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हिमाचल: बिजली कटौती से बिलिंग तक, उपभोक्ता नियामक आयोग को बता सकेंगे परेशानी

Tue, 20 Oct 2026 06:30 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 20 Oct 2026 06:30 AM IST
सार

प्रदेश में बिजली कटौती से परेशान उपभोक्ता हों या बिल में गड़बड़ी और शिकायतों के समाधान में देरी से जूझ रहे लोग अब अपनी समस्याएं सीधे विद्युत नियामक आयोग तक पहुंचा सकेंगे। 

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From power cuts to billing issues, consumers will be able to report their grievances to the regulatory commiss
हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में बिजली कटौती से परेशान उपभोक्ता हों या बिल में गड़बड़ी और शिकायतों के समाधान में देरी से जूझ रहे लोग अब अपनी समस्याएं सीधे विद्युत नियामक आयोग तक पहुंचा सकेंगे। आयोग ने बिजली सेवाओं की गुणवत्ता, आपूर्ति की निरंतरता और शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं से फीडबैक मांगा है। इसके माध्यम से आयोग यह जानने का प्रयास करेगा कि बिजली बोर्ड उपभोक्ताओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप सेवाएं दे रहा है या नहीं। तय मानकों पर खरा नहीं उतरने पर उपभोक्ताओं को बोर्ड की ओर से मुआवजा भी मिलेगा। फीडबैक प्रपत्र और इसे भेजने की प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट: www.hperc.org पर प्राप्त की जा सकती है।

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निर्धारित सेवा मानकों का पालन करना अनिवार्य
बिजली वितरण कंपनी के लिए आयोग की ओर से निर्धारित सेवा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। इन मानकों में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता, सेवाओं की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की शिकायतों का तय समय में निपटारा करना शामिल है। यदि बिजली बोर्ड निर्धारित मानकों के अनुरूप सेवाएं देने में विफल रहता है, तो लागू नियमों और पात्रता शर्तों के अनुसार उपभोक्ता मुआवजे के हकदार हो सकते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं से मिलने वाला फीडबैक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे आयोग को सेवाओं में कमियों की पहचान करने और बिजली बोर्ड की जवाबदेही तय करने में मदद मिल सकती है।

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केवल फीडबैक देने से मुआवजा मिलना सुनिश्चित नहीं होगा
हालांकि, केवल फीडबैक देने से मुआवजा मिलना सुनिश्चित नहीं होगा। इसके लिए संबंधित नियमों और निर्धारित शर्तों को पूरा करना आवश्यक होगा। फीडबैक के माध्यम से उपभोक्ता अपने क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की स्थिति, कटौती की बारंबारता और आपूर्ति बहाल होने में लगने वाले समय के बारे में जानकारी दे सकेंगे। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में बिजली सेवाओं को बेहतर बनाने की जरूरत है। बिजली बिलों में गलत राशि दर्ज होने, बिलिंग की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने और बिल संबंधी शिकायतों के समाधान में देरी जैसे मुद्दे भी उठाए जा सकेंगे। उपभोक्ता बिजली दरों से जुड़ी जानकारी को समझने में आने वाली परेशानियों के बारे में भी अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

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कर्मचारियों के व्यवहार पर भी रहेगी नजर
आयोग यह भी जानना चाहता है कि बिजली संबंधी शिकायत दर्ज करवाना उपभोक्ताओं के लिए कितना आसान है और उनके समाधान में कितना समय लगता है। बिजली बोर्ड के कार्यालयों में मिलने वाली सेवाओं और फील्ड में तैनात कर्मचारियों के व्यवहार के संबंध में भी उपभोक्ता अपना अनुभव साझा कर सकेंगे। डिजिटल सुविधाओं की उपयोगिता पर भी फीडबैक दिया जा सकेगा। वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जानकारी प्राप्त करने, ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने और बिल का भुगतान करने के दौरान आने वाली तकनीकी समस्याओं को भी आयोग तक पहुंचाया जा सकता है। इससे उपभोक्ताओं की जरूरत के अनुसार सेवाओं में सुधार करने में मदद मिलेगी।

बिजली बोर्ड में अब स्वीकार नहीं होंगे मैनुअल टीए बिल
राज्य बिजली बोर्ड ने कर्मचारियों के यात्रा भत्ता (टीए) बिलों की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने का फैसला लिया है। इसमें अब कर्मचारियों को अपने टीए बिल कर्मचारी पोर्टल के माध्यम से ही जमा करवाने होंगे। एक नवंबर 2026 से मैनुअल यानी कागज पर जमा करवाए जाने वाले टीए बिल स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके लिए एसएपी-ईआरपी प्रणाली में आवश्यक बदलाव और नियंत्रण लागू किए जा रहे हैं। बोर्ड प्रबंधन ने टीए बिल क्लेम के लिए ऑनलाइन कर्मचारी पोर्टल और एसएपी-ईआरपी के माध्यम से संपूर्ण डिजिटल प्रक्रिया विकसित की है। इस व्यवस्था को लागू करने का उद्देश्य बिलों को जमा करने से लेकर उनके सत्यापन और पोस्टिंग तक की प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्यम से पूरा करना है। इससे बिलों की प्रोसेसिंग में एकरूपता लाने और वित्तीय कार्यों को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

नई व्यवस्था के तहत टीए क्लेम से संबंधित सभी जनरल लेजर में सीधे पोस्टिंग करने की सुविधा ब्लॉक कर दी गई है। अब इन बिलों का सत्यापन और पोस्टिंग एसएपी-ईआरपी प्रणाली के माध्यम से ही की जाएगी। इससे बिलों की प्रक्रिया निर्धारित डिजिटल माध्यम से पूरी होगी और ऑफलाइन तरीके से भुगतान संबंधी प्रविष्टियां करने पर रोक रहेगी। बोर्ड की ओर से लागू की जा रही इस व्यवस्था के बाद कर्मचारियों को टीए क्लेम के लिए ऑनलाइन माध्यम का इस्तेमाल करना होगा। एक नवंबर से मैनुअल बिलों पर रोक लागू होने के कारण कर्मचारियों और संबंधित कार्यालयों को समय रहते नई प्रक्रिया के अनुरूप काम करना होगा। डिजिटल व्यवस्था से बिलों की निगरानी, सत्यापन और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है। हालांकि, भुगतान में कितनी तेजी आएगी, यह नई प्रणाली के क्रियान्वयन और बिलों के निपटारे पर निर्भर करेगा।

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