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बच्चे बदलने का मामला: जांच कमेटी ने दी थी चौंकाने वाली रिपोर्ट

Sun, 23 Oct 2016 10:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 23 Oct 2016 10:10 AM IST
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Child exchange Case at KNH shimla, Shimla police Interrogate Doctors and nurses.
पराए बेटे नितांश को गोद में उठाए अंजना

प्रदेश के सबसे बड़े मातृ एवं शिशु कमला नेहरू अस्पताल में बच्चों के बदलने के मामले की पुलिस ने गहराई से जांच शुरू कर दी है। दोनों दंपतियों के अस्पताल की व्यवस्थाओं और वहां की गई चूक पर अस्पताल प्रशासन को पूरी तरह से दोषी करार दिया है। जिस पर अब पुलिस जांच पूरी तरह से अस्पताल और वहां डिलीवरी के रोज तैनात चिकित्सक से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक के कर्मी के कार्यों की भूमिका जानने में जुट गई है।

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शनिवार को जांच अधिकारी डीएसपी बलबीर जसवाल और उनकी टीम ने अस्पताल पहुंचकर चार चिकित्सकों, नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट से घंटों पूछताछ की। इसमें पुलिस अधिकारी ने प्रसव की प्रक्रिया में इमरजेंसी से लेकर, ऑपरेशन थियेटर, लेबर रूम और वार्ड तक की उपचार की प्रक्रिया को जाना। साथ ही 26 मई की रात को बच्चे बदलने के समय ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों और स्टाफ का रिकार्ड खंगाला।
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इस दिन ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ से पुलिस टीम ने घंटों पूछताछ कर पूरी सच्चाई को सामने लाने के लिए तथ्य जुटाए। पुलिस टीम  सोमवार को भी स्टाफ से पूछताछ का यह क्रम जारी रखेगी। टीम ने  एचओडी के अलावा ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों से पूछताछ की। इसके बाद पुलिस ने नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट से लेबर रूम डिलीवरी के दौरान मौजूद स्टाफ की जानकारी हासिल की।
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पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार लेबर रूम में पीजी, कंसल्टेंट और एसआर डॉक्टर ड्यूटी देते हैं। जबकि दूसरी ओर डाक्टरों की सहायता के लिए स्टाफ नर्स, मिडवाइफ सहित सफाई कर्मी की ड्यूटी यहां पर कैसे लगाती है, आदि की जानकारी ली। पुलिस इस मामले में सबसे पहले यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि आखिर चूक कहां हुई, किस स्तर के कर्मी ने की। यह सिर्फ चूक है या फिर कोई साजिश, इस पर से भी पुलिस जांच में पर्दा उठ सकता है।

जांच कमेटी पर सवाल, कहा था शीतल ने बेटी को ही जन्म दिया

Child exchange Case at KNH shimla, Shimla police Interrogate Doctors and nurses.
पराई बेटी अमानत के साथ शीतल

बच्चा बदलने के मामले में आनन फानन में बनी आईजीएमसी की जांच कमेटी की पहली रिपोर्ट सवालों के घेरे में आ गई है। इस कमेटी ने अपनी शुरुआती जांच में अस्पताल के दस्तावेजों की गहन पड़ताल और अस्पताल कर्मियों के लिखित बयान के आधार पर नतीजा निकाला था कि शीतल ने जिस बेटी को जन्म दिया है, उसे वही बच्चा सौंपा गया है।

लेकिन कमेटी तब तक अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंच सकती, जब तक माता-पिता और बच्चे की अस्पताल प्रशासन अनुवांशिक जांच नहीं हो जाती।   इस प्रकरण के उठने के बाद आईजीएमसी को जांच सौंपी गई थी। इस तीन सदस्यीय कमेटी में आईजीएमसी के गायनीकोलॉजी विभाग के प्रोफसर और एसोसिएट प्रोफेसर रखे गए थे।

इस रिपोर्ट के मुताबिक 26 मई सुबह नौ बजे से 27 मई सुबह नौ बजे तक चौबीस घंटों के भीतर लेबर रूम में 22 गर्भवती महिलाएं डिलीवरी के लिए पहुंचीं। 26 मई की रात 9 बजकर 40 मिनट पर महिला को प्रसव पीड़ा हुई। महिला का नाम शीतल है जोकि अनिल कुमार की पत्नी है।  महिला  की पहले से ही तीन साल की बच्ची है। लेबर रूम में महिला को सीनियर रेजीडेंट ने इमरजेंसी ड्यूटी के दौरान लेबर रूम में देखा।

महिला इस दौरान पूरे होश में थी। महिला ने उसी रात 11 बजकर 10 मिनट पर एक नवजात बच्ची को जन्म दिया। इस दौरान इमरजेंसी में ड्यूटी में मौजूद डॉक्टरों और सीनियर रेजीडेंट ने प्रसूता महिला की डिलीवरी करवाई। इसमें स्टाफ नर्सिज, टीबीए (ट्रेंड बर्थ अटेेंडेंट) लेबर रूम में मौजूद थीं।

रिपोर्ट में दी गई है ये जानकारी

Child exchange Case at KNH shimla, Shimla police Interrogate Doctors and nurses.

