मुख्यमंत्री बोले, टूट जाउंगा पर कभी सरेंडर नहीं करूंगा
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने विरोधियों को चेताते हुए कहा कि मैं टूट जाउंगा लेकिन कभी सरेंडर नहीं करूंगा। आय से अधिक संपत्ति के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वीरवार को सुबह मुख्यमंत्री हमीरपुर के सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकारवार्ता में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट में केस ट्रांसफर करना स्वागत योग्य है।
उन्होंने कहा कि इस बात का उन्हें पहले ही आभास था कि केस दिल्ली ट्रांसफर होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र की बीजेपी सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से सीबीआई को एक हथियार बनाकर इसका दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि सीबीआई का काम बड़े मामले देखना है ना कि आय के मामलों को निपटाना।
संपत्ति के मामले को देखने का काम आयकर विभाग का है। वीरभद्र ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पर भी धूमल परिवार के इशारे पर सीबीआई के गलते इस्तेमाल करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एक ही मामले में सीबीआई की दो-दो इन्कवायरी समझ से परे है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तो सब्र का पैमाना भर चुका है।
ईमानदारी से जुटाई हुई नहीं धूमल की संपत्ति: वीरभद्र
रामपुर पहुंचे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रेम कुमार धूमल और उनके परिवार की संपत्ति की जांच जल्द होने वाली है। उनकी जुटाई संपत्ति कोई ईमानदारी की नहीं है। भाजपा नेता ट्रॉमा सेंटरों को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि पूर्व केंद्र सरकार के कार्यकाल में रामपुर के लिए ट्रॉमा सेंटर स्वीकृत किया है। उसी समय इन सेंटरों के लिए बजट प्रावधान भी किया गया।
वीरवार को पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सीबीआई ने जिस केस में उन्हें क्लीन चिट दी थी, उसी मामले को दोबारा खोला गया। भाजपा नेता सत्ता में आते ही सिर्फ मेरे खिलाफ मुकदमे बनाते रहे हैं। कांग्रेस हमेशा विकास पर ध्यान केंद्रित करती है। पार्वती प्रोजेक्ट का काम रोका गया है। इस मामले को वह केंद्र सरकार और संबंधित निर्माण कंपनी से उठाएंगे। पूछा जाएगा कि क्योंकि काम रोका गया है?
एचपीसीए ने गलत तरीके से हथियाई जमीन
उधर, हमीरपुर में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने एक बार फिर एचपीसीए पर गलत तरीके से जमीन हथियाने के आरोप लगाए हैं। कहा कि धूमल सरकार के समय एचपीसीए को पहले हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के नाम से पंजीकृत किया गया। उसके बाद धर्मशाला, नूरपुर, बिलासपुर के लुहणू, शिमला के लालपानी, कोटखाई के गुम्मा, हमीरपुर के नादौन स्थित अमत्तर मैदान को अपने नाम कर लिया।
एक रुपये लीज पर क्रिकेट के नाम पर जमीन हासिल की गई। धर्मशाला में जिस जगह एचपीसीए के होटल का निर्माण किया गया, उसे कागजों में बंजर जमीन दिखाया गया। जांच के बाद वहां 1500 पेड़ों का खुलासा हुआ। होटल निर्माण के दौरान 500 पेड़ों को जमीन में दफन किया गया। कभी हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन तो कभी हिमालयन प्लेयर क्रिकेट एसोसिएशन के नाम पर एचपीसीए लोगों को गुमराह करती आई है।
सरकार के ध्यान में लाए बगैर एचपीसीए का मुख्यालय जालंधर और रजिस्ट्रेशन कानपुर में करवाई गई। इसमें अधिकतर आजीवन सदस्य जालंधर से हैं। वह एचपीसीए के खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से नहीं कर रहे हैं। एचपीसीए का मामला कांग्रेस के चुनाव घोषणापत्र में शामिल था। वह मामले में समझौता करने को तैयार हैं, लेकिन प्रदेश वासियों के लिए एचपीसीए को पहले मेंबरशिप खोलनी होगी।
उन्होंने सांसद एवं एचपीसीए अध्यक्ष अनुराग से पूछा कि रणजी टीम में कितने खिलाड़ी हिमाचल से हैं। आरोप लगाया कि फर्जी तरीके से बाहर के खिलाड़ियों को हिमाचल का दर्शाया गया है।