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कंडक्टर भर्ती घपले में पूर्व एमडी समेत 5 पर केस, 378 की नौकरी पर संकट

Sat, 04 Feb 2017 04:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 04 Feb 2017 04:39 PM IST
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Court order to Shimla police, files cases in HRTC conductor recruitment scam

साल 2003-04 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हिमाचल पथ परिवहन निगम में हुई 378 ट्रांसपोर्ट मल्टीपर्पज असिस्टेंट (कंडक्टर) की भर्ती में तत्कालीन एमडी समेत पांच अधिकारियों पर मुकदमा चलेगा। जिला एवं सत्र न्यायालय की सह न्यायिक दंडाधिकारी नेहा शर्मा की कोर्ट ने शिमला पुलिस को मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। 

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उस समय भर्ती हुए कंडक्टरों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। अब वे नियमित भी हो चुके हैं। कंडक्टर भर्ती के चार साल बाद कथित गड़बड़ी की शिकायत तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में 2007 में हुई। भाजपा सरकार ने शाहपुर निवासी अजय कुमार की शिकायत पर विजिलेंस जांच कराई जिसमें कई अनियमितताएं सामने आईं। 

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विजिलेंस जांच में ये हुए थे खुलासे

Court order to Shimla police, files cases in HRTC conductor recruitment scam

हालांकि, जांच पूरी होने के बावजूद सरकार ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश नहीं दिए। 2012 में कांग्रेस फिर सत्ता में आई और उसने भी विजिलेंस जांच को दरकिनार कर दिया। इस बीच शिकायतकर्ता बिलासपुर निवासी जय कुमार ठाकुर ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

जय कुमार के अधिवक्ता सुरेश ठाकुर ने बताया कि शिमला की जेएमआईसी (4) ने प्रार्थी के आरोपों को सही मानते हुए शिमला पुलिस को मामला दर्ज करने के निर्देश जारी किए हैं। विजिलेंस जांच में पता चला कि भर्ती के लिए निगम ने विज्ञापन तो 300 पदों के लिए किया लेकिन चयन 378 का कर लिया।

अकेले धर्मशाला डिवीजन से ही 147 कंडक्टर चयनित किए गए। इनमें भी तत्कालीन परिवहन मंत्री के विधानसभा क्षेत्र नगरोटा बगवां से 73 और रोहड़ू से 35 लोग चयन सूची में थे। भर्ती में डिवीजन स्तर पर कोई भी मेरिट नहीं बनी। भर्ती के दस्तावेजों में जमकर कटिंग और ओवर राइटिंग की गई थी।

राज्यपाल के आदेश भी हुए अनसुने

Court order to Shimla police, files cases in HRTC conductor recruitment scam

भर्ती में गड़बड़ी को लेकर साल भर पहले सरकाघाट निवासी कुलदीप सिंह ठाकुर ने राजभवन को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी। राजभवन ने गृह विभाग को पत्र लिखकर मामले की जांच के निर्देश दिए। गृह विभाग ने राजभवन के निर्देशों को भी अनदेखा कर दिया। अब बिलासपुर निवासी जय कुमार की शिकायत पर कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। 

इनके खिलाफ हुए मुकदमा दर्ज करने के आदेश
कोर्ट के आदेश में एचआरटीसी के तत्कालीन एमडी दलजीत सिंह डोगरा, तत्कालीन डीएम धर्मशाला व वर्तमान में जीएम आईएसबीटी कश्मीरी गेट एचके गुप्ता, तत्कालीन डीएम हमीरपुर एसपी चटर्जी, डीएम शिमला एमडी शर्मा और तत्कालीन डिवीजनल मैनेजर (एडमिनिस्ट्रेशन) आरसी नेगी को एफआईआर में नामजद करने को कहा गया है।

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378 परिचालकों की नौकरी पर संकट

Court order to Shimla police, files cases in HRTC conductor recruitment scam

परिवहन निगम के 378 परिचालकों की नौकरी पर संकट गहरा गया है। सेंशन कोर्ट की ओर से शुक्रवार को जारी निर्देशों के बाद परिवहन निगम में हड़कंप मचा गया है। कोर्ट ने शिमला पुलिस को मामले में संलिप्त अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को कहा है। परिवहन निगम को भी इसकी मौखिक सूचना मिल चुकी है। 

परिवहन निगम पहले ही परिचालकों की कमी से जूझ रहा है। अब अगर 378 परिचालकों को बाहर का रास्ता दिखाया जाता है तो परिवहन निगम की और मुश्किलें बढ़ेगी। वर्तमान परिवहन निगम में 2000 परिचालक है जबकि बसों की संख्या 3200 है। इन दो हजार परिचालकों में 1600 के करीब नियमित परिचालक जबकि अन्य अनुबंध पर तैनात है।

शिकायत कर्ता बोला, इस्तीफा दे बाली

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परिवहन मंत्री जीएस बाली - फोटो : फाइल फोटो

परिवहन निगम की बसें प्रशिक्षु परिचालकों के सहयोग से चल रही है। परिवहन निगम 3 महीने के लिए इन प्रशिक्षु परिचालकों की सेवाएं ले रहा है। घंटे के हिसाब से इन्हें पैसे दिए जा रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करे तो व्यवस्था सुचारू रुप से चलाने के लिए निगम को एक हजार परिचालक चाहिए।

शिकायत कर्ता जय कुमार ने परिवहन मंत्री जीएस बाली से इस मामले में इस्तीफा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

परिवहन निगम के ईडी मस्त राम भारद्वाज ने बताया कि निगम के 378 परिचालकों की भर्ती मामले के फैसले की मौखिक सूचना मिली है। लिखित आदेश आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

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