दूसरी राजधानी बनाने के सवाल पर सीएम वीरभद्र ने दिया ये तर्क
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ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में 47वां पूर्ण राज्यत्व दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने एकता, अखंडता और आपसी भाईचारे पर बल देते हुए कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें छठी बार मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है। सीएम ने कहा कि प्रदेश में समान विकास करवाने के लिए ही धर्मशाला को दूसरी राजधानी बनाया है।
राजनीतिक विरोधियों पर बिना नाम लिए निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनावी साल में कई मदारी आपको तमाशा दिखाकर गुमराह करने की कोशिश करेंगे। इन मदारियों को घर में ही रहने दो, हमें इनकी जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे बीच कई ऐसे लोग हैं जो चुनावी समय में क्षेत्रवाद और जातिवाद पर लोगों को बांटते हैं। ऊपर और नीचे का पहाड़ बताया जाता है।
लोगों को गुमराह करते हैं। ऐसे लोगों से बच कर रहना चाहिए। अनेकता में एकता हमारी शक्ति है। कई लोग राष्ट्रीय स्तर पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं, लेकिन हमें इनका मुकाबला करते हुए आगे बढ़ना है। वहीं, पांच फीसदी डीए की घोषणा की उम्मीद लगाए बैठे प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को निराशा ही हाथ लगी।
मुख्यमंत्री ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल के लोगों के लिए 25 जनवरी का दिन ऐतिहासिक है। इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी और प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री स्व. डॉ. वाईएस परमार के कठिन परिश्रम की बदौलत 1971 को पूर्ण राज्यत्व का दर्जा प्राप्त हुआ था। इससे पहले पूर्ण राज्यत्व दिवस समारोह में विभिन्न विभागों की झांकियां निकाली गईं। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और पुलिस, होमगार्ड, एनसीसी कैडेट व स्कूली विद्यार्थियों के मार्चपास्ट की सलामी ली।
सीएम से गुफ्तगू करते दिखे महेश्वर सिंह
समारोह में कुल्लू सदर से विधायक व भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह सीएम वीरभद्र के साथ बैठे। समारोह के दौरान दोनों में गुफ्तगू भी हुई। बता दें कि पूर्व में सीएम कुल्लू दौरे के दौरान महेश्वर सिंह को लेकर कई टिप्पणियां कर चुके हैं। महेश्वर सिंह भी पलटवार कर चुके हैं। मंदिर अधिग्रहण का मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
संवैधानिक पद की मर्यादा भूले मुख्यमंत्री: महेश्वर
ढालपुर में पूर्ण राज्यत्व दिवस पर आयोजित समारोह में सीएम वीरभद्र सिंह के साथ विधायक महेश्वर सिंह के बैठने और गुफ्तगू से चर्चाओं का बाजार गर्म है। हालांकि, समारोह के बाद महेश्वर सिंह के कार्यक्रम में संबोधन के दौरान सीएम की ओर से विपक्षी नेताओं के लिए मदारी शब्द का इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई।
विधायक महेश्वर सिंह ने बयान जारी कर कहा कि सीएम संवैधानिक पद की मर्यादा भूल गए हैं। कहा कि सीएम की ओर से निम्न शब्दों का प्रयोग करना संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। पूर्ण राज्यत्व दिवस पर वीरभद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा था कि मदारी आएंगे और जनता को गुमराह करने की कोशिश करेंगे।
महेश्वर बोले- सीएम जैसे वरिष्ठ नेता को विपक्षी नेताओं पर इस तरह की निम्न भाषा का प्रयोग करना सभ्य नहीं है। मुख्यमंत्री बौखलाहट में ओछे शब्दों का प्रयोग करने पर उतर आए हैं। इस पावन अवसर पर ऐसे निम्न शब्दों का प्रयोग शोभनीय नहीं है। कहा कि हाल ही में पूर्व सांसद चंद्र कुमार ने भी कुल्लू में एक पत्रकार वार्ता में प्रधानमंत्री की तुलना मदारी से की थी। कांग्रेस के नेता आने वाली अपनी बुरी स्थिति को भांप गए हैं।
सत्ता खोने का डर कांग्रेस नेताओं के चेहरों पर साफ देखा जा रहा है। ऐसे में कांग्रेसी नेताओं के साथ संवैधानिक पदों पर बैठे हुए लोग भी अनापशनाप बयानबाजी पर उतर आए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को ऐसे शब्दों से परहेज करने की सलाह दी है। कहा कि वह मुख्यमंत्री के इन शब्दों की निंदा करते हैं। इसका जवाब पार्टी की 20 फरवरी को होने वाले कार्यक्रम में दिया जाएगा।
जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभा रही भाजपा: धूमल
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि पिछले चार वर्षों में भाजपा ने एक जिम्मेवार विपक्ष की भूमिका का निर्वहन किया है। गुण और दोष के आधार पर सरकार के केवल उन्हीं कार्यों की आलोचना की है, जो गैर व्यवहारिक और जनविरोधी हैं। भाजपा ने हमेशा सबूतों के आधार पर और तथ्यों सहित सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। यह अलग बात है कि सरकार ने भाजपा के आरोपों की कभी जांच न करवाकर व्यक्तिगत छींटाकशी करके राजनीति के स्तर को गिराने की कोशिश की है।
कहा कि क्या यह सच नहीं है कि सरकार के कुप्रबंधन से आज प्रदेश के आर्थिक हालात ठीक नहीं हैं। सरकार खराब वित्तीय स्थिति से निपटने के लिए आर्थिक संसाधनों को बढ़ाने की बजाय ऋण पर ऋण ले रही है। प्रदेश में हालात इस कद्र बिगड़ चुके हैं कि कर्मचारियों को वेतन-पेंशन देने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है।
कहा कि अगर भाजपा के आरोप गलत हैं तो सरकार प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर श्वेत पत्र जारी करे। इसमें पिछले चार वर्षों में लिए गए ऋण की स्थिति स्पष्ट करे। साथ ही प्रदेश के आर्थिक संसाधनों को बढ़ाने में सरकार कितना समर्थ हो पाई है, इस बारे में स्पष्टीकरण दें।
कहा कि जिन योजनाओं में केंद्र सरकार धन का पूरा प्रावधान कर रही है, प्रदेश सरकार उन योजनाओं को भी लागू करने में असफल हो रही है। प्रदेश में आपदा प्रबंधन पर केंद्रीय धन का समुचित प्रयोग न होना, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना का सही ढंग से कार्यान्वयन न होना और 61 राष्ट्रीय राजमार्गों की डीपीआर तैयार न होना, स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से विभिन्न परियोजनाओं में दिए धन का प्रयोग न होना सरकार की कार्यप्रणाली के उदाहरण हैं।