{"_id":"5b9ba331867a557ff9674295","slug":"cm-jairam-thaklur-orders-free-all-roads-in-himachal-pradesh-of-pot-holes","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़कों की खस्ता हालत पर सीएम ने लगाई अफसरों की क्लास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सड़कों की खस्ता हालत पर सीएम ने लगाई अफसरों की क्लास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 15 Sep 2018 12:08 PM IST
विज्ञापन
PIC
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने नेशनल हाईवे एथॉरिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों को दस दिन के अंदर प्रदेश की सभी मुख्य सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में दस दिन के अंदर एक्शन टेकन रिपोर्ट भी सौंपने को कहा है। मुख्यमंत्री ने यह आदेश शुक्रवार को दोनों विभागों के अधिकारियों के साथ सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक के दौरान दिए।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में सड़कें ही जीवन रेखा कही जाती हैं। साथ ही पर्यटन की दृष्टि से भी प्रदेश सड़क मार्ग पर मुख्य रूप से निर्भर है। ऐसे में सड़कों को दुरुस्त रखना बेहद जरूरी है ताकि यात्रा करने वालों को असुविधा न हो। बारिश के बाद राज्य के सभी राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों की खस्ता हालत पर मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को विभागीय अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई।
विज्ञापन
राष्ट्रीय राजमार्गों के वर्षा से क्षतिग्रस्त होने पर उनकी मरम्मत व बहाली के संबंध में समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि ढलानों को स्थिर करने के लिए रॉक बोल्टिंग जैसी नई तकनीक को अपनाने के प्रयास करें। सीएम कहा कि निष्पादन एजेंसियां भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में पर्याप्त श्रमशक्ति व मशीनों की तैनाती करें ताकि भूस्खलन की स्थिति में सड़क को शीघ्र बहाल किया जा सके।
विज्ञापन
राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों के आसान प्रवाह के लिए ढीली मिट्टी और पत्थरों को हटाने के लिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भारी वर्षा के कारण सड़कों को न्यूनतम नुकसान हो इसके लिए उपयुक्त जल निकासी तथा नालियों की सुविधा के लिए एक दीर्घकालीन रणनीति तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि दीवारों, ब्रेस्टवॉल तथा पैदल मार्गों के निर्माण के दौरान उच्च गुणवत्तायुक्त मानदंडों को अपनाया जाए ताकि दुर्गम स्थितियों का सामना कर सकें।
अतिरिक्त मुख्य सचिव लोक निर्माण मनीषा नंदा ने 2017-18 के दौरान प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा राज्य को विभिन्न श्रेणियों में हाल ही में नई दिल्ली में प्रदान किए गए तीन पुरस्कारों को मुख्यमंत्री को सौंपा। इस दौरान नंदा ने बताया कि भूस्खलन के कारण 923 सड़कों को नुकसान पहुंचा है जिनमें से 915 को वाहनों के लिए बहाल कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव एवं गुणवत्ता नियंत्रण प्रकोष्ठ के प्रभारी संजय कुंडू ने बताया कि प्रकोष्ठ ने सड़कों तथा पुलों की गुणवत्ता का पता लगाने के लिए राज्य के चार जिलों बिलासपुर, मंडी, कांगड़ा तथा हमीरपुर का दौरा किया है। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकांत बाल्दी, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता आरपी वर्मा और अशोक कुमार चौहान समेत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण व लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पस्थित रहे।
कीरतपुर मनाली फोरलेन के काम में लाएं तेजी
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कीरतपुर मनाली रोड के फोरलेन के काम में देरी पर सख्त नाराजगी जताई। कहा कि यह सड़क राज्य में पर्यटन की दृष्टि से प्रमुख जीवन रेखा है। निष्पादन एजेंसियों को निर्देश दिए कि इस फोरलेन के कार्य में तेजी लाए व कैचमेंट क्षेत्रों में एकत्र जल को निकालने के लिए गैबिनयन दीवारों और कल्वर्टों का निर्माण कर स्थाई पुर्नबहाली सुनिश्चित की जाए।
58 एनएच की डीपीआर तैयार करने को मिले स्वीकृति पत्र
बैठक के दौरान नंदा ने बताया कि 70 नए राष्ट्रीय राजमार्गों में से 3650 किलोमीटर लंबाई के 58 राष्ट्रीय राजमार्गों की डीपीआर तैयार करने के लिए स्वीकृति पत्र जारी कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की सभी प्रमुख फोरलेन सड़क परियोजनाओं के लिए निष्पादन एजेंसियों को सड़कों की प्रभावी एवं बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करनी चाहिए।
नशा विरोधी अभियान के लिए विभाग तैनात करें नोडल अधिकारी- मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मादक द्रव्यों के खिलाफ प्रदेश में अभियान को कारगर बनाने के लिए विभागों को नोडल अफसर तैनात करने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने कहा है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम्य विकास, सूचना एवं जन संपर्क, सामाजिक न्याय और गृह विभाग अपने नोडल अफसर तैनात करें।
इसके अलावा दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले ड्रग की आने की मात्रा और उससे बनने वाली दवाओं की मात्रा पर भी ड्रग इंस्पेक्टर निगाह रखें। मुख्यमंत्री शुक्रवार को सचिवालय में नशा विरोधी अभियान की तैयारियों पर आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में नशीले पदार्थाें के प्रयोग के खिलाफ सख्ती से निपटने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
इस सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस उन क्षेत्रों में नियमित छापामारी करे जहां से नशीले पदार्थों की आपूर्ति की संभावना अधिक हो। अभिभावकों को भी अपने बच्चों पर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नशे की तस्करी और नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने और नशा तस्करों की संपत्ति को जब्त करने के लिए भी कड़े कानून बनाए जाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने पड़ोसी राज्यों की तुलना में राज्य में सजा की दर कम होने पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों को अभियान के लिए प्रशिक्षित किया जाए। उन्होंने प्रदेश में एच-1 दवाओं के निर्माण की जानकारी प्राप्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने महाविद्यालयों में बडी सिस्टम शुरू कर विद्यार्थियों को नशे की लत से बाहर लाने का सुझाव भी दिया।
नशे के दुष्प्रभावों को लेकर वृतचित्र तैयार करने, चिकित्सकों, परामर्शदाताओं और पैरामेडिकल स्टाफ को उचित प्रशिक्षण देने पर भी सीएम ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में और पुनर्वास केन्द्रों की स्थापना की जाएगी।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह बीके अग्रवाल ने कहा कि उप जिला न्यायवादी और अतिरिक्त जिला न्यायवादी को दवा निरीक्षकों की ओर से मादक द्रव्यों से जुड़े मामले सामने लाने चाहिए क्योंकि दवा निरीक्षक अपने मामलों के अभियोजन में व्यस्त रहते हैं। बैठक में मुख्य सचिव विनीत चौधरी, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीकांत बाल्दी, मनीषा नन्दा व निशा सिंह समेत अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।