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Shimla News: एफडी मैच्योर होने के बाद भी नहीं लौटाई रकम, कोऑपरेटिव सोसायटी को 40 हजार हर्जाना
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वर्ष 2017 में करवाई थी 3.50 लाख रुपये की एफडी
रुचि सांख्यान
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने एफडी की मैच्योरिटी राशि का भुगतान न करने पर द शूलिनी कोऑपरेटिव एनएटीसी सोसायटी को कड़ी फटकार लगाई है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य जगदेव सिंह रेटका की खंड पीठ ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सोसायटी को दोनों एफडी की मैच्योरिटी राशि 9 फीसदी सालाना ब्याज सहित लौटाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा उपभोक्ता को हुए मानसिक उत्पीड़न के बदले 25,000 रुपये मुआवजा और 15,000 रुपये मुकदमा खर्च के रूप में अदा करने का भी आदेश दिया गया है।
अपर शांकली निवासी हेमलता पत्नी स्वर्गीय प्रकाश ठाकुर ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई थी। उन्होंने बताया कि सोलन स्थित द शूलिनी कोऑपरेटिव एनएटीसी सोसायटी के बार-बार आग्रह पर उन्होंने 7 अक्तूबर 2017 को दो लाख रुपये की एफडी 9.6 फीसदी वार्षिक ब्याज दर पर एक वर्ष के लिए करवाई थी। नियमों के अनुसार 7 अकतूबर 2018 को इसकी मैच्योरिटी राशि 2,18,617 रुपये मिलनी थी। इसके बाद 12 अक्तूबर 2017 को उन्होंने 1.50 लाख रुपये की दूसरी एफडी 2 साल के लिए करवाई, जिसकी परिपक्वता राशि 12 अक्तूबर 2019 को 1,82,760 रुपये देय थी।
रकम देने के बजाय करते रहे टालमटोल
शिकायतकर्ता के अनुसार जब पहली एफडी की अवधि 2018 में पूरी हुई तो सोसायटी ने पैसे लौटाने के बजाय यह कहकर टाल दिया कि इसे नियमों के तहत एक साल के लिए खुद ही रिन्यू कर दिया गया है। प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि 2019 में दोनों एफडी की रकम एक साथ दे दी जाएगी। अक्तूबर 2019 में जब दोनों एफडी मैच्योर हो गईं तो महिला ने अपनी जमा पूंजी की मांग की। बावजूद इसके सोसायटी केवल झूठे आश्वासन देती रही और रकम का भुगतान नहीं किया। कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी जब राहत नहीं मिली तो पीड़ित महिला ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
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एकतरफा कार्रवाई में दोषी करार
आयोग की ओर से नोटिस तामील होने के बावजूद सोसायटी का कोई भी प्रतिनिधि अदालत में पेश नहीं हुआ जिसके चलते आयोग ने मामले में एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्रवाई की। आयोग ने अपने फैसले में कहा कि उपभोक्ता की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और हलफनामे का सोसायटी की ओर से कोई खंडन नहीं किया गया है। आयोग ने इसे सेवाओं में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार करार देते हुए आदेश दिया कि सोसायटी शिकायत दर्ज करने की तिथि से लेकर वास्तविक भुगतान तक 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित दोनों एफडी की राशि का भुगतान करे।
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शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने एफडी की मैच्योरिटी राशि का भुगतान न करने पर द शूलिनी कोऑपरेटिव एनएटीसी सोसायटी को कड़ी फटकार लगाई है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य जगदेव सिंह रेटका की खंड पीठ ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सोसायटी को दोनों एफडी की मैच्योरिटी राशि 9 फीसदी सालाना ब्याज सहित लौटाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा उपभोक्ता को हुए मानसिक उत्पीड़न के बदले 25,000 रुपये मुआवजा और 15,000 रुपये मुकदमा खर्च के रूप में अदा करने का भी आदेश दिया गया है।
अपर शांकली निवासी हेमलता पत्नी स्वर्गीय प्रकाश ठाकुर ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई थी। उन्होंने बताया कि सोलन स्थित द शूलिनी कोऑपरेटिव एनएटीसी सोसायटी के बार-बार आग्रह पर उन्होंने 7 अक्तूबर 2017 को दो लाख रुपये की एफडी 9.6 फीसदी वार्षिक ब्याज दर पर एक वर्ष के लिए करवाई थी। नियमों के अनुसार 7 अकतूबर 2018 को इसकी मैच्योरिटी राशि 2,18,617 रुपये मिलनी थी। इसके बाद 12 अक्तूबर 2017 को उन्होंने 1.50 लाख रुपये की दूसरी एफडी 2 साल के लिए करवाई, जिसकी परिपक्वता राशि 12 अक्तूबर 2019 को 1,82,760 रुपये देय थी।
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रकम देने के बजाय करते रहे टालमटोल
शिकायतकर्ता के अनुसार जब पहली एफडी की अवधि 2018 में पूरी हुई तो सोसायटी ने पैसे लौटाने के बजाय यह कहकर टाल दिया कि इसे नियमों के तहत एक साल के लिए खुद ही रिन्यू कर दिया गया है। प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि 2019 में दोनों एफडी की रकम एक साथ दे दी जाएगी। अक्तूबर 2019 में जब दोनों एफडी मैच्योर हो गईं तो महिला ने अपनी जमा पूंजी की मांग की। बावजूद इसके सोसायटी केवल झूठे आश्वासन देती रही और रकम का भुगतान नहीं किया। कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी जब राहत नहीं मिली तो पीड़ित महिला ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
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एकतरफा कार्रवाई में दोषी करार
आयोग की ओर से नोटिस तामील होने के बावजूद सोसायटी का कोई भी प्रतिनिधि अदालत में पेश नहीं हुआ जिसके चलते आयोग ने मामले में एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्रवाई की। आयोग ने अपने फैसले में कहा कि उपभोक्ता की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और हलफनामे का सोसायटी की ओर से कोई खंडन नहीं किया गया है। आयोग ने इसे सेवाओं में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार करार देते हुए आदेश दिया कि सोसायटी शिकायत दर्ज करने की तिथि से लेकर वास्तविक भुगतान तक 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित दोनों एफडी की राशि का भुगतान करे।