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दलाईलामा से बातचीत करने के समर्थन में उतरे चीन के बुद्धिजीवी

Fri, 08 Jun 2018 09:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला Updated Fri, 08 Jun 2018 09:52 AM IST
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Chinese intellectuals wrote letters in support of the Dalai Lama

चीनी बुद्धिजीवियों ने तिब्बत मसले को लेकर समर्थन अभियान शुरू किया है। दुनिया भर में रह रहे 67 चीनी विद्वानों, नीति विशेषज्ञों, लेखकों और पत्रकार-संपादकों ने एकजुट होकर धर्मगुरु दलाईलामा के समर्थन में पत्र लिखा है।

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पत्र लिखने वालों में अमेरिका, हांगकांग, स्पेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, ताईवान, चीन, कनाडा, ब्रिटेन में रह रहे 67 चीनी बुद्धिजीवी शामिल हैं। सभी ने एक पत्र पर हस्ताक्षर कर निर्वासित तिब्बत सरकार की तिब्बत मसले को लेकर मध्य मार्ग नीति का समर्थन किया।
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साथ ही चीन सरकार से दलाईलामा के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए कहा है। 67 चीनी बुद्धिजीवियों की अगुवाई करने वाले सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयार्क के प्रोफेसर मिंग ने चीनी लोगों का मध्य मार्ग नीति के समर्थन में एकजुटता के नाम से अभियान शुरू किया है।
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अभियान के अगुवा चीन निवासी सिटी यूनिवर्सिटी आफ न्यूयार्क के प्रोफेसर मिंग शिया ने बताया कि चीनी लोगों के रूप में हम गहराई से महसूस करते हैं कि तिब्बत मुद्दे को हल करने और चीन तथा तिब्बत के बीच सुलह एवं चीन में लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए मध्य मार्ग नीति महत्वपूर्ण प्रस्ताव है।

Chinese intellectuals wrote letters in support of the Dalai Lama

हम मध्य मार्ग नीति समर्थन करते हैं। हमें उम्मीद है कि चीन सरकार दलाईलामा की ओर से बताए गए ज्ञान मार्ग और साहस की सराहना कर ऐतिहासिक भूल को सुधार कर वार्ता फिर से शुरू करेगी। इस प्रयत्न से दलाईलामा और निर्वासित तिब्बती तिब्बत में लौटकर स्वायत्तता का आनंद ले सकेंगे। 

तिब्बत के मुद्दे को हल करने के लिए चीनी और तिब्बतियों दोनों के लिए परस्पर लाभकारी दृष्टिकोण के रूप में दलाईलामा ने मध्य मार्ग नीति का प्रस्ताव दिया था। मध्य मार्ग नीति के जरिए दलाईलामा चीन से तिब्बत के लिए स्वतंत्रता नहीं, बल्कि चीन के ढांचे के भीतर स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं।

बिना पुख्ता पहचान दलाईलामा से नहीं मिल पाएंगे अब तिब्बती

Chinese intellectuals wrote letters in support of the Dalai Lama

तिब्बत से भागकर नेपाल से होकर भारत में आकर बिना पुख्ता पहचान वाले तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा से नहीं मिल पाएंगे। गृह मंत्रालय ने हिमाचल सरकार को एडवाइजरी जारी कर बिना पुख्ता पहचान वाले लोगों पर दलाईलामा से मिलने के लिए रोक लगा दी है। सरकार ने एडवाइजरी कांगड़ा पुलिस को भेज दी है।

कांगड़ा पुलिस ने एडवाइजरी को लागू कर दिया है। एसपी कांगड़ा संतोष पटियाल ने माना कि इस तरह की एडवाइजरी जारी हुई है। उन्होंने कहा कि बिना पुख्ता पहचान दिखाए कोई भी तिब्बती धर्मगुरु से नहीं मिल सकता है। पहचान के पूरे दस्तावेज दिखाने के बाद ही लोगों को दलाईलामा से मिलने दिया जाएगा।

सुरक्षा के मद्देनजर ऐसा किया गया है। सूत्रों के अनुसार काफी समय से तिब्बत से भागकर भारत में आने वाले तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा से मिल रहे थे। इन्हें नेपाल में निर्वासित तिब्बत सरकार के दफ्तर से भारत में आने की अनुमति मिलती थी।

तिब्बत से भागकर आने वाले अमूमन तिब्बतियों के पास पहचान के पुख्ता दस्तावेज नहीं होते हैं। मसलन, पासपोर्ट आदि दस्तावेज इनके पास नहीं होते। कुछ अरसा पहले मैकलोडगंज में निर्वासित तिब्बत सरकार के थैंक्यू इंडिया कार्यक्रम में करीब आधा दर्जन से ज्यादा ऐसे तिब्बति

घुस आए थे, जिनके पास पहचान के पुख्ता दस्तावेज नहीं थे। ये तिब्बती तिब्बत से भागकर भारत में आए थे। मसले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने एडवाइजरी जारी कर बिना पहचान वाले तिब्बतियों पर दलाईलामा से मिलने पर रोक लगा दी।

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