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बंद कमरे में सीमेंट कारखाने का समझौता नहीं कर सकते : मुकेश
Wed, 14 Aug 2019 05:58 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 14 Aug 2019 05:58 PM IST
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फाइल फोटो
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नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सीमेंट कारखाने बंद कमरे में समझौता ज्ञापनों के माध्यम से नहीं किए जा सकते। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निविदाएं मंगवानी पड़ेंगी। केंद्र सरकार कानून में संशोधन कर चुकी है। इसमें खासतौर पर सीमेंट कारखानों के आवंटन के राज्य सरकारों के विशेषाधिकार समाप्त हैं। निवेश के नाम पर प्रदेश में बिल्डरों और प्रॉपर्टी डीलरों को न्योता देने के प्रयासों से राज्य को भारी नुकसान होगा।
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मुकेश ने जारी बयान में कहा कि राज्य सरकारें चोर दरवाजे से सीमेंट कारखाने नहीं दे सकतीं। टेंडर आमंत्रित करना अनिवार्य है। अखबारों में छपा है कि डालमिया ग्रुप के साथ चंडीगढ़ में 2500 करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। चंबा के सीमेंट कारखाने के लिए भी ग्लोबल टेंडर हुए हैं। किसी कंपनी ने रुचि नहीं दिखाई। यह कारखाना पहले जेपी के पास था, काम न करने के कारण रद्द हुआ।
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नए कानून को देखते हुए उसे विज्ञापित किया गया। इसी तरह डालमिया से भी एक सीमेंट कारखाने का करार किया था। इसके बावजूद काम नहीं किया। सीमेंट कारखाने के लिए निविदाएं मांगनी चाहिए।
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कहा कि निवेश के प्रस्तावों को भारी-भरकम दिखाने के मंसूबों के चलते पुराने निवेश को भी नया दिखाने का प्रयास हो रहा है। लैंड बैंक को लेकर सरकार बयान दे रही है। इसमें पंडोगा और कंदरोड़ी के इंडस्ट्रियल क्षेत्र पूर्व शासन में विकसित हुए हैं। मौजूदा सरकार को भी इस दिशा में कदम उठाने चाहिए।