सीएम वीरभद्र बोले, जब मैं पीसीसी अध्यक्ष था तो प्राइमरी स्कूल में पढ़ते थे सुक्खू
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने प्रदेश में कांग्रेस नेतृत्व को लेकर एक बार फिर पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू पर निशाना साधा। शाहपुर में पत्रकारों के सवाल पर वीरभद्र सिंह बोले - जब मैं पीसीसी अध्यक्ष था, उस समय सुक्खू प्राइमरी स्कूल में पढ़ते थे।
सुक्खू की अध्यक्षता में चुनाव लड़ने के सवाल पर सीएम ने कहा कि यह सब समय तय करेगा कि किसकी अध्यक्षता में चुनाव लड़ा जाएगा। फतेहपुर में पौंग डैम में महाराणा प्रताप की 15 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में सीएम ने कहा कि अगर जिम्मेदारी मिलेगी तो वे पार्टी का नेतृत्व करेंगे। अगर नहीं मिली तो वे पार्टी की सेवा करेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस चुनावों के लिए तैयार है। सीएम ने कहा कि उनके पास किसी से बहस करने का समय नहीं है। पार्टी और संगठन के बीच कोई मतभेद नहीं है। शाहपुर में जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री ने भाजपा खासकर पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल पर जमकर हमला बोला।
उन्होंने कहा कि धूमल सदन की गरिमा नहीं समझते। विस सत्र में 20 दिन से 18 दिन बाहर रहते हैं। उनका मकसद सदन में हो-हल्ला करना रहता है। धूमल सदन के भीतर असभ्य भाषा का प्रयोग करते हैं और सदन नहीं चलने देते। धूमल ने आज तक सदन में कोई ऐसा प्रस्ताव या बिल नहीं लाया, जिससे जनता का भला हो।
एम्स के लिए आपस में लड़ रहे भाजपा नेता
कहा कि भाजपा विधायक विस सत्रों में महज शोर-शराबा करने का भत्ता लेते हैं। भाजपा हर चुनाव में जातिवाद का नारा देती है, कांग्रेस वोट के लिए क्षेत्रवाद और जातिवाद का सहारा नहीं लेती। कांग्रेस चुनाव के दौरान असभ्य भाषा का कतई प्रयोग नहीं करेगी। वीरभद्र बोले - मैं हर जगह स्कूल-कॉलेज खोलता हूं, जिससे जनता खुश होती है, लेकिन पता नहीं क्यों इससे भाजपा नेता नाराज हो जाते हैं।
मुख्यमंत्री ने शाहपुर में कहा कि सरकार ने बिलासपुर में एम्स के लिए जमीन दे दी है, लेकिन अब एम्स की स्थापना के लिए भाजपा नेता आपस में लड़ रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और सांसद अनुराग ठाकुर से कहा कि सरकार ने जब जमीन दे दी है तो एम्स की स्थापना जल्द करवाएं।
शाहपुर में जबरदस्ती का कार्यक्रम
वीरभद्र सिंह ने कहा कि शाहपुर में उनका जबरदस्ती का कार्यक्रम केवल सिंह पठानिया ने रखवा दिया। उनका पहले शाहपुर में कोई कार्यक्रम नहीं था। अचानक बने कार्यक्रम के चलते वे कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कार्यक्रम में राज्यपाल के साथ शामिल नहीं हो सके।