दी।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने अन्य याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि आयोग ने प्रारंभिक परीक्षा में पूछे प्रश्नों और उत्तर पुस्तिकाओं में पाई त्रुटियों को ठीक करने के लिए खुद एक्सपर्ट्स की राय ले ली थी। उसके बाद उत्तर पुस्तिकाओं की त्रुटियां ठीक कर परिणाम तैयार किया था। इसलिए हाईकोर्ट पुनर्मूल्यांकन का आदेश नहीं दे सकती।