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Himachal News: एक माह में हटाने होंगे जंगलों में गिरे पेड़, अफसरों की जवाबदेही तय
Mon, 28 Aug 2023 11:31 AM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 28 Aug 2023 11:31 AM IST
सार
पेड़ों के चिह्नित करने से लेकर इनके अंतिम निपटान के लिए 30 दिन की अवधि तय की गई है। महीने के पहले सात दिनों में वन रक्षक और वन निगम के कर्मचारी इससे संबंधित ब्योरा तैयार करेंगे।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू।
- फोटो : जनसंपर्क विभाग
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विस्तार
हिमाचल के वन क्षेत्र में प्राकृतिक कारणों से गिरे और टूटे पेड़ों के उचित प्रबंधन के लिए प्रदेश सरकार ने मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की है। इसके तहत ऐसे पेड़ों के कटान से लेकर बिक्री के लिए उपलब्ध करवाने तक की प्रक्रिया को समयबद्ध पूर्ण करने पर विशेष ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है। निर्धारित अवधि में प्रक्रिया की सख्ती से अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है।
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पेड़ों के चिह्नित करने से लेकर इनके अंतिम निपटान के लिए 30 दिन की अवधि तय की गई है। प्रारंभिक स्तर पर चार वृत्तों हमीरपुर, धर्मशाला, सोलन व शिमला के पांच वन मंडलों के तहत सात वन परिक्षेत्रों में यह मानक संचालन प्रक्रिया एक सितंबर 2023 से पायलट आधार पर शुरू की जाएगी। अगले चरण में जुलाई 2024 से इसे पूरी तरह से प्रदेश के छह वन वृत्तों के 70 वन परिक्षेत्रों तक लागू किया जाएगा।
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नई मानक संचालन प्रक्रिया के तहत किसी वन परिक्षेत्र में 25 से कम क्षतिग्रस्त पेड़ों के निस्तारण के लिए एक निश्चित समयसारिणी तैयार की गई है, जिसमें पेड़ों के चिह्नित करने से लेकर इनके अंतिम निपटान तक 30 दिन की अवधि तय की गई है। महीने के पहले सात दिनों में वन रक्षक और वन निगम के कर्मचारी इससे संबंधित ब्योरा तैयार करेंगे। आगामी तीन दिनों में उप वन परिक्षेत्राधिकारी ऐसे पेड़ों का चिन्हांकन करेंगे और इससे संबंधित सूची वन परिक्षेत्राधिकारी को अगले तीन दिनों में सौंपेंगे।
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वन परिक्षेत्राधिकारी सात दिनों के भीतर पेड़ों के कटान, इन्हें लट्ठों में बदलने और निर्दिष्ट डिपो तक उत्पाद के परिवहन से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को पूर्ण करेंगे। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि नई मानक संचालन प्रक्रिया से स्थानीय स्तर पर इमारती लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित करवाएंगे। परिवहन व्यय में कमी, राजस्व में वृद्धि और स्थानीय स्तर पर कार्यरत कर्मियों की क्षमता में भी वृद्धि तय की जाएगी।
वन मंडलाधिकारी को सूचित करेंगे परिक्षेत्राधिकारी
परिक्षेत्राधिकारी वन मंडलाधिकारी को सूचित करेंगे और वह माह की 22 व 23 तारीख को वन निगम में अपने समकक्ष से संपर्क कर निष्कर्षण लागत और परिवहन व्यय निर्धारित करने के बारे में अवगत करवाएंगे। इसके साथ ही वन मंडलाधिकारी निष्कर्षण, परिवहन लागत और रॉयल्टी के आधार पर बिल तैयार कर इसे वन निगम के मंडलीय प्रबंधक को भेजेंगे।
बिल की अदायगी पर माह की 24 से 26 तारीख के मध्य उत्पादित माल वन निगम को भेज दिया जाएगा। यदि वन निगम इसे लेने से मना करता है तो वन परिक्षेत्राधिकारी माह की 27 एवं 28 तारीख को विभागीय स्तर पर नीलामी की प्रक्रिया आरंभ करेगा और इसके लिए हिमाचल प्रदेश वन विभाग के प्रबंधन विंग की ओर से आरक्षित मूल्य निर्धारित किया जाएगा।
डाटा एकत्र करने के लिए वेब पोर्टल भी विकसित होगा
इस प्रक्रिया को विस्तार देते हुए पेड़ों के चिन्हांकन, निष्कर्षण और निपटान से संबंधित डाटा एकत्र करने के लिए एक समर्पित वेब पोर्टल भी विकसित किया जाएगा। क्षतिग्रस्त पेड़ों की जियो टैगिंग के माध्यम से लिए गए छायाचित्रों को इस पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, वहीं परिक्षेत्र डिपो अथवा सड़क किनारे के डिपो में एकत्र की गई इमारती लकड़ियों के लॉट के बारे में भी इसमें जानकारी संकलित की जाएगी। सूचना प्रौद्योगिकी आधारित इस सेवा से क्षतिग्रस्त पेड़ों के प्रबंधन से जुड़े लागत-लाभ के आकलन की भी सुविधा मिल सकेगी।
वन-पुलिस चौकियों के कर्मी रोकेंगे लकड़ी की तस्करी : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने लकड़ियों की तस्करी से निपटने के लिए वन विभाग की चौकियों को पुलिस सीमा चौकियों के साथ एकीकृत करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने वन विभाग की बैठक में इमारती लकड़ी की तस्करी रोकने के लिए एकीकृत चौकियों पर सीसीटीवी निगरानी सहित अत्याधुनिक तकनीक अपनाने पर बल दिया।
वन भूमि पर गिरे पेड़ों को तुरंत हटाने और उचित निपटान के निर्देश भी दिए। सीएम ने पांच वन मंडलों में खैर के पेड़ों की कटाई की कार्य योजना की भी समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, प्रधान सचिव अमनदीप गर्ग, सचिव (गृह) डॉ. अभिषेक जैन, विधि सचिव शरद लगवाल, पीसीसीएफ (हॉफ) राजीव कुमार भी उपस्थित रहे।