CM Sukhu: सीएम ने जारी की एसओपी, नपेंगे नशा तस्कर; जब्त होगी गैर-कानूनी रूप से अर्जित संपत्ति
सीएम सुक्खू ने कहा कि अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी से समाज के लिए खतरा उत्पन्न होता है जो हम सभी के लिए चिंता का विषय है। इस खतरे से निपटना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विस्तार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी चिंता का विषय है। इससे निपटना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सीएम ने मंगलवार देर शाम मादक द्रव्यों और स्वापक औषधि मनः प्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार रोकथाम अधिनियम-1988 के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की। कहा कि एसओपी मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध गतिविधियों से निपटने के लिए तैयार की गई है। इसमें आरोपी को हिरासत में लेने, हिरासत के आदेशों को निष्पादित करने और गैरकानूनी रूप से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने की विस्तृत प्रक्रिया बताई गई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मार्गदर्शन करने के लिए एक सलाहकार बोर्ड भी स्थापित किया गया है।
कहा कि नशीली दवाओं से संबंधित अपराधों को रोकने के लिए एक समर्पित विशेष कार्यबल कार्य कर रहा है। ड्रग तस्करों की गतिविधियों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। ये अवैध कार्य अत्यधिक संगठित तरीके से किए जाते हैं और गुप्त रूप से ड्रग तस्करी का पैमाना काफी बड़ा होता है। इसलिए ऐसी गतिविधियों की प्रभावी रोकथाम तथा इसमें संलिप्त लोगों की धरपकड़ नितांत आवश्यक होती है। इस अवसर पर मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू, सचिव गृह डॉ. अभिषेक जैन, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सतवंत अटवाल और अभिषेक त्रिवेदी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
वरदान साबित होगी फसल बीमा योजना : जगत नेगी
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों-बागवानों को लाभान्वित करने के निरंतर प्रयास कर रही है। पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (आरडब्ल्यूबीसीआईएस) प्रदेश के बागवानों के लिए वरदान साबित होगी। उन्होंने यह जानकारी उद्यान विभाग और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ आरडब्ल्यूबीसीआईएस की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी। उन्होंने कहा कि योजना वास्तविक आधार पर होनी चाहिए। राज्य में बागवान फलों की खेती में उच्च घनत्व वाले पौधों की ओर रुख कर रहे हैं।
वर्तमान टर्म शीट मानक पौधों के अनुसार बनाई गई है लेकिन इसे उच्च घनत्व वाले पौधों के लिए अद्यतन किया जाना चाहिए। ताकि, बागवानों को वास्तविक समय और परिस्थितियों के अनुसार योजना के तहत लाभ प्रदान किया जा सके। दावों को प्रमाणित करने के लिए किसानों को मौसम आधारित डेटा भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। जगत सिंह नेगी ने कहा कि उद्यान विभाग को शीघ्र टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। राज्य में तीन क्लस्टर हैं। इन क्लस्टरों में योजना के तहत चार जिले शामिल हैं। योजना में पहली बार अनार, लीची और अमरूद की फसल शामिल की जाएगी। इस अवसर पर निदेशक उद्यान संदीप कदम, हिमाचल प्रदेश शिवा परियोजना के निदेशक देवेंद्र ठाकुर, संयुक्त निदेशक उद्यान हेम चंद शर्मा मौजूद रहे।