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फतेहपुर में कांग्रेस का चौका, कांगड़ा में पार्टी को मिली संजीवनी, ऐसे मिली गढ़ बचाने में कामयाबी

Wed, 03 Nov 2021 05:00 AM IST
Krishan Singh सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला
सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 03 Nov 2021 05:00 AM IST
सार

 फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में 2009 से लगातार जीत के लिए संघर्ष कर रही भाजपा का लगातार चौथी बार चेहरा बदलने का फार्मूला भी फेल हो गया। 11 साल से फतेहपुर में भाजपा हार की बंजर जमीन पर जीत के बीज नहीं बो पाई।

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Congress's chouka in Fatehpur byelection, party got Sanjeevani in Kangra, got success in saving such stronghold
कांग्रेस प्रत्याशी भवानी सिंह पठानिया। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 2022 के फाइनल से एक साल पहले सत्ता की दहलीज दिलाने वाले कांगड़ा जिले में उपचुनाव में भाजपा को करारा झटका लगा है। फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में 2009 से लगातार जीत के लिए संघर्ष कर रही भाजपा का लगातार चौथी बार चेहरा बदलने का फार्मूला भी फेल हो गया। 11 साल से फतेहपुर में भाजपा हार की बंजर जमीन पर जीत के बीज नहीं बो पाई। चुनाव में न तो मुख्यमंत्री का जलवा चला न ही राष्ट्रीय नेता अनुराग ठाकुर की रैलियां काम आईं।  हिमाचल प्रभारी अनिवाश राय खन्ना के तूफानी दौरे भी काम न कर सके। संगठन महामंत्री पवन राणा, मंत्री राकेश पठानिया, सतपाल सत्ती, त्रिलोक कपूर सहित भाजपा के मुख्य कुनबे की सांगठनिक योजना धराशायी हो गई।   लगातार तीसरी बार हार के साथ ही भाजपा प्रत्याशी बलदेव ठाकुर का राजनीतिक भविष्य भी सवालों में घिर गया।

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 भाजपा के लिए कृपाल परमार का कोपभवन में बैठना और कभी भाजपा के तेजतर्रार नेता रहे निर्दलीय उम्मीदवार राजन सुशांत का 13000 वोट लेना भगवा रंग के लिए बड़ा नुकसान साबित हुआ। धूमल गुट का कम सक्रियता ने भी हार में चाशनी का काम किया। इसके अलावा महंगाई, बिजली-पानी और धान खरीद केंद्र का मुद्दे भाजपा की चुनावी मैनेजमेंट पर भारी पड़ गए। उधर, फतेहपुर में कांग्रेस लगातार जीत का चौका लगा दिया। फतेहपुर में कांग्रेस 2009 से लगातार चुनाव जीत रही है। उपचुनाव में मतदाताओं ने परिवारवाद को अनदेखा कर युवा चेहरे को तवज्जो दी। 2009, 2017 और इस उपचुनाव में तीसरी बार फतेहपुर के मतदाताओं ने सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ जाकर विपक्ष को सत्ता पर बिठाया। 5789 वोट की लीड के साथ भवानी सिंह पठानिया पहली बार विधायक बने हैं। भवानी सिंह के विधायक बनने से कांगड़ा जिला में कांग्रेस एमएलए की संख्या तीन बरकरार रह गई है। फतेहपुर की जीत ने पूरे कांगड़ा जिला के नेताओं और कार्यकर्ताओं की संजीवनी भर दी जबकि भाजपा के मंत्रियों और विधायकों को चिंता में डाल दिया है।

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