रिपोर्ट के मुताबिक डिलीवरी के बाद महिला ने जिस बच्ची को रात 11 बजकर 10 मिनट पर जन्म दिया, उसे इमरजेंसी ड्यूटी में मौजूद टीबीए ने नवजात को स्टाफ नर्स को  हैंडओवर किया। इसके बाद बच्ची को लेबर रूम स्थित न्यूनेटल रेसूसिएशन कार्नर ले जाया गया। लेबर रूम में मौजूद डॉक्टरों व स्टाफ नर्सों के मुताबिक बच्ची को न्यूनेटल रेसूसिएशन कार्नर शिफ्ट करने से पहले महिला को लिंग समेत उसकी बच्ची को दिखाया गया।

न्यूनेटल रेसूसिएशन कार्नर में रखी बच्ची को महिला के साथ मौजूद अटेंडेंट रिचू को सौंपा और उसके बाद फाइल में साइन लिए गए। कुछ समय के लिए महिला को डॉक्टरों की निगरानी में आब्जरवेशन में रखा गया और उसके बाद वार्ड में शिफ्ट किया गया। उस समय तक प्रशासन को किसी भी तरह की शिकायत नहीं की थी। 27 मई को जब महिला अपनी नवजात बच्ची के साथ वार्ड में थी तब भी शिकायत नहीं थी।

डिलीवरी के बाद हर पेशेंट को आब्जरवेशन के लिए 48 घंटों के लिए वार्ड में रखा जाता है। लेकिन 27 मई को जब महिला वार्ड में थी तब उसके पति अनिल कुमार के आग्रह पर महिला को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया। महिला के अस्पताल से डिस्चार्ज के समय महिला और उसके परिजनों ने किसी भी तरह की कोई शिकायत नहीं थी। वह सब पूरी तरह से संतुष्ट थे।

आधे घंटे की प्रक्रिया में बरती लापरवाही पड़ी भारी

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कमला नेहरू अस्पताल में बच्चा बदलने के मामले में हुई चूक को लेकर  स्टाफ से लेकर डॉक्टर तक की लापरवाही सामने आ रही है। एक नवजात के पैदा होने से लेकर उसे वार्ड में शिफ्ट करने तक की प्रक्रिया में ही नवजात बदलने की संभावना अधिक रहती जाता है। लड़का पैदा होने की खबर तो मिलती है, लेकिन वार्ड मेें लड़की थमाई जाती है। लगभग आधे घंटे से भी कम की इस प्रक्रिया में ही स्टाफ और डॉक्टर की लापरवाही का खामियाजा दो माताओं को पांच महीने तक भुगतना पड़ा। हालांकि एक मां को पता था कि बेटी उसकी नहीं है, फिर भी वे उस पर मां का प्यार लुटाती रही, वहीं दूसरी तरफ एक मां इस बात से अनजान कि बेटा उसका नहीं है, उसे लाड करती रही।

डॉक्टरों के अनुसार जब नवजात पैदा होता है तो उसके बाद वह बच्चे की जांच करके स्टाफ नर्स को सौंप देते हैं और वह प्रसूता के इलाज मेें जुट जाते हैं। ऐसे में उसके बाद उनकी कोई भूमिका नहीं होती है। अगर नवजात स्वस्थ है तो वे उसकी फिर से जांच नहीं करते हैं। स्टाफ नर्स और मिड वाइफ के पास ही नवजात की जिम्मेवारी होती है। वहीं नवजात के पैदा होने के बाद जो नोट तैयार होता है उसे डॉक्टर ही तैयार करता है। सूत्रों के अनुसार कई बार नोट डिलीवरी रूम में तैयार नहीं करके वार्ड में प्रक्रिया पूरी की जाती है। ऐसे में नोट तैयार करने में गलती होने की पूरी संभावना होती है। ऐसे में इस मामले में भी शायद ऐसा ही कुछ हुआ है। अगर समय पर नोट तैयार होता तो यह चूक नहीं होती।

ऐसे पूरी होती है प्रक्रिया
गर्भवती महिला को लेबर रूम में ले जाया जाता है तो उसी समय एक स्लिप भी तैयार की जाती है जिसमें गर्भवती का नाम, नवजात का भार, नवजात का मेल या फीमेल फीड करना होता है। इस दौरान लेबर रूम में एक डॉक्टर, स्टाफ नर्स, मिड वाइफ (दाई) और एक सफाई कर्मचारी मौजूद रहते हैं। डिलीवरी के बाद डॉक्टर उसकी जांच करके उसे स्टाफ नर्स के पास और स्टाफ नर्स उसे मिड वाइफ के पास सौंप देती है। मिड वाइफ बच्चे को नर्सरी में ले जाकर कपड़े में लपेटती है और उसका भार नोट करती है और वापस आकर रजिस्टर पर लिखवाती है। इसी दौरान उस कपड़े पर वो स्लिप चस्पां की जाती है, जिस पर नवजात की मां का नाम लिखा होता है। उसी दौरान रजिस्टर मेें एक नोट तैयार किया जाता है, जिसे आमतौर पर डॉक्टर को ही लिखना होता है।

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