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Himachal: सूबे में पहली बार जियोथर्मल तकनीक से बनेंगे कोल्ड स्टोर, आइसलैंड सरकार ने रखा प्रस्ताव

Sat, 18 Nov 2023 12:39 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 18 Nov 2023 12:39 PM IST
सार

सस्ती दरों पर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कोल्ड स्टोर की सुविधा उपलब्ध होने पर बागवान अपना सेब कोल्ड स्टोर में रख सकेंगे और मार्केट में सुधार आने के बाद फसल बेच सकते हैं।

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Cold store in himachal Pradesh will be setup on geothermal technique
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल में पहली बार जियोथर्मल तकनीक से कोल्ड स्टोर बनेंगे। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर किन्नौर जिले के टापरी, रिब्बा और समदो में कोल्ड स्टोर स्थापित होंगे। आइसलैंड सरकार प्रोजेक्ट में सहयोग देगी। प्रदेश सरकार को इसको लेकर आइसलैंड सरकार की ओर से प्रस्ताव मिला है। शनिवार को आइसलैंड के राजदूत के साथ मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे।

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हिमाचल में सरकारी और निजी क्षेत्र के कोल्ड स्टोरों में कुल उत्पादन के महज 10 फीसदी सेब का भंडारण होता है। सेब सीजन में करीब 50 हजार मीट्रिक टन सेब ही कोल्ड स्टोर में रखा जाता है। सीजन में भारी मात्रा में सेब मंडियों में पहुंचने से दाम में गिरावट आ जाती है।
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सस्ती दरों पर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कोल्ड स्टोर की सुविधा उपलब्ध होने पर बागवान अपना सेब कोल्ड स्टोर में रख सकेंगे और मार्केट में सुधार आने के बाद फसल बेच सकते हैं। प्रदेश में अधिकांश बागवानों को सेब के भंडारण की सुविधा नहीं मिल पाती।
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कुछ बागवान बाहरी राज्यों के कोल्ड स्टोर में सेब रखते हैं जहां सेब रखने का खर्चा 35 से 45 रुपये प्रति माह प्रति पेटी आता है। किन्नौर में जियो थर्मल तकनीक से कोल्ड स्टोर स्थापित होने से बागवानों को सस्ती दरों पर सेब भंडारण की सुविधा मिलेगी।

पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कंपनी अपने खर्चे पर कोल्ड स्टोर तैयार करेगी, जिसकी क्षमता 25 हजार से एक लाख पेटी तक हो सकती है। शनिवार को इसे लेकर सीएम एमओयू साइन करेंगे। - जगत सिंह नेगी, बागवानी मंत्री

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एचपी शिवा परियोजना: 130 मिलियन डॉलर देगा एडीबी

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बागवानी मंत्री ने एशियन विकास बैंक की वित्तीय सहायता से इस परियोजना के तहत स्वच्छ पौध सामग्री, नर्सरी विकास, फसल कटाई के बाद प्रबंधन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मजबूत करने पर बल दिया। शिष्टमंडल में टीम लीडर सुने किम, उप टीम लीडर कृष्ण रौतेला, अंतर्राष्ट्रीय बागवानी विशेषज्ञ श्याम खड़का, वित्त विशेषज्ञ जूलिट्टा पोन्नैया और तरूण अग्रवाल शामिल हैं।

एचपी शिवा परियोजना में प्रदेश के किसानों और बागवानों को बीज से लेकर बाजार तक की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। परियोजना में भारत सरकार, एशियन विकास बैंक और प्रदेश सरकार के बीच ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। परियोजना के पहले चरण में 257 क्लस्टरों में 4,000 हेक्टेयर भूमि पर संतरा, अमरुद, अनार, लीची, आम, प्लम और जापानी फल के पौधे रोपे जाएंगे।

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