कुल्लू शॉल बनेगी पेटेंट, मुख्यमंत्री का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिमाचली शॉल का पेटेंट अधिकार होना चाहिए क्योंकि हाथ से तैयार किए गए इन शॉलों की विशेष पहचान है।
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित बनाया जाएगा कि इन उत्पादों को देश के अन्य उद्यमियों द्वारा तैयार नहीं किया जाए। मुख्यमंत्री कुल्लू के मौहल में भुट्टिको बुनकर सहकारी समिति के सदस्यों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि यह देखने में आया है कि कई बुनकर उद्योग हिमाचली शॉल विशेषकर कुल्लू और किन्नौरी शॉल की तरह ही तैयार कर उन्हें बाजार में ऊंचे दामों में बेच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हिमाचली शॉल की देश-विदेश में भारी मांग है और इन उत्पादों को पेटेंट किए जाने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
रेशम मिलों को पुर्नजीवित करने की आवश्यकता
वीरभद्र सिंह ने प्रदेश में रेशम और ऊन उद्योगों को पुर्नजीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया है। नूरपुर रेशम मिल का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नूरपुर सिल्क साड़ी और पशमिना शॉल की देश में काफी मांग है परन्तु राज्य में ऐसे कई हथकरघा उद्योग हैं, जिनकी अपनी जमीन और औद्योगिक ढांचा है, परन्तु यह उद्योग निष्क्रिय पड़े हैं, जिन्हें पुर्नजीवित करने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भुट्टिको बुनकर सहकारी समिति हथकरघा क्षेत्र में स्थापित देश की पहली बुनकर सहकारी समिति है। हिमाचल ऊन एवं रेशम उद्योग को विकसित किए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि लघु एवं मध्य स्तर के उद्योग प्रदेश के लोगों की आर्थिकी में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं और यह क्षेत्र प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार उपलब्ध करवा रहा है।
उन्होंने कहा कि छोटे स्तर के उद्योग विभिन्न उत्पादों के निर्यात में 40 प्रतिशत तक का योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी की भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे पूर्व, भुट्टिको बुनकर सहकारी समिति के अध्यक्ष सत्य प्रकाश ठाकुर ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
उन्होंने बुनकर समिति को आ रही विभिन्न समस्याओं के बारे में मुख्यमंत्री को अवगत करवाया। विधायक रवि ठाकुर, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष टेक चन्द डोगरा, कुल्लू के उपायुक्त राकेश कंवर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।