जलवायु परिवर्तन सम्मेलन: सीएम जयराम बोले- पिघलते ग्लेशियर हिमाचल समेत दुनिया के लिए बड़ा खतरा
दो दिवसीय कार्यक्रम के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण पारिस्थितिकी तंत्र पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघलते हैं। वातावरण में कार्बन डाइ ऑक्साइड के स्तर को कम करने के लिए प्रदेश सरकार हरित ईंधन जैसे जल विद्युत और सौर उर्जा के इस्तेमाल पर ध्यान दे रही है।
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पिघलते ग्लेशियरों से हिमाचल प्रदेश समेत देश-दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। इस खतरे की सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए प्रगति और प्रकृति के बीच सामंजस्य बनाकर ही जलवायु परिर्वतन से संबंधित चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटना चाहिए। यह बात मुख्यमंत्री ने शनिवार को पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से आयोजित सुदृढ़ हिमालय सुरक्षित भारत, जलवायु परिवर्तन सम्मेलन 2021 की अध्यक्षता करते हुए कही। दो दिवसीय कार्यक्रम के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण पारिस्थितिकी तंत्र पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघलते हैं। वातावरण में कार्बन डाइ ऑक्साइड के स्तर को कम करने के लिए प्रदेश सरकार हरित ईंधन जैसे जल विद्युत और सौर उर्जा के इस्तेमाल पर ध्यान दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए प्रदेश में शीघ्र ही राज्य स्वच्छ ईंधन नीति लाई जाएगी। ठाकुर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ऑनलाइन माध्यम से डिजिटल जलवायु परिवर्तन संदर्भ केंद्र का शिलान्यास भी किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने सीसी एवं डीआरआर पर नॉलेज नेटवर्क के लिए दिशा निर्देश व जलवायु परिवर्तन पर राज्य कार्य योजना भाग-दो और हिमाचल प्रदेश में सीएएफ आरआई कार्यक्रम भी लांच किया। वहीं, कार्यक्रम में शिरकत कर रहे भारत में जर्मनी के राजदूत वाल्टर जे लीनेयर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण विश्व में कई तरह की प्राकृतिक आपदाएं आ रही हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सभी को प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने सम्मेलन के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि वैज्ञानिक इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेंगे।
इससे पहले उन्होंने हिंदी में नमस्ते कहते हुए लोगों को संबोधित किया। इसके बाद उन्होंने सायरी में एक किसान के ग्रीन हाउस का भी दौरा किया। साथ ही स्थानीय महिला मंडल के किसान उत्पाद संघ के सदस्यों से भी मुलाकात की और उनके साथ नाटी भी की। प्रारंभिक सत्र के खत्म होने पर निदेशक पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सुदेश कुमार मोकटा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसके अलावा रविवार को भी तकनीकी सत्र का आयोजित किया जाएगा जिसमें दो सौ से ज्यादा वैज्ञानिक ग्लेशियरों के पिघलने और उसे रोकने के संबंध में मंथन करेंगे। सम्मेलन में मुख्य सचिव राम सुभग सिंह, उत्तराखंड विस्थापन बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ एसएस नेगी, संयुक्त सचिव राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कुणाल सत्यार्थी आदि उपस्थित थे।
हर क्षेत्र के लिए बनाई जाए आपदा प्रबंधन योजना
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के महानिदेशक कमल किशोर ने कहा कि हर क्षेत्र की आपदा प्रबंधन योजना बनाई जानी चाहिए। उन्होंने सभी राज्यों में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के गठन की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि हर जगह एनडीआरएफ भेजी जाती है लेकिन राज्य एसडीआरएफ को सशक्त करें। इस काम में एनडीआरएफ प्रशिक्षण व दक्षता में मदद करेगी। वरिष्ठ सलाहकार विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार डॉ अखिलेश गुप्ता ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग विश्वभर में एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने बहु जोखिम चेतावनी प्रणाली तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।