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नहीं मिला मुआवजा, अब रेलवे स्टेशन होगा किसानों के हवाले

Sat, 18 Apr 2015 12:54 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, ऊना
ब्यूरो/ अमर उजाला, ऊना Updated Sat, 18 Apr 2015 12:54 PM IST
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Compensation came several contenders una, railway property detail submmit in court.

उत्तर रेलवे की ओर से किसानों की भूमि अधिग्रहण कर मुआवजा लटकाने के मामले में रेलवे स्टेशन चुरडू की संपत्ति का ब्योरा एडीजे की अदालत में दाखिल कर दिया गया है।

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कोर्ट के तीन दिन में रेलवे स्टेशन की अचल संपत्ति का ब्योरा मांगने पर किसानों की ओर से अधिवक्ता अरुण कुमार सैणी ने शुक्रवार को इसे दाखिल किया।

अब कोर्ट के आदेशों के मुताबिक रेलवे ने समयानुसार अदायगी की तो दो मई को रेलवे स्टेशन जब्त करने की इजाजत मांगी जाएगी। अधिवक्ता के मुताबिक जन शताब्दी रोकने से आम लोगों को होने वाली परेशानी की आशंका के चलते अदालत से अन्य अचल संपत्तियों को अटैच करने की दरख्वास्त लगाई थी।
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ऊना से अंब रेललाइन के बीच स्थापित चुरडू (चुरारु) रेलवे स्टेशन की संपत्ति का ब्योरा कोर्ट में दाखिल किया है। अदालत ने रेलवे को दो मई तक समय दिया है। गत दिवस अदालत ने ऊना आने वाली जन शताब्दी ट्रेन को रोकने के आदेश दिए थे।
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अदालत के कर्मी रेलवे स्टेशन पहुंचे। रेलवे की ओर से मुआवजे का ड्राफ्ट दिखाने पर दोनों पक्षों में आपसी सहमति से मामला ठंडा पड़ गया। ड्राफ्ट हाईकोर्ट के माध्यम से जमा करवाने पर किसानों ने आपत्ति जताई थी। इसका संज्ञान लेते हुए एडीजे की अदालत ने रेलवे की अन्य संपत्तियों का ब्योरा तलब किया।

ऐड़ियां घिस गईं, पर नहीं मिला मुआवजा

Compensation came several contenders una, railway property detail submmit in court.

रेलवे की ओर से लोगों की जमीन अधिग्रहीत कर मुआवजा न देने की हकीकत उस वक्त सामने आई, जब चुरडू पहुंची अमर उजाला टीम को ग्रामीणों ने आपबीती सुनाई।

रेलवे स्टेशन के लिए अपनी हाईवे के साथ लगती जमीन कुर्बान करने वाली 80 वर्षीय विमला देवी ने बताया कि उनकी करीब एक कनाल जमीन रेलवे ने अधिग्रहीत की, जिसका उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला।

चरणो देवी का कहना है कि उन्हें क्या मालूम था कि अपनी खेतिहर जमीन रेलवे को देने पर उन्हें अदालतों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। उन्होंने कई बार कोर्ट में 500 से लेकर 2100 रुपये तक अधिवक्ताओं की फीस दी, लेकिन उन्हें बदले में मिला तो सिर्फ परेशानी। अवतार सिंह, सुदेश कुमार और परमजीत आदि का कहना है कि अब लोग चुप नहीं बैठेंगे और अदालत का रुख करेंगे।

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