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Himachal: अब मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में मुर्गा परोसने पर गरमाई सियासत, भाजपा ने उठाए सवाल

Sat, 14 Dec 2024 09:39 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 14 Dec 2024 09:39 PM IST
सार

प्रदेश में अब समोसे के बाद मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में मुर्गा परोसने पर सियासत गरमा गई है।

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Controversy over serving wild chicken for dinner to CM and other guests in Kupvi, BJP raises questions
सीएम सुक्खू ने कुपवी के टिक्कर में किया रात्रि ठहराव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में अब समोसे के बाद मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में मुर्गा परोसने पर सियासत गरमा गई है। कुपवी में ग्रामीणों ने मुर्गा क्या परोसा भाजपा ने इसे मुद्दा बना दिया। अब ये मुर्गा जंगली है या देसी यह जांच का विषय है। भाजपा का आरोप है कि कुपवी के टिक्कर में हुए कार्यक्रम में परोसा मुर्गा जंगली है और इसका शिकार कानून प्रतिबंधित है। भाजपा ने इसके लिए लिए सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और कथित मेन्यू का भी हवाला दिया है। हालांकि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह तेल युक्त व्यंजनों और नॉन वेज दोनों से ही स्वास्थ्य कारणों से परहेज करते हैं। टिक्कर में जंगली नहीं, देसी मुर्गा परोसा था, जो इस क्षेत्र की आदिवासी संस्कृति का हिस्सा है। जयराम ठाकुर को कोई मुद्दा नहीं मिल रहा है।

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शुक्रवार रात को कुपवी के टिक्कर गांव में मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और अन्य अतिथियों के लिए रात्रिभोज रखा गया। इस रात्रि भोज के दौरान सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू और अन्य लोगों के बीच बातचीत का एक कथित वीडियो और मेन्यू सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसी को आधार बनाकर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सहित कई अन्य नेताओं ने उनके खिलाफ हमलावर रुख अपनाया है। इस पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा के नेताओं ने इससे इससे गांववासियों को बदनाम करने का रास्ता चुना गया है। विपक्ष के नेताओं के पास अब कोई मुद्दा नहीं है।
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सुक्खू ने कहा कि गांव वाले अपने लोकल हैं। हम खाते नहीं, फिर भी मुझे दे रहे थे। पहाड़ के जीवन में नॉन वेज भोजन है। इससे ग्रामीणों की छवि खराब हो रही है। इंदौरा में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि जो हुआ ही नहीं, उसके बारे में वह क्या कहें? यह जंगली मुर्गा नहीं था, यह उनकी आदिवासी संस्कृति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वह मांसाहारी भोजन नहीं खाते। यह दुकान से खरीदा हुआ मुर्गा नहीं था, बल्कि उनके गांव का देसी मुर्गा था। वे वहां खाने नहीं गए थे, बल्कि लोगों की समस्याएं सुनने गए थे। भाजपा के पास कोई वास्तविक मुद्दा नहीं है, इसलिए वे इस तरह के विचित्र मुद्दे उठा रहे हैं।
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नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सीएम के टिक्कर में रात्रिभोज कार्यक्रम का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, 'जनता के घरद्वार जाकर लोगों की समस्याओं के निराकरण करने की हमारी योजना जनमंच के फुलके जिन्हे खल रहे थे, वह आज गांव-गांव जाकर पिकनिक मना रहे हैं और क्या-क्या कर रहे हैं जनता सब देख रही है।  संरक्षित प्रजाति का जंगली मुर्गा खाने वालों को जेल होती है, जुर्माना होता है लेकिन मुख्यमंत्री मुर्गा खिलाने का पहले मेन्यू छपवाते हैं और फिर अपने मंत्रियों को अपने सामने चटखारे ले लेकर खिलाते हैं। क्या यही व्यवस्था परिवर्तन है।

