सीएम जयराम बोले- शीघ्र बनेगी भुभू टनल, केंद्र को भेजी डीपीआर
सीएम ने सोमवार को द्रंग विधानसभा क्षेत्र के लांझणू में 1.96 लाख से बने बैली ब्रिज, पीएमजीएसवाई के तहत 25 करोड़ से निर्मित घटासनी-बरोट और 4 करोड़ 90 लाख से बरोट-मियोट सड़क के द्वितीय चरण का उद्घाटन किया। मुल्थान में सीएम ने कहा कि चार सालों में रिकॉर्ड सड़कों का निर्माण हुआ है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि चौहार घाटी को कुल्लू से जोड़ने के लिए भुभू टनल की डीपीआर एक स्टेज पर पहुंचा दी है। डीपीआर स्वीकृति के लिए केंद्र को भेजी है। मंजूरी मिलते ही तीव्र गति के साथ टनल का कार्य किया जाएगा। भुभू टनल बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। बेरोजगारों को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। सीएम ने सोमवार को द्रंग विधानसभा क्षेत्र के लांझणू में 1.96 लाख से बने बैली ब्रिज, पीएमजीएसवाई के तहत 25 करोड़ से निर्मित घटासनी-बरोट और 4 करोड़ 90 लाख से बरोट-मियोट सड़क के द्वितीय चरण का उद्घाटन किया। मुल्थान में सीएम ने कहा कि चार सालों में रिकॉर्ड सड़कों का निर्माण हुआ है। बरोट एक बेहतरीन टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। लगातार आकर्षण का केंद्र बन रहा है। शिमला और मनाली के बाद पर्यटकों की पहली पसंद बरोट है। गर्मियों में बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। पर्यटन की दृष्टि से यहां बहुत कुछ करना अभी बाकी है। झटिंगरी, बरोट और जंजैहली की एक जैसी सुंदरता और समानता है। तीनों टूरिस्ट डेस्टिनेशन को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए एडीबी प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश में 21 सौ करोड़ का बजट प्रावधान है। बीड़ बिलिंग में पैराग्लाइडिंग का लुत्फ लेने के लिए बड़ी तादाद में विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं।
महेश्वर खाते थे मांस, मैंने खाई बाली की दाल : जयराम
सोमवार को द्रंग विधानसभा क्षेत्र के बरोट के एकदिवसीय दौरे के दौरान सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2000 में पहली बार विधायक बने तो बैजनाथ विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के लिए मेरी ड्यूटी पूर्व सांसद महेश्वर सिंह के साथ प्रचार को लेकर छोटा भंगाल लगाई गई। उस दौरान 15 दिन लगातार बरोट रहा हूं। महेश्वर सिंह रोज मांस खाते थे मैंने मांस खाना छोड़ रखा था। उस दौरान बाली की दाल यानी राजमा और गोभी की सब्जी और सरसों का साग बहुत खाया। उन्होंने मंडी के चौहारघाटी और कांगड़ा जिले के छोटा बड़ा भंगाल क्षेत्र को अपना घर जैसा बताया। कहा कि इन सभी क्षेत्रों की एक समानता, एक संस्कृति और एक भाषा है। कहा कि काफी अरसे बाद बरोट आना हुआ। मंडी कॉलेज में पढ़ते थे तो एक बार पिकनिक मनाने बरोट आए थे। उस दौरान मेरे एक रिश्तेदार के पास कार होती थी, जिसमें स्लीपर ढोए जा रहे थे। उस समय के फोटो आज भी हैं।