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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Climate Change Conference: Sonam Wangchuk said that World War3 is going on between humans and nature, not bullets

शिमला: सोनम वांगचुक बोले- गोलियों से नहीं, इंसान और प्रकृति के बीच चल रहा तीसरा विश्व युद्ध

Sat, 18 Dec 2021 11:33 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 18 Dec 2021 11:33 PM IST
सार

राजधानी शिमला के होटल पीटरहॉफ में आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान वांगचुक ने कहा कि पानी की कमी और ग्लेशियरों का पिघलना एक साथ जारी है। जरूरत है कि युवा आगे आएं और पहाड़ी संस्थानों में पहाड़ों के बारे में ज्यादा से ज्यादा शोध करें। तकनीक के प्रयोग के लिए शिक्षा बेहतर हथियार है। 

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Climate Change Conference: Sonam Wangchuk said that World War3 is going on between humans and nature, not bullets
डॉ. सोनम वांगचुक को सीएम ने सम्मानित किया। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख के संस्थापक निदेशक डॉ. सोनम वांगचुक ने कहा कि दुनिया में तीसरा विश्वयुद्ध गोली-बारूद से नहीं लड़ा जाएगा। तीसरा विश्वयुद्ध इंसान और प्रकृति के बीच शुरू हो चुका है। इस जंग को जीतने के लिए ज्यादा से ज्यादा शोध कर कारणों को दूर करने के ठोस प्लान पर काम करना होगा। शनिवार को राजधानी शिमला के होटल पीटरहॉफ में आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान वांगचुक ने कहा कि पानी की कमी और ग्लेशियरों का पिघलना एक साथ जारी है। जरूरत है कि युवा आगे आएं और पहाड़ी संस्थानों में पहाड़ों के बारे में ज्यादा से ज्यादा शोध करें। तकनीक के प्रयोग के लिए शिक्षा बेहतर हथियार है।

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लेकिन वर्तमान शिक्षा पद्धति में हम युवाओं के दस या पंद्रह साल ऐसी चीजों में बरबाद कर देते हैं जिनका जिंदगी में खास मतलब नहीं रहता। इसलिए पढ़ाई में प्रकृति को जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि आईआईटी मंडी जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित संस्थानों को पहाड़ों की परेशानियों पर शोध कर उसे कम करने के रास्ते निकालने चाहिए। सभी धर्मों के धार्मिक नेताओं को भी आगे आकर लोगों को जीवनशैली बदलने और प्रकृति को बचाने की जिम्मेदारी को पाप-पुण्य व हिंसा-अहिंसा के तौर पर देखते हुए समझाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ वायु प्रदूषण से ही हर साल 7 मिलियन लोगों की मौत हो रही है। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान मरने वालों की संख्या के बराबर लोग अब प्राकृतिक आपदाओं से मर रहे हैं। जाहिर है, हमें दिक्कत का सामना करने की बजाय उसके लिए पहले से तैयार रहने और उसे रोकने के लिए प्रयास करने की जरूरत है।

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