12 घंटे में ही मुख्यमंत्री ने बदल दिया मुर्गा : जयराम
पूर्व मुख्यमंत्री नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री किस दर्जे का झूठ बोलते हैं। उन्होंने कहा कि यह आज प्रदेश के लोगों ने फिर देख लिया। रात में जिसे जंगली मुर्गा बोलकर मुख्यमंत्री अपने सहयोगी और मंत्रियों को चटखारे ले लेकर खिला रहे थे, सुबह वही जंगली मुर्गा देसी मुर्गा बन गया। मुख्यमंत्री जो प्रदेश की संवैधानिक पर पर बैठता है और प्रदेश का संरक्षक होता है, उसकी ओर से इस तरह का बर्ताव करना और भी शर्मनाक है। कुपवी में शुक्रवार की रात में जो हुआ, उसे लाइव टेलीकास्ट के माध्यम से पूरी दुनिया ने देखा। ठाकुर ने कहा कि खाना देने के दौरान मुख्यमंत्री को बताया जा रहा है कि जंगली मुर्गा है तो वह कहते हैं कि जंगली मुर्गा कहीं बनाया जाता है। उसके बाद वह पूछ–पूछकर अपने मंत्रियों और सहयोगियों को सर्व करने के लिए कहते हैं। अगले दिन जब यह मुद्दा बनता है और लोगों को पता चलता है की सरकारी संरक्षण में संरक्षित जंगली मुर्गा सीएम के कार्यक्रम में परोसा गया है तो मुख्यमंत्री गैर जिम्मेदाराना बातें करते हैं और सही जवाब देने की बजाय झूठ बोलते हैं। उन्हें समझना चाहिए की प्रदेश के लोग बहुत समझदार हैं और उन्हें इस तरह के झूठ बोलकर बार-बार बरगलाया नहीं जा सकता है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि कुपवी में जो कुछ हुआ, वह सरकार के संरक्षण में हुआ। भोजन के पहले ही मीडिया कर्मियों को मुख्यमंत्री और उनके लोगों को परोसे जाने वाले भोजन के बारे में पूरी जानकारी दी गई थी। सीएम के एक दिन पहले ही चौपाल ले जाएंगे। मीडिया कर्मियों को वह मेनू व्हाट्सएप और प्रिंट कागज के माध्यम से दिया गया था। लोगों की मानें तो पत्रकारों की ओर से भी जंगली मुर्गे को मेन्यू में शामिल करने पर सवाल उठाए गए थे लेकिन सत्ता का नशा जब दिमाग पर चढ़ता है तो लोगों को बातें समझ नहीं आती हैं। इसके बाद भी जंगली मुर्गा परोसा गया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जंगली मुर्गे की सभी प्रजातियां वाइल्ड लाइफ प्रोटक्शन एक्ट 1972 और वाइल्ड लाइफ प्रोटक्शन अमेंडमेंट एक्ट 2022 के तहत ’शेड्यूल्ड वन’ में रखी गई हैं। ’शेड्यूल वन’ में वही प्रजातियां रखी जाती हैं जो हाईली एंडेंजर्ड होती हैं और जिनका शिकार अथवा अन्य किसी प्रकार से वध अपराधिक कृत्य माना जाता है और उसमें सजा का प्रावधान है।


