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पेंशनरों की मुसीबतें होंगी हल, संवरेगा नौणी विवि
ब्यूरो/अमर उजाला, नौणी (सोलन)
Updated Tue, 02 Dec 2014 02:05 PM IST
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कई स्नातकोत्तर होनहारों को सात साल के बाद दीक्षांत समारोह में डिग्री मिली है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे विवि में लंबे अंतराल के बाद हुए इस समारोह को लेकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह दिखा। वहीं मुख्यमंत्री के नौ करोड़ की वित्तीय मदद के बाद आर्थिक स्थिति सुधरने की कुछ उम्मीद जगी। विवि को भव्य गेट के साथ सौंदर्यीकरण के तोहफे के रूप में बजट मिला है।
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वहीं लंबे अरसे से बंद पेंशन को बहाल करने की मांग करने वालों को आस। अपने संबोधन में वक्ताओं ने विश्वविद्यालय को फलों, सब्जियों, फूलों के अलावा औषधीय तथा सजावटी पौधों की नई किस्मों को विकसित व उत्पादन के लिए और अधिक प्रयास करने की अपील की।
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री और हिमाचल निर्माता स्व. डा. वाईएस परमार के नाम पर बना यह विश्वविद्यालय उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है। उन्होंने एक ऐसे अनुसंधान केंद्र की परिकल्पना की थी, जो कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ किसानों और बागवानों के लिए मददगार हो।
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70 फीसदी गोल्ड मेडलिस्ट लड़कियां
राज्यपाल उर्मिला सिंह ने कहा कि लड़कियां शिक्षा के क्षेत्र में लड़कों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं और यहां यह प्रसन्नता का विषय है कि 60 प्रतिशत से अधिक लड़कियों को स्वर्ण पदक और 70 प्रतिशत के लगभग को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह भावी समाज की मजबूत नींव का आधार है।
काटा चालान
नौणी विवि में चल रही टकशॉप को फूड इंस्पेक्टर ने चालान काटा है। कुछ शिकायतें मिली थीं कि विवि परिसर में लगाई गई दुकान में बासी खाना मिल रहा है। इस आधार पर कार्रवाई करते हुए फूड इंस्पेक्टर ने चालान की पर्ची थमाई है। फूड इंस्पेक्टर सतीश ठाकुर ने चालान की पुष्टि की है।
छात्राएं कर रही गौरवान्वित : राज्यपाल
राज्यपाल एवं कुलाधिपति उर्मिला सिंह ने कहा कि दीक्षांत समारोह छात्र जीवन का वह पड़ाव है, जब स्टूडेंट्स अपनी पढ़ाई पूरी करके जीवन की सीढ़ी चढ़ना शुरू करते हैं। उन्होंने कहा कि डिग्रियां लेने वालों में युवतियों की संख्या युवकों से कहीं अधिक है। एक महिला होते हुए गौरवान्वित महसूस कर रही हूं।
विवि के कुलपति डा. विजय सिंह ठाकुर ने विवि में भविष्य के लिए चिंता जाहिर करते हुए कहा कि विवि प्राध्यापकों से जूझ रही है। लगातार इनकी सेवानिवृत्तियां हो रही हैं। नई भर्तियां नहीं हो पा रही हैं। इस कारण शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में रिक्तता की स्थिति पैदा हुई है।
इससे विवि की शिक्षण, अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों पर विपरीत असर पड़ रहा है। लिहाजा उन्होंने 60 से 62 वर्ष सेवा आयु करने की मांग की है। जिससे उच्चस्तरीय शिक्षा व अनुसंधान निरंतरता बनी रहे और आने वाले भावी वैज्ञानिकों को भी इस दायित्व के लिए तैयार किया जा सके।