15 लाख मजदूरों के लिए सीटू ने मांगी 5 हजार रुपये की फौरी राहत
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सीटू राज्य कमेटी ने सरकार से प्रदेश में कार्यरत संगठित व असंगठित क्षेत्र में लाखों मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा देने की मांग की है। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा कि प्रदेश में कोरोना के कारण उत्पन्न परिस्थिति से सबसे ज्यादा नुकसान मजदूर वर्ग को हुआ है। रातों-रात उनका रोजगार खत्म हो गया है। नादौन में उत्तर प्रदेश निवासी एक मजदूर ने आत्महत्या करने की कोशिश की है। इससे लग रहा है कि मजदूरों की स्थिति आने वाले दिनों में खराब होने वाली है। जेब में पैसा न होने के कारण प्रदेश में सैकड़ों मजदूर पैदल मार्च कर घरों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। ऐसे कई उदाहरण कांगड़ा-पठानकोट, मैहतपुर-नंगल, कालाअंब-हरियाणा, बद्दी-चंडीगढ़, पावंटा साहिब-उत्तराखंड व परवाणू-कालका सीमा में देखने को मिले हैं।
मेहरा ने कहा कि प्रदेश में मनरेगा में लगभग 12 लाख जॉब कार्ड होल्डर हैं। असंगठित क्षेत्र में मिस्त्री, मजदूर, इलेक्ट्रिशियन, वेल्डर, कारपेंटर, प्लंबर के रूप में लगभग तीन लाख निर्माण मजदूर कार्यरत हैं। इन 15 लाख लोगों में से ज्यादातर लोग हर रोज दिहाड़ी लगाकर गुजर-बसर करने वाले लोग हैं। सरकार ने प्रदेश श्रमिक कल्याण बोर्ड से जो दो हजार रुपये मासिक आर्थिक सहायता की घोषणा की है, वह भी कानून अनुसार बोर्ड में पंजीकृत लगभग एक लाख मजदूरों पर लागू होती है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इन 15 लाख मजदूरों के परिवारों को तीन महीनों के लिए प्रति माह पांच हजार रुपये की मदद दी जाए। तीन महीने का प्रति माह 35 किलो मुफ्त राशन एकमुश्त दिया जाए। राशन कार्ड न होने के बावजूद पांच हजार के साथ राशन की व्यवस्था की जाए।