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मंत्री बोले, बजट है नहीं, कैसे चलाएं सीएनजी बसें

Mon, 01 Feb 2016 09:50 AM IST
Updated Mon, 01 Feb 2016 09:50 AM IST
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cng buses in rohtang national green tribunal himachal govt.

रोहतांग में प्रदूषण मुक्त सीएनजी बसें चलाने के लिए हिमाचल सरकार ने फिलहाल हाथ खड़े कर दिए हैं। हिमाचल सरकार सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए पर्याप्त बजट न होने की बात एनजीटी के समक्ष भी रख चुकी है। इसकी पुष्टि स्वयं परिवहन मंत्री जीएस बाली ने की है। बाली का कहना है कि लाखों रुपये तो अकेले इन बसों के ट्रायल पर ही खर्च हो गए हैं।

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अगर केंद्र सरकार या किसी अन्य एजेंसी से सरकार को आर्थिक सहायता मिल जाती है तो सरकार सीएनजी और इलेक्ट्रिक दोनों ही तरह की बसों को चलाएगी। बिना बजट के सरकार ये कैसे करेगी। दो महीने के बाद ही सरकार को रोहतांग के लिए इन बसों को चलाना होगा। ये कै से चलेंगी, इस पर स्थिति साफ नहीं है।

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सीएनजी है नहीं, 20 बसें चलाने के टेंडर कर दिए आमंत्रित

cng buses in rohtang national green tribunal himachal govt.

प्रदेश सरकार ने सीएनजी का प्रबंध किया नहीं और रोहतांग के लिए 20 सीएनजी बसें चलाने के टेंडर आमंत्रित कर लिए गए हैं। सीएनजी गैस का डिपो मनाली या इसके आसपास खोलना जरूरी है, मगर सरकार के पास इसके लिए पर्याप्त बजट नहीं है। सरकार ऐसे में असमंजस में है कि क्या किया जाए।

परिवहन निगम अधिकारियों की मानें तो पहले रोहतांग में सीएनजी पहुंचनी चाहिए, उसके बाद बसें खरीदने में समय नहीं लगेगा। प्रदेश सरकार टाहलीवाल में सीएनजी का प्लांट लगाने की बातें कर रही है। यहां से रोहतांग के लिए कैसे सीएनजी पहुंचेगी, इस पर स्थिति साफ नहीं है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने रोहतांग को प्रदूषण रहित करने के लिए सरकार को सीएनजी बसें चलाने के लिए कहा है। इसके चलते राज्य सरकार ने दो बार रोहतांग के लिए सीएनजी बसों का ट्रायल किया था। इसमें सफलता मिली थी। एनजीटी के निर्देशों के बाद निगम ने आनन-फानन में बसें चलाने को निविदाएं आमंत्रित की हैं।

बसों की मरम्मत के लिए वर्कशॉप बड़ी चुनौती

cng buses in rohtang national green tribunal himachal govt.

रोहतांग के लिए सीएनजी पहुंचने के बाद सरकार के पास बसों की मरम्मत के लिए वर्कशॉप बड़ी चुनौती रहेगी। सरकार भले ही टाहलीवाल और मनाली में गैस प्लांट लगाने की बातें करती रही हो, लेकिन अगर बस खराब हो जाती है तो उसे ठीक करने के लिए वर्कशॉप, उपकरण और मेकेनिक का होना आवश्यक होगा। ऐसे में बसें चंडीगढ़ या दिल्ली रिपेयर के लिए भेजनी पड़ेंगी।

सरकार के पास दो महीने का समय- रोहतांग के लिए बसें चलाने को सरकार के पास दो माह का समय है। बर्फबारी के चलते रोहतांग बंद है। मार्च तक यह पर्यटक स्थल सैलानियों की आवाजाही के लिए खोला जाता है। दो महीने में सरकार को ये व्यवस्था करनी होगी।

एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक अशोक तिवारी ने कहा कि रोहतांग के लिए सीएनजी बसें चलाने को टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। रोहतांग के लिए 20 बसें चलाई जाएंगी। निगम का काम बसें चलाना है। सीएनजी कहां से आएंगी, कहां प्लाट बनेंगे। यह सरकार तय कर रही है।

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