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विशेष बातचीत: मुख्यमंत्री सुक्खू बोले- हमने बदली 40 साल पुरानी व्यवस्था, आने वाले समय में दिखेंगे परिणाम
Mon, 11 Dec 2023 10:57 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 11 Dec 2023 10:57 AM IST
सार
भविष्य की योजनाओं, विपक्ष के हमलों के अलावा और तमाम ज्वलंत मुद्दों पर अमर उजाला के राज्य ब्यूरो प्रमुख सुरेश शांडिल्य ने उनसे विस्तृत बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश..
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पिछले साल आज ही के दिन जब शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर हिमाचल के 15वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी तो युवा नेता से प्रदेश को नई आस बंधी। राजनीति में युवावस्था से सक्रिय लेकिन सरकार में कभी शामिल नहीं रहे सुक्खू के लिए राज्य की बागडोर संभालना चुनौती से कम नहीं था। वह भी तब जबकि राज्य की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी और सत्ता में आने के लिए कांग्रेस की ओर से किए गए वादों को पूरा करने का दबाव था।
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बरसात के कहर ने अग्निपरीक्षा ली। सत्ता संभालते ही कर्मचारी चयन आयोग को भंग करने जैसे कुछ बड़े फैसले जब सुक्खू ने लिए तो इरादे स्पष्ट हो गए कि वह लीक से हटकर काम करेंगे। वह दावा भी कर रहे हैं कि उन्होंने एक साल में 40 साल पुरानी व्यवस्था को बदला है। उनकी एक साल की परफारमेंस, भविष्य की योजनाओं, विपक्ष के हमलों के अलावा और तमाम ज्वलंत मुद्दों पर अमर उजाला के राज्य ब्यूरो प्रमुख सुरेश शांडिल्य ने उनसे विस्तृत बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश..
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प्रश्न : कर्मचारियों को नए वेतनमान का एरियर कब तक देंगे?
उत्तर : हम धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला रहे हैं, जो बीस फीसदी लाई जा चुकी है। आमदनी के स्रोत बढ़ेंगे, कर्मचारियों का बकाया भी चुकता कर दिया जाएगा।
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प्रश्न : अफसरशाही कुछ मंत्री-विधायकों के निशाने पर है, शिकायतें भी हुई हैं?
उत्तर : यह पार्ट एंड पार्सल चला रहता है। यह पहले से होता है। कुछ अधिकारी होते हैं। हमारे पास अच्छे अधिकारी हैं, वे अच्छा काम कर रहे हैं। हमने सरकार बदलने के बाद अफसर बदलने की प्रथा खत्म कर उनसे काम लिया।
प्रश्न : अपने एक साल के कार्यकाल को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर : एक साल में 40 वर्षों से चली आ रही व्यवस्था को बदला। पुराने कानूनों और ट्रेंड में बदलाव किया, इसकी खुशी है। कुछ विभाग रह गए हैं। व्यवस्था परिवर्तन के दौर में बदलाव के परिणाम धरातल पर दिखेेंगे। आपदा के बावजूद हिमाचल को आगे बढ़ाया। लोगों ने सहयोग दिया। बच्चों ने तो गुल्लक तक तोड़े। खुद भी अपनी जमा पूंजी आपदा राहत के लिए दे दी।
प्रश्न : बड़ी उपलब्धियां क्या रहीं?
उत्तर : सिस्टम को ठीक करना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि रही, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना भी। अनाथ बच्चों को 27 साल तक चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट का दर्जा दिया। हिमाचल कैसे आत्मनिर्भर बने, इस दिशा में काम किया। दस साल में सबसे अमीर राज्य बने, इस दृष्टि से बहुत मेहनत की। पहला बजट 40 साल में सबसे हटकर रहा।
प्रश्न : आप कहते हैं कि पिछली सरकार बहुत देनदारियां छोड़ गई, कैसे चुकाएंगे?
उत्तर : इस कारण सरकार आर्थिक बदहाली से गुजर रही है। कर्मचारियों की ही 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। 12 प्रतिशत डीए भी देना है। हम लक्ष्य साधने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। नियम-कानून बदल रहे हैं और नई योजनाएं भी ला रहे हैं।
प्रश्न : आप उत्तर भारत में कांग्रेस से अकेले मुख्यमंत्री हैं, क्या आगे प्रचार का दायित्व भी बढ़ेगा?
उत्तर : मैं लोकसभा चुनाव में हिमाचल पर फोकस करूंगा। यहीं तक सीमित रहना चाहता हूं। बाकी पार्टी आदेश पर अमल करूंगा।
प्रश्न : बिलासपुर, कांगड़ा को एक-एक या कांगड़ा को दो मंत्री?
उत्तर : मैंने कभी किसी जिले को एक या दो मंत्री देने की बात नहीं की। बिलासपुर से राजेश धर्माणी मेरे पुराने साथी हैं। पिछली बार उनका कैबिनेट के लिए नाम था, मगर यह किसी कारणवश छूट गया। बिलासपुर से कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। हाईकमान उनकी चर्चा करेगा तो उनकी वकालत करूंगा। अगले मंत्रिमंडल विस्तार में बिलासपुर को जगह मिलेगी। मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय नहीं, काम करने वाला संतुलन देखा जाता है। विधानसभा उपाध्यक्ष की नियुक्ति भी की जानी है। इसे भी शीत सत्र से पहले कर दिया जाएगा।
प्रश्न : मंत्रिमंडल विस्तार करने जा रहे हैं, तीन मंत्री बनेंगे या एक पद खाली छोड़ेंगे?
उत्तर : तीन भरने हैं, चार या पांच। या फिर मंत्रियों में फेरबदल करना है, यह हाईकमान तय करता है। जिस दिन हाईकमान की चिट्ठी आएगी, उस दिन बता दिया जाएगा। इसका इंतजार है।
प्रश्न : आप अपना राजनीतिक गुरु किसे मानते हैं?
उत्तर : इसमें गुरु की कोई बात नहीं है। शुरू से ही मेहनत करने की आदत थी। धीरे-धीरे बढ़ती गई। कॉलेज में चुनाव लड़ता गया तो यह भावना पनपती गई। बाद में राजनीति को ध्येय बना लिया। बचपन में ब्रॉकहॉस्ट में रहते थे तो वहां पर लोग मुझे लीडर-लीडर कहते थे। बाद में सब नेताओं के साथ काम करने का मौका मिला। विद्यार्थी जीवन में विद्या स्टोक्स या पंडित सुखराम, वीरभद्र सिंह, आनंद शर्मा या सत महाजन सभी मेरी कार्यप्रणाली से संतुष्ट थे। उनको पता था कि मैं स्पष्ट बोलने वाला आदमी हूं। इनका समय-समय पर मार्गदर्शन मिलता रहा और मदद भी।
प्रश्न : आपका आदर्श कौन?
उत्तर : राजीव गांधी मेरे आदर्श थे। उनके समय मैं एनएसयूआई का प्रदेशाध्यक्ष था। माता-पिता के व्यक्तित्व से प्रभावित हूं। मां का मुझ पर ज्यादा प्रभाव रहा।