चेतन बरागटा और कर्ण नंदा ने भी साधा निशाना
 भाजपा प्रदेश प्रवक्ता और सोशल मीडिया विभाग प्रभारी चेतन बरागटा ने जंगली मुर्गा प्रकरण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री का जो दौरा है, वह चौपाल विधानसभा क्षेत्र में हुआ। वहां पर टिक्कर में उनको रात्रि भोज में जंगली मुर्गा परोसा गया और वह जंगली मुर्गा सरकार की ओर से प्रकाशित किए गए मेन्यू पर भी शामिल किया गया। यह साफ तौर पर गैर कानूनी है। चेतन ने कहा की जंगली मुर्गा एक संरक्षित श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, उसमें भी साफ दिख रहा है कि मुख्यमंत्री गवर्नमेंट ऑफिशियल और सीएम के साथ मंत्री हैं, उनको भी वे प्रेरित कर रहे हैं कि वे जंगली मुर्गे को खाएं। यह नैतिकता का भी उल्लंघन है। हिमाचल प्रदेश देवभूमि है यहां जंगली जानवरों के साथ पशु पक्षियों को भी आदर समान दिया जाता है और इस प्रकरण से साफ झलकता है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार हिमाचल प्रदेश में वह कितनी गंभीर है। चेतन ने कहा कि मुख्यमंत्री मीडिया के सामने आएं और जो यह पूरा प्रकरण हुआ है, उस पर देवभूमि हिमाचल की जनता से माफी मांगें और जो लोग इसमें शामिल हैं, उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
भाजपा के मीडिया प्रभारी  कर्ण नंदा ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972, जो 2022 में संशोधित हुआ था और इसके अंतर्गत जंगली मुर्गा शेड्यूल कैटेगरी बर्ड है। जब प्रदेश के मुख्यमंत्री ही स्वयं जंगली मुर्गे को मारने की बातें करते हैं, उनको खाने की बातें करते हैं तो वह क्या प्रदेश में शिकार को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।  जंगली मुर्गा हिमाचल प्रदेश में 3000 फुट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाया जाता है। यह प्रजाति कानूनी ताैर पर संरक्षित है और इसके शिकार करने पर दंडनीय अपराध है।  

मामले पर मुख्यमंत्री ने ये कहा
 मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा जंगली मुर्गे की बात कर रही है। मैं मुर्गा नहीं खाता हूं। उन्होंने कहा कि भाजपा मेरी छींक की भी खबर रख रही है। कभी टॉयलेट टैक्स तो कभी समोसा को लेकर बवाल कर रही है। इससे पहले शनिवार सुबह मुख्यमंत्री ने कुपवी में नाश्ते में पहाड़ी व्यंजनों कापरू, मक्की की रोटी, सरसों का साग खाया। लौटते हुए आंगन में पहाड़ी नाटी डाली। उसके बाद गांव में एकत्रित हुए बच्चों से मिले और उनसे पूछा कि आप क्या बनेगे। एक बच्चे ने कहा कि मैं आईपीएस बनूंगा, बच्ची ने कहा कि कैप्टन बनूंगी। मुख्यमंत्री ने भाजपा बेबुनियाद मुद्दे उठाकर जनता को गुमराह कर रही है। भाजपा कभी टॉयलेट टैक्स लगाने की बात करती जबकि इस नाम का कोई टैक्स नहीं है। 


मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा,' स्वास्थ्य कारणों से मैं तेल युक्त व्यंजन और नॉनवेज दोनों से परहेज करता हूं। लेकिन जयराम को कोई मुद्दा नहीं मिला तो उन्होंने हमारे ग्रामवासियों को बदनाम करने का रास्ता चुन लिया। विपक्ष के नेताओं के पास अब कोई मुद्दा नहीं है, बस ग्रामवासियों की छवि खराब करने का काम करते हैं। नॉनवेज खाना पहाड़ों में जीवन का हिस्सा है। जयराम ठाकुर इस पर बयान दे रहे हैं।'

मांसाहार पहाड़ों में मेहमान नवाजी की परंपरा : किमटा
मुख्यमंत्री के कुपवी प्रवास के दौरान रात्रि भोज में मुर्गा परोसने के विवाद पर कांग्रेस ने कहा कि भाजपा मामले को तूल दे रही है। इससे कुपवी उपमंडल के लोगों का अपमान हुआ है। मुख्यमंत्री शाकाहारी हैं। मांसाहार पहाड़ों में मेहमान नवाजी की एक परंपरा है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव रजनीश किमटा ने कहा कि गांव में पाले जाने वाले पहाड़ी मुर्गे को जंगली मुर्गा कह कर प्रचारित कर भाजपा ने कुपवी उपमंडल का अपमान किया है। मुख्यमंत्री के कुपवी उपमंडल के सफल दौरे से भाजपा बौखला गई है।

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